नई दिल्ली. गॉड ऑफ़ क्रिकेट कहे जाने वाले सचिन तेंदुलकर का नाम पैंडोरा पेपर्स (Pandora Papers leak) लीक में सामने आ रहा है. इंटरनेशनल कंसोर्टियम ऑफ इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिस्ट्स’ (ICIJ) ने 1.19 करोड़ से अधिक दस्तावेजों को खंगालने के बाद पंडोरा पेपर्स के हवाले से रिपोर्ट दी है जिसमें 300 भारतीयों के नाम हैं और उसमें गॉड ऑफ़ क्रिकेट कहे जाने वाले सचिन तेंदुलकर, उनकी पत्नी, ससुर आनंद मेहता का नाम भी शामिल है.

क्या है यह मामला

सचिन और उनके परिवार के दूसरे सदस्यों के नाम पर ब्रिटिश वर्जिन आइलैंड्स (BVI) में एक ऑफ़-शोर कंपनी थी, जो 2016 में बंद कर दी गई थी. आईसीआईजे ( इंटरनैशनल कोंसोर्टियम ऑफ़ इंवेस्टिगेटिव जर्नलिस्ट्स ) के दस्तावेजों में दुनिया भर के 336 ताकतवर राजनेताओं से जुड़ी 956 कंपनियों के बारे में पता चला है.

बता दें कि अगर कोई व्यक्ति किसी दूसरे देश में कंपनी खोल ले, तो वो कंपनी कहलाती है ऑफ शोर कंपनी. और ब्रिटिश वर्जिन आइलैंड कहलाते हैं टैक्स हेवन. माने ऐसी जगह, जहां टैक्स बचाने, टैक्स चोरी और काले पैसे को सफेद बनाने के साधन मौजूद होते हैं. अब मीडिया रिपोर्ट्स में सामने आया है कि सचिन उनकी पत्नी अंजलि तेंदुलकर और ससुर आनंद मेहता, ‘सास इंटरनेशनल लिमिटेड’ नाम की एक कंपनी का हिस्सा थे, और 2007 में पैंडोरा पेपर्स में इस कंपनी का नाम सामने आया था.

मामले पर सचिन तेंदुलकर फाउंडेशन के निदेशक मृणमय मुखर्जी ने क्या कहा

सचिन तेंदुलकर का नाम पैंडोरा पेपर्स में आने के बाद, सचिन तेंदुलकर फाउंडेशन के सीईओ और निदेशक मृणमय मुखर्जी ने इस पर जवाब दिया है. उन्होंने जवाब देते हुए कहा, “सचिन तेंदुलकर द्वारा किए गए जिस निवेश का आप ज़िक्र कर रहे हैं वो लिबरलाइज़्ड रेमिटेंस स्कीम (LRS) के तहत किया गया है. इसका विधिवत लेखा-जोखा उनके टैक्स रिटर्न में मौजूद है. तेंदुलकर द्वारा किया गया निवेश भारत के बैंकिंग चैनलों हुआ है. इसके अलावा, आपके द्वारा बताई गई 60 करोड़ रुपये की राशि पूरी तरह से गलत है.”

 

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