नई दिल्ली. भारत रत्न के बाद देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्मा पुरस्कारों की घोषणा की जा चुकी है. कल विजेताओं को पद्म पुरस्कार ( Padma Shree Awards ) वितरित किए गए. कुल 119 हस्तियों को विभिन्न जगत में उनके अभूतपूर्व योगदान के लिए पद्म पुरस्कार दिए गए, इसी सूचि में कर्नाटक के नारंगी विक्रेता हरकेला हजब्बा का नाम भी शुमार है, जिन्होंने यह वाक़ई साबित कर दिया है कि हौसलों के उड़ान से मंज़िलें मिल जाती हैं.

हरकेल्ला हजब्बा के जज़्बे की कहानी

देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान पद्म पुरस्कारों के लिए तीन श्रेणियाँ हैं- पद्म विभूषण, पद्म भूषण और पद्मश्री। पद्म विभूषण असाधारण और विशिष्ट सेवा के लिए, पद्म भूषण उच्च क्रम की विशिष्ट सेवा के लिए और पद्मश्री किसी भी क्षेत्र में विशिष्ट सेवा के लिए दिया जाता है. कुल 119 हस्तियों को विभिन्न जगत में उनके अभूतपूर्व योगदान के लिए पद्म पुरस्कार दिए गए. इसी श्रेणी में कर्नाटक के नारंगी विक्रेता हरकेला हजब्बा का नाम भी शामिल है, जिन्होंने नारंगी बेचकर अपने गाँव में बच्चों के लिए स्कूल बनवाया. हजब्बा ने बताया कि उनके गाँव में एक भी स्कूल न होने के चलते वो पढ़ाई नहीं कर पाए थे, इसलिए उन्होंने अपनी जमा पूंजी जोड़कर गाँव में स्कूल बनवाया ताकि कोई भी बच्चा शिक्षा से वंचित न रह सके.

बीते कुछ सालों से पद्म पुरस्कारों में बड़े बदलाव देखने को मिल रहे हैं, जानी-मानी हस्तियों के अलावा अब आम जनता को उनके अभूतपूर्व योगदान के लिए पद्म पुरस्कार दिए जा रहे हैं. इसी क्रम में नारंगी विक्रेता हरेकला हजब्बा, साइकिल मैकेनिक मोहम्मद शरीफ, अब्दुल जब्बार खान, लीला जोशो, तुलसी गौड़ा, राहीबाई सोमा पोपेरे जैसे असाधारण काम करने वाले आम लोग भी शामिल रहे हैं, जो औरों के लिए प्रेरणाश्रोत के रूप में हैं.

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