नई दिल्ली. P Chidambaram INX Media Case Allegations: आईएनएक्स मीडिया केस में सुप्रीम कोर्ट से तुरंत राहत ना मिलने के बाद पिछले 30 घंटो से सीबीआई और ईडी से बचते फिर रहे पूर्व गृहमंत्री पी चिदंबरम को को आखिरकार उनके घर से गिरफ्तार कर लिया गया है. सीबीआई की टीम पूर्व गृहमंत्री पी चिदंबरम को गिरफ्तार कर सीबीआई मुख्यालय ले गई है. जहां पर उनसे सीबीआई के आला अफसर आईएनएक्स मीडिया केस से जुड़े मामले में सारी रात पूछताछ करेंगे. सीबीआई के डायरेक्टर भी मुख्यालय पहुंच गए हैं. आज पूरी रात चिदंबरम सीबीआई के मुख्यालय में ही रहेंगे और कल यानी गुरुवार कोर्ट में उन्हें पेश किया जाएगा. पूर्व गृहमंत्री पी चिदंबरम को आईएनएक्स मीडिया मामले जेल जाने की नौबत क्यों आई, उनके ऊपर क्या-क्या आरोप है इसके बारे में हम आपको इस आर्टिकल में बताएंगे.

सीबीआई द्वारा पूर्व गृहमंत्री पी चिदंबरम को गिरफ्तार करने के बाद अब 24 घण्टे के भीतर सीबीआई को कोर्ट में पेश करना होगा. चूंकि चिदंबरम राज्यसभा सांसद है ऐसे में सांसदों और विधायको के लिए बनाई गई स्पेशल कोर्ट में उन्हें पेश किया जाएगा. आईएनएक्स मामला अभी राऊज एवन्य कोर्ट स्पेशल जज अजय कुमार सुन रहे है. सीबीआई राऊज एवन्य कोर्ट में स्पेशल जज अजय कुमार की कोर्ट में चिदंबरम को कल पेश कर सकती है. चिदंबरम को निचली अदालत में जमानत याचिका दाखिल करनी होगी. चिदम्बरम की तरफ से कल ही जमानत अर्जी दाखिल होगी.

कल चिदंबरम की तरफ से पटिलाया राउस एवन्यु कोर्ट में अर्जी दाखिल की जाएगी जिसमें कहा जाएगा कि पी चिदंबरम कानून को मानने वाले नागरिक हैं जिन्होंने जांच में सहयोग किया, जांच एजेंसी जब भी उन्हें बुलाएगी तो वो जांच में शामिल होंगे, लिहाजा उन्हें जमानत दे दी जाए. सीबीआई की तरफ से पी चिदंबरम की कस्टडी मांगी जाएगी. सीबीआई का कहना है कि चिदंबरम जांच में सहयोग नहीं कर रहे हैं ऐसे में चिदंबरम से हिरासत में पूछताछ जरूरी है.

आईएनएक्स मीडिया मामले में पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम पर हैं ये गंभीर आरोप-

वित्त मंत्री रहते बेटे कार्ति चिदंबर को फायदा पहुंचाने का आरोप

चर्चित आईएनएक्स मीडिया घोटाला जिसमें पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम की गिरफ्तारी हुई है, इसमें सीबीआई ने 15 मई 2017 को एफआईआर दर्ज की थी. इसके बाद वर्ष 2018 में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने मनी लॉन्ड्रिंग का केस दर्ज किया था. यह मामला आईएनएक्स मीडिया को वर्ष 2007 में गलत तरीके से विदेशी निवेश की मंजूरी देने का है. मालूम हो कि पी चिदंबरम के वित्त मंत्री रहते ही आईएनएक्स मीडिया को विदेशी निवेश की मंजूरी मिली थी. चिदंबरम ने जिस आईएनएक्स मीडिया कंपनी के लिए विदेशी निवेश को मंजूरी दी थी उसकी सहयोगी कंपनी उनके बेटे कार्ति चिदंबरम की थी. कार्ति चिदंबरम पर आरोप है कि उन्होंने अपने पिता के वित्त मंत्री होने का फायदा उठाया और गैरकानूनी निवेश को भी मंजूरी दिला दी. इस मामले में पी चिदंबरम और उनके बेटे कार्ति चिदंबरम दोनों आरोपी है.

चार करोड़ निवेश की मिली मंजूरी, जमा कराए 305 करोड़

आरोप यह है कि आईएनएक्स मीडिया कंपनी को टीवी न्यूज में विदेशी निवेश के लिए केवल चार करोड़ 62 लाख रुपये की मंजूरी मिली थी, लेकिन कथित हेराफेरी के जरिए करीब 305 करोड़ रुपये का विदेशी निवेश लाया गया. आरोप यह है भी है अवैध तरीके से लाई गई इस रकम को गलत तरीके से दूसरी कंपनियों में ट्रांसफर किया गया. पूर्व वित्तमंत्री पी चिदंबरम आईएनएक्स मीडिया और एयरसेल मैक्सिस दोनों मामलों में फंसे हैं. अब जब हाईवोल्टेज ड्रामे के बाद चिदंबरम की गिरफ्तारी हो गई है तो आपको बता दें कि लंबे समय से जांच एजेंसियों सीबीआई और ईडी की तरफ से उनकी हिरासत की मांग की जा रही थी . लेकिन पिछले साल जुलाई से चिदंबरम को लगातार हाईकोर्ट से राहत मिल रही थी.

घोटाले के पैसे से विदेश में खरीदी संपत्तियां

प्रवर्तन निदेशालय का आरोप है कि पी चिदंबरम के बेटे ने कथित घोटाले की रकम से स्पेन में एक टेनिस क्लब, ब्रिटेन में कॉटेज एंव भारत में 54 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्तियां खरीदी हैं. ईडी द्वारा साल 2008 में पास किए गए अटैचमेंट ऑर्डर के मुताबिक कार्ति चिदबंरम ने सारी संपत्तियां कथित तौर पर रिश्वत के पैसे से खरीदी थी. इस पूरे मामले में जांच एजेंसियों द्वारा चिदंबरम का दिल्ली स्थिति 16 करोड़ की कीमत वाला जोरबाग का बंगला भी अटैच कर लिया गया है. एजेंसियों की मानें तो कार्ति चिदंबरम के बार्सिलोना स्थिति टेनिस क्लब की कीमत 15 करोड़ है.

दिल्ली हाई कोर्ट का आदेश

20 अगस्त 2019 यानी मंगलवार को दिल्ली हाईकोर्ट ने पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबर तगड़ा झटका देते हुए बीते 19 महीने से लंबित उनकी अग्रिम जमानत अर्जी को खारिज कर दिया. अदालत ने अपने आदेश में कहा कि पी चिदंबरम को केवल इस बिना पर गिरफ्तारी से छूट नहीं दी जा सकती है कि वे ससंद के एक सदस्य है. कोर्ट ने अपने आदेश में यह भी कहा कि प्रथम दृष्टया लगता है कि मामले की जांच के लिए चिदंबरम को हिरासत में लेकर पूछताछ करना बेहद जरूरी है. दिल्ली हाईकोर्ट के 24 पेज के इस फैसले ने साफ कर दिया कि चिदंबरम राहत पाने के हकदार नहीं है. हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ पी चिदंबरम ने सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दाखिल की. लेकिन उन्हें वहां से भी फौरी तौर पर कोई राहत नहीं मिली. सुप्रीम कोर्ट इस मामले की सुनवाई शुक्रवार को करेगा.

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