नई दिल्ली: गृहमंत्री के तौर पर कभी देश के सबसे शक्तिशाली मंत्री रहे पलानियप्पन चिदंबरम आज उन्हीं संस्थाओं से बचने की जुगत में हैं जो कभी उनके नीचे काम किया करती थी. आईएनएक्स मीडिया केस में सुप्रीम कोर्ट से अंतरिम जमानत याचिका खारिज होने के बाद करीब 29 घंटों तक गिरफ्तारी के डर से जांच एजेंसियों से भागते रहे पी चिदंबरम आखिरकार बुधवार शाम मीडिया के सामने आए और लंबे ड्रामे के बाद उन्हें गिरफ्तार भी कर लिया गया.

फिलहाल चिदंबरम की तरफ से वकीलों की फौज सीबीआई कोर्ट में उन्हें हिरासत से बचाने के लिए पसीने बहा रही है. पी चिदंबरम के गृहमंत्री रहते हुए उनके कार्यकाल में भी कुछ ऐसे लोग थे जिन्हें जमकर परेशान किया गया लेकिन बाद में वो सभी निर्दोष साबित हुए. ऐसे ही कुछ लोगों की हम बात करेंगे और याद करेंगे उस दौर को जब देश की सबसे ताकतवर कुर्सी पर बैठे पी चिदंबरम की वजह से भारी मुसीबत का सामना करना पड़ा.

स्वामी असीमानंद और साध्वी प्रज्ञा

पी चिदंबरम के गृहमंत्री रहते हुए नबा कुमार सरकार उर्फ स्वामी असीमानंद को हिंदू आतकंवाद का पोस्टर ब्वॉय बनाकर पेश किया गया. पहली बार हिंदू आतंकवाद शब्द गढ़ा गया जिसका दिग्विजय सिंह ने भी पूरा समर्थन किया. समझौता ब्लॉस्ट मामले में स्वामी असीमानंद को पकड़ा गया था जो बाद में निर्दोष साबित हुए. बतौर असीमानंद असीमानंद हिरासत में उन्हें बहुत टॉर्चर किया गया कि वो कबूल करें कि समझौता ब्लॉस्ट मामले में उनका हाथ है. ऐसा ही साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर के साथ भी हुआ जो अब भोपाल से बीजेपी की सांसद हैं. साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर को मालेगांव ब्लॉस्ट मामले में पकड़ा गया जिन्हें बाद में कोर्ट ने निर्दोष बताते हुए बरी कर दिया.

ले.कर्नल प्रसाद श्रीकांत पुरोहित

पी चिदंबरम के गृहमंत्री रहते हुए सेना के इंटेलिजेंस ऑफिसर ले.कर्नल प्रसाद श्रीकांत पुरोहित को भी काफी कुछ झेलना पड़ा. मालेगांव धमाके में उनका नाम आया. उनके ऊपर आरोप लगा कि धमाके के लिए बम बनाने का सामान उन्होंने ही जुटाया. पी चिंदबरम ने कर्नल पुरोहित का नाम आने के बाद भगवा आतंकवाद को बढ़चढ़ कर फैलाया. पी चिदंबरम के कार्यकाल में गृहमंत्रालय में काम करने वाले एक उच्च स्तरी अधिकारी आरवीएस मनी ने अपनी किताब हिंदू टेरर: इनसाइड अकाउंट फ्रॉम मिनिस्ट्री ऑफ होम अफेयर्स में बताया कि कैसे यूपीए सरकार ने गृह मंत्रालय के अधिकारियों पर दवाब बनाकर ऐसी फर्जी कहानियां गढ़ने को कहा जिससे ये साबित हो कि हिंदू आतंकवाद अस्तित्व में है.

डी जी वंजारा

पी चिदंबरम के गृहमंत्री रहते हुए एक और शख्स थे जिन्हें हिंदू आतंकवाद का ब्रांड एंबेसेडर बनाने की कोशिश की गई वो थे गुजरात के तत्कालीन डीआईजी डी जी वंजारा जिन्हें इशरत जहां- सोहराबुद्दीन शेख फर्जी एकनाउंटर मामले में गिरफ्तार किया गया. आरवीएस मनी ने अपनी किताब में लिखा है कि पांच साल तक आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा ने इशरत जहां का नाम छापते हुए बताया कि आतंकियों की भर्ती में उसका योगदान रहा और वो उसकी ‘शहादत’ पर गर्व करते हैं. मनी की किताब में ये भी लिखा की इस बात का ना तो गृह मंत्रालय ने संज्ञान लिया और ना ही गृहमंत्री पी चिदंबरम ने ये तथ्य दुनिया के सामने उजागर होने दिया.

अमित शाह

समय की विडंबना देखिए, दस 2010 में अमित शाह को सोहराबुद्दीन शेख फर्जी एनकाउंटर मामले में गिरफ्तार किए गए थे और पी चिदंबरम गृहमंत्री थे. आज अमित शाह गृहमंत्री हैं और पी चिदंबरम को भ्रष्टाचार के मामले में गिरफ्तार किया गया है. जमानत पर बाहर होते हुए ही साल 2010 से 2012 तक अमित शाह को गुजरात की सीमा में घुसने की इजाजत नहीं दी गई. 9 साल के बाद ऐसा लग रहा है जैसे शतरंज के सारे पासे पलट गए हैं. अमित शाह देश के गृहमंत्री बन गए हैं. साध्वी प्रज्ञा को निर्दोष साबित कर दिया गया है. कर्नल पुरोहित को फिर से सेना में कमीशन कर लिया गया है. असीमानंद भी राजनीति में हैं.

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