नई दिल्ली. माननीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण जी, सबसे पहले तो आपको बहुत-बहुत बधाई. महिलाएं घर का बजट ही नहीं देश का बजट भी संभाल सकती हैं ये आपने साबित कर दिया है. देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी बधाई के पात्र हैं जो अपने कैबिनेट में महिलाओं को अहम मंत्रालय सौंपने में हिचकिचाते नहीं हैं. मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल का पहला पूर्ण बजट आज पेश कर दिया गया. देश के आम नागिरक के तौर पर मैं आपको यह खुला खत लिख रहा हूं. उम्मीद है आप यह पत्र ध्यान से पढ़ेंगी और कुछ जरूरी मुद्दे जो  बजट में छूट गए हैं उन पर भी विचार करेंगी.

महिला वित्त मंत्री ने महिलाओं को क्या दिया क्या नहीं: देश की पहली पूर्णकालिक महिला वित्त मंत्री के तौर पर निर्मला सीतारमण ने आज अपना पहला पूर्ण बजट पेश किया. 2019 लोकसभा चुनावों में भारी जनमत से जीतकर दोबारा सत्ता में आई नरेंद्र मोदी सरकार के पहले बजट में महिलाओं के लिहाज से कुछ अच्छी खबरें सुनने को मिली. आपने ठीक ही कहा कि महिलाओं के विकास के बिना देश का विकास नहीं हो सकता है. वित्त मंत्री ने ऐलान किया कि जनधन खाताधारक महिलाओं को 5000 रुपये ओवरड्राफ्ट की सुविधा दी जाएगी.महिलाओं के लिए अलग से एक लाख रुपये के मुद्रा लोन की व्यवस्था की जाएगी. महिला किसानों की एक बड़ी समस्या यह है कि खेती का सारा काम तो वो करती हैं लेकिन सरकारी योजनाओं में उन्हें भूस्वामी मानने में अड़चनें खड़ी की जाती हैं. महिलाओं को किसानों के लिए चलाई जा रही योजनाओं का सारा लाभ नहीं मिल पाता. जबकि हकीकत यह है कि महिलाएं बड़े पैमाने पर खेती से जुड़ी हुई हैं. इसके अलावा यौन हिंसा की बढ़ती घटनाओं के मद्देनजर सरकार द्वारा क्या उपाय किये जाएंगे इसका भी कोई जिक्र बजट में नहीं था. एक महिला वित्त मंत्री से महिलाओं की यह उम्मीद बेमानी तो नहीं है!

JNU से पढ़ीं निर्मला सीतारमण का लाल बैग: जवाहर लाल नेहरू यूनिवर्सिटी का शुमार भारत की सर्वश्रेष्ठ यूनिवर्सिटियों में होता है. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण भी वहीं से पढ़ीं हैं. वामपंथ का बौद्धिक दुर्ग माने जाने वाले जेएनयू में लाल सलाम का नारा सबसे आमफहम नारा है. लेकिन निर्मला सीतारमण जी आप निश्चित तौर पर बधाई की पात्र हैं कि आपने लाल रंग को वामपंथ के दुर्ग से निकालकर पारंपरिक भारतीय स्वरूप में पेश किया. हर वित्त मंत्री बजट पेश करने एक चमड़े का बैग लेकर जाता था जिसे बजेट कहते हैं. आपने इसकी जगह लाल कपड़ों में लिपटे एक बैग का चुनाव किया. इसी रंग की साड़ी का चुनाव भी आपने किया. यह बदलाव बेहतर है. मुझे याद है पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने बजट को शाम की जगह दिन में पेश करने की परंपरा शुरू की थी. रंगों को लेकर सियासत के इस दौर में वित्त मंत्री का लाल रंग का पारंपरिक इस्तेमाल एक सुंदर प्रयोग था. 

हम आम बोल-चाल में जिस बजट का इस्तेमाल करते हैं, वो फ्रेंच शब्द बोजेट से बना है. दरअसल चमड़े की थैली को फ्रेंच भाषा में बोजेट या बुगेट कहते हैं. साल 1733 में ब्रिटिश वित्तमंत्री रॉबर्ट वॉलपोल चमड़े के थैले में देश की आर्थिक स्थिति का लेखा-जोखा पेश करने आए थे. बाद में ये लेखा बजट बन गया. आज के समय में दुनियाभर के सैकड़ों देशों में आर्थिक लेखा-जोखा पेश करने के तरीकों को बजट ही कहा जाता है. बजट में इस्तेमाल होने वाले बैग के लाल के पीछे भी रोचक कहानी है. 1860 में ब्रिटेन के चांसलर ग्लैडस्टोन ने लकड़ी के बक्से पर लाल रंग का चमड़ा मढ़वा दिया. इस बक्से पर उन्होंने महारानी विक्टोरिया का मोनोग्राम भी लगवा दिया. बाद के दिनों में इस बैग में कई तरह के बदलाव आते गए. वित्त मंत्रियों ने अपने हिसाब से इसमें कई बदलाव किए लेकिन लाल रंग सभी का पसंदीदा रंग बना रहा. बाद में इस लाल रंग को ही बजट के बैग के लिए फिक्स कर दिया गया.

शिक्षा के लिए क्या हुआ क्या नहीं : मैडम फाइनेंस मिनिस्टर, देश में शिक्षा की दुर्दशा किसी से छिपी नहीं है.यह अच्छी बात है कि आपने उच्च शिक्षा के लिए अलग से कानून का मसौदा बनाने की बात कही है. इसके लिए 400 करोड़ रुपये के आवंटन भी किया जाएगा. शोध कार्यों को बेहतर करने के लिए नेशनल रिसर्च फाउंडेशन बनाने का प्रस्ताव भी एक शानदार कदम हैं. उम्मीद है भारत की शोध परंपरा को यह बेहतर कर पाएगा. भारत की यूनिवर्सिटियों से पेटेंट रजिस्टर कराने की संख्या में लगातार गिरावट देखने को मिली है. दुनिया के टॉप 200 में भारत के सिर्फ 3 कॉलेजों का होना भी इस दिशा में बेहतर प्रयास की जरूरत को रेखांकित करता है. लेकिन स्कूली शिक्षा को लेकर आपने कोई घोषणा नहीं की. देश में शिक्षा बुनियादी स्तर पर ही चरमराई हुई है वित्त मंत्री जी. ‘असर’ की रिपोर्ट बताती है कि सरकारी स्कूल में 8वीं कक्षा में पढ़ने वाला बच्चा तीसरी कक्षा की किताबें नहीं पढ़ पा रहा है. आपने डिजिटल शिक्षा की बात की है लेकिन देश के ग्रामीण इलाकों में सरकारी स्कूलों में अभी बिजली तक नहीं पहुंची है. मैं ऐसे सैकड़ों स्कूलों में जा चुका हूं जहां, बिजली, बेंच-डेस्क जैसी बुनियादी चीजें तक नहीं हैं. किताबें, पर्याप्त शिक्षक और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तो जैसी बहुत दूर की कौड़ी लगती है. मैडम, अगर बुनियाद कमजोर होगी तो इमारत कैसे मजबूत हो सकेगी. उच्च शिक्षा में जाने वाले बच्चों की संख्या अभी भी काफी कम है. बुनियादी शिक्षा पर अविलंब ध्यान दिए जाने की जरूरत है

जल संरक्षण नहीं हुआ तो देश संकट में: वित्त मंत्री जी नदियों के देश भारत में जल संकट सबसे बड़ी समस्या बनकर उभरा है. चेन्नई जैसा महानगर जल संकट के कारण ठप्प पड़ा है. यह देश के बाकी महानगरों के लिए एक चेतावनी भी है कि जल्द कुछ नहीं  किया गया तो महानगरों में रहना मुश्किल हो जाएगा. वित्त मंत्री जी जल संकट से दुर्भाग्य से गांव तक नहीं बच पाए हैं. देश के कई इलाकों में भीषण जल संकट है. जल ससरकार ने पानी के लिए जलशक्ति मंत्रालय का गठन किया है. जल आपूर्ति के लक्ष्य को लागू किया जा रहा है, 1500 ब्लॉक की पहचान की गई है. इसके जरिए हर घर तक पानी पहुंचाया जाएगा. सरकार का लक्ष्य 2024 तक हर घर जल पहुंचाने का लक्ष्य है. लेकिन यह जल आएगा कहां से इसका कोई जिक्र आपने नहीं किया. भारत, जमीन के नीचे के पानी की सबसे ज्यादा खपत करता है. ऐसे में बहुत दिनों तक हम भूमि के नीचे के जल का उपयोग नहीं कर पाएंगे. वर्षा जल संग्रहण के लिए भी कोई योजना नहीं बनाई गई. झीलों की जमीन पर अधिग्रहण कर उनपर कंक्रीट के जंगल खड़े करने का दुष्परिणाम चेन्नई भुगत रही है. दिल्ली में भी यमुना की जमीन पर कब्जा बढ़ता जा रहा है. झील-झरने और प्राकृतिक जल संसाधनों को बचाए बिना हम जल संरक्षण की दिशा में कुछ भी ठोस नहीं कर पाएंगे.

प्रदूषण के लिए कुछ कीजिए मैडम फाइनेंस मिनिस्टर: देश में जल, जमीन, हवा और ध्वनि हर तरह के प्रदूषण को लेकर गंभीर लापरवाही का रवैया आम है. देश की राजधानी दिल्ली में बहने वाली गंगा की सबसे बड़ी सहायक नदी यमुना प्रदूषण की भेंट चढ़ चुकी है. इसके उद्धार के लिए की जाने वाली हर बात अभी तक कोरी बयानबाजी ही साबित हुई है. देश की राजधानी दिल्ली सहित भारत के कई शहर दुनिया के सबसे प्रदूषित शहरों की लिस्ट में टॉप करते हैं. यह शर्मिंदा करने वाले आंकड़ें हैं. डराने वाली तस्वीर है. दिल्ली में गाजीपुर में कचरे का पहाड़ कुतुबमीनार से ऊंचा हो चुका है जल्द ही ताजमहल की ऊंचाई को भी मात दे देगा. यहीं हालत ओखला लैंडफिल इलाके की है. कचरा प्रबंधन के क्षेत्र में अविलंब कदम उठाने की जरूरत है. देश के हर शहर में वायू, जल, जमीन और ध्वनि प्रदूषण पर जागरुकता की कमी है. नागरिक चेतना के साथ-साथ सरकारी चेतना का भी प्रदूषण के प्रति जागरुक होना जरूरी है. ध्वनि प्रदूषण को तो हम मुद्दा ही नहीं समझते. मैडम फाइनेंस मिनिस्टर, देश में सड़कों पर शोर-शराबे से मुक्ति दिलाने के बारे में भी विचार कीजिए मैडम. सड़क की अराजकता से भी आम आदमी को मुक्ति मिलनी चाहिए.

स्टार्टअप के लिए खुशखबरी: वित्त मंत्री जी स्टार्टअप की इस देश में बातें तो बहुत हो रही थीं लेकिन जमीन पर भारतीय स्टार्ट अप कंपनियों को वो सुविधाएं और माहौल नहीं मिल पा रहा है जो अन्य देशों में मौजूद है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जिस तरह स्वरोजगार को बढ़ाने पर जोर देने की बात कहते हैं उस लिहाज से स्टार्ट अप को समर्थन और संरक्षण देना सरकार के लिए बेहद जरूरी है. आपने स्टार्टअप के लिए एंजल टैक्स खत्म करने का निर्णय लिया है जो एक बेहद जरूरी कदम था. जो लोग अपना रोजगार शुरू करना चाह रहे हैं उनपर शुरुआत में ही टैक्स का भार लादना अनुचित है. इसके साथ ही उन्हें कानूनी जांचों से बचाने का आपका निर्णय भी स्वागतयोग्य है. फ्लिपकार्ट का उदाहरण हमारे सामने है. जहां एक भारतीय कंपनी अपने आप को विदेश में रजिस्टर कराती है, एक बड़ा ब्रांड बनती है लेकिन फिर एक मल्टीनेशनल कंपनी उसे खरीद लेती है. भारत को अगर वैश्विक बाजार में अपनी पैठ मजबूत करनी है तो भारतीय ब्रांड्स का मजबूत होना बेहद जरूरी है. स्टार्टअप के क्षेत्र में सरकारी दखल को कम करने और सुविधाओं को बढ़ाने की जरूरत है. आपने कहा कि स्टैंड अप इंडिया स्कीम के तहत महिलाओं, ST-ST उद्यमियों को लाभ दिया जाएगा. स्टार्ट अप के लिए टीवी चैनल पर प्रोग्राम शुरू किए जाएंगे. ये कदम तभी अच्छे साबित हो पाएंगे जब हम स्टार्टअप कंपनी को सुविधा, संरक्षण और बाजार तीनों मुहैया करा पाएं.

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