नई दिल्ली. एक देश एक चुनाव के मामले पर मुख्य चुनाव आयुक्त ओपी रावत ने कहा है कि 2019 के लोकसभा चुनाव के साथ 11 राज्यों के विधानसभा चुनाव कराने के लिए पर्याप्त संख्या में VVPAT मौजूद नहीं हैं. मुख्य चुनाव आयुक्त ओपी रावत ने कहा है कि अगर एेसा कराना है तो एक-दो महीने के भीतर ही यह फैसला करना होगा और वीवी पैट बनाने का ऑर्डर देकर कंपनी को कहना होगा कि सारी मशीन समय पर डिलीवर की जाए. रावत का यह बयान तब आया है जब मीडिया में ये खबरें आई हैं कि भाजपा लोकसभा चुनाव के साथ कम से कम उन 11 राज्यों का चुनाव कराने की तैयारी में है जहां उसकी सरकारें हैं.

रावत ने कहा है कि ज्यादा VVPAT मंगाने के लिए अॉर्डर करना होगा क्योंकि उतने वीवीपीएटी मौजूद नहीं हैं, जिनसे एक साथ इतने चुनाव कराए जा सकें. उन्होंने कहा कि इस साल के आखिर में मध्य प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़ समेत 4 राज्यों के विधानसभा चुनाव के साथ भी लोकसभा चुनाव कराना संभव नहीं है. ओपी रावत ने कहा है कि अगले साल लोकसभा चुनावों के साथ 11 राज्यों के विधानसभा चुनाव भी मुश्किल है क्योंकि VVPAT पर्याप्त संख्या में नहीं है. 

बता दें कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने लोकसभा और विधानसभाओं के चुनाव साथ-साथ करवाने की मांग की है ताकि देश पर चुनाव खर्च का बोझ कम हो. शुक्रवार को भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने विधि आयोग को पत्र लिखकर कहा कि एक साथ चुनाव होने से चुनावों पर होने वाले भारी खर्च में हजारों करोड़ रुपये की कटौती होगी.

भाजपा नेता मुख्तार अब्बास नकवी की अगुवाई में पार्टी के एक प्रतिनिधमंडल द्वारा सौंपे गए पत्र में अमित शाह ने कहा है कि लगातार चलने वाली चुनाव प्रक्रिया से राष्ट्रीय संसाधनों पर दबाव पड़ा है और भारत जैसे प्रगतिशील लोकतंत्र में विकास कार्य और नीतिगत फैसले चुनावों के दौरान आदर्श आचार संहिता लागू हो जाने से रुक जाते हैं.

अमित शाह ने कहा कि भाजपा की एक राष्ट्र एक चुनाव की अवधारणा की आलोचना के राजनीतिक कारण हैं. उन्होंने कहा कि साल भर किसी न किसी राज्य में चुनाव होने से राज्य और केंद्र दोनों का कामकाज प्रभावित होता है. उन्होंने कहा कि एक साथ चुनाव होने से चुनाव के खर्च में भी कमी आएगी.

भाजपा प्रतिनिधिमंडल न्यायमूर्ति बी. एस. चौहान की अध्यक्षता वाले विधि आयोग से मिला और कहा कि एक राष्ट्र एक चुनाव की अवधारणा को अपनाने के लिए संविधिान में जरूरी संशोधन किए जाने चाहिए. भाजपा सांसद भूपेंद्र यादव ने कहा, “चुनाव के दौरान 9.30 लाख मतदान केंद्र और एक करोड़ कर्मी होते हैं. 2011 में चुनाव पर 1,61,700 करोड़ रुपये और 2014 में 4,000 करोड़ रुपये खर्च हुए. एक राष्ट्र और एक चुनाव से खर्च कम होगा. यह कार्य कई देशों में सफल रहा है.”

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