नई दिल्ली: कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा अपने भाई और पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की बात से इत्तेफाक रखती हैं कि एक गैर-गांधी को ही कांग्रेस पार्टी का नेतृत्व करना चाहिए. दरअसल ये दावा अमेरिकी शिक्षाविदों प्रदीप छिब्बर और हर्ष शाह की किताब इंडिया टुमॉरो: कन्वर्सेशन विद द नेक्सट पॉलिटिकल लीडर्स में किया गया है जिसमें प्रियंका गांधी के हवाले से कहा गया है कि कांग्रेस का अपना अलग रास्ता होना चाहिए. प्रियंका गांधी ने किताब के लेखकों को दिए एक इंटरव्यू में कहा कि शायद (इस्तीफा) पत्र में नहीं, लेकिन कहीं और उन्होंने कहा है कि हममें से किसी को भी पार्टी का अध्यक्ष नहीं होना चाहिए और मैं उनकी बात से पूरी तरह सहमत हूं.

राहुल गांधी ने 2019 के लोकसभा चुनाव में पार्टी की करारी हार की जिम्मेदारी लेते हुए पिछले साल 25 मई को कांग्रेस वर्किंग कमेटी (सीडब्ल्यूसी) की बैठक में अध्यक्ष पद से इस्तीफे की पेशकश की थी. कांग्रेस के शीर्ष नेताओं ने उन्हें ऐसा ना करने का अनुरोध किया लेकिन राहुल गांधी अपने फैसले पर अडिग रहे और पिछले साल 3 जुलाई को अपने इस्तीफे पर अंतिम मुहर लगा दी. सीडब्ल्यूसी की बैठक में, राहुल गांधी ने दिग्गज नेताओं पर अपने बेटों को पार्टी के हितों से ऊपर को रखने पर नाराजगी जाहिर की थी और यह भी उल्लेख किया था कि कुछ नेता सिर्फ इसलिए अपने गढ़ में ही चुनाव हार गए थे, क्योंकि उन्होंने पदों की ललक के लिए तथाकथित अगली पीढ़ी के एक वर्ग की आलोचना की थी.

राहुल गांधी ने सीडब्ल्यूसी से यह भी कहा कि एक गैर-गांधी को नए कांग्रेस प्रमुख के रूप में चुना जाना चाहिए. उसी बैठक में, प्रियंका गांधी ने जोर देकर कहा कि केवल एक व्यक्ति को चुनाव में हार के लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता है. वह अपने भाई के साथ सहमत थीं कि एक गैर-गांधी को कांग्रेस अध्यक्ष बनना चाहिए.

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