नई दिल्ली: हजरत निजामुद्दीन के मरकज में जमा हुए करीब 2500 लोगों में से 24 लोगों को कोरोना संक्रमण की पुष्टि हो चुकी है. यहां से कई लोग आंध्र प्रदेश, तमिलनाडू, अंडमान निकोबार द्वीप समुह, जम्मू-कश्मीर, उत्तर प्रदेश और तेलंगाना भी गए जिन्हें अब ढूढा जा रहा है साथ ही उनके संपर्क में आए लोगों की भी जांच हो रही है. इन्हीं में शामिल पांच लोगों की तेलंगाना में कोरोना संक्रमण के चलते मौत हो गई है. पुलिस ने पश्चिमी निजामुद्दीन इलाके को पूरी तरह सील कर दिया है. लोगों को घरों से बाहर ना निकलने की सख्त हिदायद दी गई है. यही नहीं, पुलिस ड्रोन के जरिए भी इलाके में निगरानी कर रही है.

बताया जा रहा है कि 21 दिनों के लॉकडाउन के बीच तबलीगी जमात मरकज में करीब 1000 लोग जमा थे. वहीं निजामुद्दीन दरगाह प्रशासन ने अपनी सफाई में इस बात को सिरे से खारिज कर दिया है कि उन्होंने लॉकडाउन का पालन नहीं किया. निजामुद्दीन प्रशासन का कहना है कि उन्होंने सरकार के लॉकडाउन को पूरा समर्थन देने की कोशिश की लेकिन अचानक लॉकडाउन का एलान होने से ट्रेन चलनी बंद हो गई और बड़ी संख्या में लोग मरकज में फंस गए. निजामुद्दीन प्रशासन ने ये भी कहा कि उन्होंने सब डिविजनल मजिस्ट्रेट से अनुरोध भी किया कि वो व्हीकल पास जारी कर दें ताकि जो उनके गेस्ट हैं वो वापस जा सकें लेकिन उन्हें अभी तक इसकी अनुमति नहीं मिली है.

दिल्ली सरकार ने कोरोना के नए मामलों के लिए निजामुद्दीन दरगाह प्रशासन को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा है कि वो मस्जिद के मौलाना के खिलाफ केस दर्ज करने पर विचार कर रहे हैं. दरगाह प्रशासन का कहना है कि पहले एक दिन के लिए और फिर तीन हफ्तों के लिए सरकार ने पूर्ण लॉकडाउन का एलान कर दिया जिसकी वजह से मरकज में फंसे लोग निकल नहीं पाए. हालांकि उन्होंने कहा कि चुनौतीपूर्ण परिस्थिति में भी करीब 1500 लोग अपने अपने गंतव्य स्थान को निकल गए लेकिन जो लोग कहीं भी आने-जाने की स्थिति में नहीं थे वो मरकज में ही रूक गए.

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