नई दिल्ली: एक तरफ जहां केन्द्रीय सूचना प्रसारण व कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद फिल्मों की कमाई के आंकड़े बताते हुए आर्थिक मंदी से आंख फेरने की कोशिश कर रहे हैं वहीं दूसरी तरफ वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के पति पराकला प्रभाकर ने सरकार की आर्थिक नीतियों की धज्जियां उड़ा दी है. उन्होंने कहा कि अर्थव्यवस्था गिरती चली जा रही है लेकिन सरकार आर्थिक मंदी मानने तक को तैयार ही नहीं है.

अंग्रेजी अखबार द हिंदू में लिखे आर्टिकल में पराकला प्रभाकर ने लिखा ‘एक के बाद एक सेक्टर में चुनौतीपूर्ण हालात होते जा रहे हैं लेकिन अभी तक बीजेपी सरकार की तरफ से अर्थव्यवस्था की हालत सुधारने की कोशिश के संकेत नहीं दिखे हैं.’ द हिंदू के लिए लिखे कॉलम में प्रभाकर ने तर्क दिया है कि मौजूदा सरकार को नरसिम्हा राव- मनमोहन सिंह आर्थिक निति से सीख लेनी चाहिए. गौरतलब है कि 1991 में देश में कांग्रेस सरकार थी जिसमें नरसिम्हा राव प्रधान मंत्री और मनमोहन सिंह वित्त मंत्री थे.

बीजेपी सरकार की आलोचना करते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के पति पराकला प्रभाकर ने लिखा कि ऐसे बहुत ही कम संकेत देखने को मिलते हैं जिससे लगता हो कि सरकार हालात सुधारने और अर्थव्यवस्था की चुनौतियों से निपटने कार्यनीतिक दृष्टि अपना रही हो. चुनौतियों से निपटने की सरकार की कोशिशों में समस्याओं को विस्तार से बताते हुए उन्होंने कहा कि देश की अर्थव्यवस्था को लेकर बीजेपी सरकार की अपनी कोई नीति नहीं है और ना ही उसकी ऐसी कोई नीति को विकसित करने की इच्छाशक्ति है.

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उन्होंने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू के समाजवाद के सिद्धांत को तो बीजेपी नकारती है लेकिन उनकी अपनी रूपरेखा सबसे अच्छी हो सकती है जिसे आसान भाषा में पूंजीवाद, फ्री मार्केट के तौर पर देखा जा सकता है. जो अभी तक चलन में नहीं आ सकी है. उन्होंने ये भी कहा कि ‘बीजेपी की आर्थिक विचारधारा राजनीतिक लिहाज से नेहरु मॉडल की बुराई करना ही रही है’ आर्टिकल में उन्होंने ये भी लिखा कि देश की राजनीति के केंद्र बिंदू में बैठी पार्टी जिसकी केंद्र के साथ-साथ कई राज्यों में सरकार है उसे अर्थव्यवस्था के मजबूती से बहुत कम लेना देना है. अर्थव्यवस्था के हालात भी पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के बीच चर्चा का विषय नहीं बन पा रहे हैं.

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