नई दिल्ली. 16 दिसंबर 2012 की घटना जिस दिन ना सिर्फ निर्भया बल्कि देश की हर बेटी की आबरू के साथ खेला गया. इस घटना को याद कर आज भी लोगों की रूह कांप जाती है. लेकिन निर्भया के दोषियों की रूह नहीं कांपी थी क्योंकि वे मानव के रूप में दानव थे. पिछले सात सालों से निर्भया का केस लंबित है और आज भी आरोपी जेल में रोटी तोड़ रहे हैं. लेकिन अब  16 दिसंबर 2019 को निर्भया के दोषियों को फांसी देने की बात कही जा रही है.  

दोषी अब भी तिहाड़ जेल में है. हालांकि तिहाड़ जेल प्रशासन का कहना है कि 16 दिसंबर को दोषियों को फांसी होगी या नहीं इस बारे में उन्हें मालूम नहीं है. वहीं दूसरी ओर दोषियों को फांसी की सजा से रोकने के लिए राष्ट्रपति के पास दया याचिका भेजी गई है. इस याचिका को दिल्ली सरकार से खारिज कर दिया गया. इसके बाद यह एलजी हाउस से होती हुई केंद्रीय गृह मंत्रालय पहुंची. इसके बाद इसे राष्ट्रपति के पास पहुंचाया गया. लेकिन अगर राष्ट्रपति इस दया याचिका को खारिज कर देते हैं तो संबंधित कोर्ट दोषियों को फांसी के लिए डेट वॉरंट जारी करेगी.

बता दें कि जेल में बंद मुकेश, विनय शर्मा, अक्षय कुमार सिंह और पवन गुप्ता चारों दोषियों में से सिर्फ विनय शर्मा ने ही राष्ट्रपति के पास दया याचिका भेजी है. अन्य दोषियों ने दया याचिका से इंकार कर दिया. लेकिन राष्ट्रपति का अंतिम फैसला जो भी हो वह चारों पर लागू होगा. 

क्या था निर्भया कांड का पूरा मामला
16 दिसबंर 2012 को दिल्ली के मुनिरका में चलती बस में निर्भया के साथ सामूहिक बलात्कार किया गया. निर्भया पैरामेडिकल की स्टूडेंट थी. दरिंदों ने निर्भया के साथ दंरिदगी की सारी हदें पार कर दी थी. बताया जाता है कि उस बस में निर्भया के साथ उसका एक दोस्त भी था. उन्होंने उसे भी काफी मारा पीटा. इसके बाद निर्भया और उसके दोस्त को चलती बस से बाहर फेंक दिया गया था.
निर्भया का इलाज दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में चल रहा था. लेकिन उसकी हालत बहुत गंभीर थी और दिल्ली में कोई सुधार नहीं हो रहा था. इसके बाद उसे सिंगापुर भेजा गया. निर्भया पहली रेप पीड़िता है जिसे इलाज के लिए भारत से बाहर भेजा गया. लेकिन निर्भया की जान नहीं बच सकी.

पुलिस ने इस मामले में छह दोषियों को गिरफ्तार किया था. फास्ट ट्रैक कोर्ट ने पांच दोषियों पर आरोप तय किए और एक नाबालिग दोषी को जुवेनाइल बोर्ड ने तीन साल के लिए सुधार गृह में भेज दिया. सबसे बुजुर्ग आरोपी राम सिंह ने तिहाड़ जेल में ही खुदखुशी कर ली. इसके बाद कोर्ट ने चारों दोषियों को फांसी की सजा सुनाई और दिल्ली हाई कोर्ट ने फांसी की सजा को बरकरार रखा. लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने फांसी दिए जाने पर रोक लगा दी.

तारीख-दर-तारीख के बाद 16 दिसंबर 2019 की एक और तारीख
पिछले सात सालों से निर्भया के दोषियों को फांसी पर लटकाने के लिए तारीख-दर-तारीख ही मिल रही है. लेकिन इस बार एक बार फिर से 16 दिसंबर 2019 की तारीख सामने आई है. हालांकि दोषियों को फांसी 16 दिसंबर को होगी या कभी और यह तय करना संबंधित कोर्ट का काम है. लेकिन जनता में आक्रोश अब इतना बढ़ गया है कि वह ऐसे जघन्य घटना के आरोपी को जिंदा नहीं देखना चाहते. इसका उदाहरण हैदराबाद की महिला डॉक्टर से हुई गैंगरेप का है.

हैदराबाद में पुलिस वालों ने जब अपराधियों का एनकाउंटर कर दिया तो आम लोग पुलिस वालों पर फूलों की बारिश करने लगे, उनके पैर छूने लगे और उन्हें मिठाई खिलाने लगे. अब लोग भी ऐसी घटना में जल्द से जल्द इंसाफ चाहते हैं. अगर निर्भया के दोषियों को भी 16 दिसंबर को फांसी पर नहीं लटकाया गया तो लोगों का न्यायिक प्रक्रिया से भरोसा कम हो जाएगा और वह हर मामले में एनकाउंटर को ही सही मानेगी. वैसे भी निर्भया के दोषी पिछले सात सालों से जेल में हैं. उसके माता-पिता भी अब कोर्ट के चक्कर लगाकर हार चुके हैं.

हैदराबाद की तरह ही हो हर रेप केस का एनकाउंटर
27 नवंबर को हैदराबाद में महिला पशु चिकित्सक डॉक्टर दिशा के साथ दरिंदों ने गैंगरेप किया. इसके बाद उसकी बॉडी को पेट्रोल और डीजल डाल कर आग लगा दी. देश में प्रतिदिन बलात्कार की घटनाएं सुन कर लोगों में महिला सुरक्षा को लेकर कई सवाल पैदा हो रहे हैं. लेकिन 10 दिन के भीतर ही पुलिस ने आरोपियों का एनकाउंटर कर दिया. हालांकि ये तरीका न्यायिक प्रक्रिया के तौर पर सही नहीं था. लेकिन पुलिस का कहना है कि अपराधी उनके हथियार छीनकर भाग रहे थे और उन्होंने अपने बचाव में उन पर गोलियां चलाई. अगर पुलिस की ये बात सही है तो ये एनकाउंटर भी सही है बाकी इसकी जांच चल रही है.

पुलिस ने डॉक्टर दिशा के आरोपियों को उसी जगह एनकाउंटर कर दिया जहां उन्होंने अपनी हैवानियत को अंजाम दिया था. इस एनकाउंटर का समर्थन आम लोगों से लेकर नेता मंत्री और बॉलीवुड जगत के लोगों ने भी किया, क्योंकि सभी में गुस्सा और आक्रोश भरा हुआ था. इसलिए जरूरी है कि रेप जैसे मामले को रोकने के लिए कानून और सुरक्षा व्यवस्था में सुधार किए जाए और आरोपियों को सात साल तक जेल में रखने के बजाय तुरंत कार्रवाई की जाए. वरना लोग हैदराबाद की तरह ही हर रेप केस में एनकाउंटर को ही सही मानेंगे.

हाल ही में उन्नाव रेप केस में भी आरोपियों को बेल दे दी गई. इसके बाद आरोपियों ने पीड़िता पर केरोसिन छिड़क कर उसे आग के हवाले कर दिया. पीड़िता 90 प्रतिशत जल गई और दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में जिंदगी से जंग हार गई. हर रोज अलग-अलग राज्यों से बलात्कार की कई घटनाएं सामने आती हैं और आज भी कोर्ट में रेप के कई मामले लंबित हैं. ऐसे में यह कहना गलत नहीं होगा कि- हैदराबाद की तरह ही हो हर रेप केस का एनकाउंटर.

निर्भया कांड 2012 के बाद कानून में हुआ बदलाव
2012 को निर्भया के साथ हुए गैंगरेप के बाद जनता में काफी आक्रोश देखने को मिला. कैंडल मार्च से लेकर धरना प्रदर्शन से सरकार हरकत में आई और इसके बाद केंद्र सरकार ने बलात्कार जैसे जघन्य मामलों पर फिर से विचार करने के लिए पूर्व मुख्य न्यायाधीश जेएस वर्मा की अध्यक्षता में कमेटी का गठन किया. इसके बाद प्रजातंत्र के जरूरी हिस्से पुलिस, जनप्रतिनिधि कानून, न्यायिक व्यवस्था, सैन्य विशेषाधिकार कानून आदि में कई सुधार किए गए.
निर्भया कांड के बाद इन तमाम अपराधों के लिए सजा में बदलाव किए गए-

1. कपड़े फाड़ने की कोशिश पर 7 साल की सजा 
2.गलत नीयत से देखने, इशारा करने पर 1 साल की सजा 
3. इंटरनेट पर जासूसी करने पर 1 साल की सजा 
4. मानव तस्करी और बच्चों की तस्करी में कम से कम 7 साल की सजा
5. अदालतों में जजों की संख्या बढ़ाई जाए
6. पुलिस के काम करने के तरीके में सुधार 
7. सभी विवाह रजिस्टर हों, दहेज लेनदेन पर मजिस्ट्रेट करें निगरानी
8. दुष्कर्म और रेप जैसे मामले दर्ज करने में देरी करने वाले अफसरों पर कार्रवाई 
9. पीड़िता की मेडिकल जांच के लिए दिया गया प्रोटोकॉल लागू किया जाए 
10. हिंसाग्रस्त इलाकों में महिला अपराध की जांच के लिए स्पेशल कमिश्नर तैनात किया जाए

16 दिसंबर को घोषित हो निर्भया दिवस
16 दिसंबर 2012 को निर्भया के साथ गैंगरेप की घटना को अंजाम दिया गया था. इस घटना ने सबको हिला कर रखा दिया था. अब जब खबर है कि निर्भया के दोषियों को 16 दिसंबर 2019 को सात साल बाद सजा दी जाएगी. ऐसे में सरकार को उस दिन को निर्भया दिवस के रूप में घोषित करना चाहिए, क्योंकि बलात्कार जैसी घटनाएं हर रोज सामने आती हैं और कई मामलों में दोषियों को सजा भी मिल जाती है लेकिन कुछ ही समय बाद उन्हें भुला दिया जाता है. 

हालांकि ऐसी घटनाओं को भुलाना नहीं चाहिए बल्कि इससे सबक लेनी चाहिए. निर्भया दिवस, निर्भया और निर्भया जैसी रेप पीड़ितों को सच्ची श्रद्धांजलि होगी. ऐसी रेप पीड़िता जिनके साथ गलत हुआ है समाज को उनके साथ खड़ा होने की जरूरत है. इसलिए दोषियो को जल्द से जल्द सजा मिलनी चाहिए, क्योंकि देर से मिला न्याय भी अन्नाय होता है.

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