नई दिल्ली: निर्भया के दोषियों की फांसी की सजा टल सकती है. तिहाड़ जेल प्रशासन ने दिल्ली सरकार से अपील की है कि वो निर्भया कांड के चारों दोषियों की फांसी की सजा की तारीख को आगे बढ़ा दें. इससे पहले दिल्ली की अदालत ने निर्भया कांड के चारों दोषियों को 22 जनवरी को फांसी पर लटकाने का आदेश दिया था. इस बीच दोषियों के वकीलों ने दया याचिका दायर कर दी जिसके बाद  तिहाड़ जेल प्रशासन ने दिल्ली सरकार से अपील की है कि निर्भया के दोषियों की फांसी की तारीख को आगे बढ़ाया जाए ताकि जो दया याचिका लंबित है उसका निपटारा हो सके. अगर दिल्ली सरकार तिहाड़ जेल प्रशासन की अपील को स्वीकार कर लेती है तो 22 जनवरी को निर्भया के दोषियों को होने वाली फांसी रूक जाएगी. 

क्या है निर्भया कांड?

दिल्ली गैंगरेप केस को निर्भया केस के नाम से जाना जाता है. 16 दिसंबर 2012 को दिल्ली की चिलचिलाती सर्दी में 23 साल की एक मेडिकल छात्रा के साथ 6 लोगों ने चलती बस में गैंगरेप किया था. यही नहीं ये गैंगरेप इतना दर्दनाक था कि दोषियों ने पीड़िता की आंत तक बाहर निकाल दी थी. इस गैंगरेप की घटना ने देश ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया को हिलाकर रख दिया था. 7 जनवरी को दिल्ली कोर्ट के अतिरिक्त सत्र न्यायधीश सतीश कुमार अरोड़ा ने निर्भया गैंगरेप केस के चारों दोषियों मुकेश, विनय शर्मा, अक्षय सिंह और पवन गुप्ता को फांसी की सजा सुनाई थी. जबकि इस मामले का पाचवां आरोपी राम सिंह तिहाड़ जेल में आत्महत्या कर चुका है. इस मामले के छठे आरोपी को जुवेनाइल माना गया और उसे तीन साल के बाद छोड़ दिया गया. 

क्या है  निर्भया के दोषियों की दलील?

निर्भया के दोषियों की तरफ से हाई कोर्ट में दया याचिका दायर की गई है. हाई कोर्ट से दया याचिका खारिज होने के बाद आरोपी सुप्रीम कोर्ट में भी दया याचिका दायर कर सकते हैं. अगर सुप्रीम कोर्ट से भी दया याचिका खारिज हो जाती है तो उनके पास आखिरी विकल्प राष्ट्रपति से माफीनामा हगा. राष्ट्रपति चाहें तो उनकी फांसी की सजा को माफ कर सकते हैं. लेकिन राष्ट्रपति की तरफ से भी दया याचिका खारिज हो जाती है तो निर्भया के चारो दोषियों की फांसी निश्चित है.

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