नई दिल्ली. अंग्रेजी अखबार हफिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट में खुलासा किया गया है कि रिजर्व बैंक द्वारा गंभीर चिंता जताए जाने के बावजूद नरेंद्र मोदी सरकार के तत्कालीन वित्त मंत्री अरूण जेटली की अगुवाई में इलेक्टोरल बॉन्ड को मंजूरी दी. इस रिपोर्ट में दस्तावेजों के आधार पर दावा किया गया है कि रिजर्व बैंक ने आशंका जताई थी कि चुनावी बॉन्ड से बैंक द्वारा जारी नोट करेंसी की कीमत कम हो सकती है. अब कांग्रेस नेता जयराम रमेश, रणदीप सिंह सुरजेवाला सहित कई नेताओं ने सरकार पर निशाना साधा है. 

 क्या होता है चुनावी (Electoral Bond)

इस पूरी बहस में पड़ने से पहले यह जानना जरूरी है कि आखिर इलेक्टोरल बॉन्ड होता क्या है. आप जानते हैं कि चुनावों में राजनीतिक दलों के चंदा जुटाते ही हैं. इस प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से चुनावी बॉन्ड की घोषणा की गई थी. चुनावी बॉन्ड के जरिए आम आदमी राजनीतिक पार्टी, व्यक्ति या किसी संस्थान को पैसा दान कर सकता है. चुनावी बॉन्ड 1 हजार, 10 हजार, 1 लाख, 10 लाख और 1 करोड़ रुपये के मूल्य में उपलब्ध है.

रिजर्व बैंक ने क्यों कहा न लागू करें चुनावी बॉन्ड

रिजर्व बैंक ने चुनावी बॉऩ्ड लागू करने के नरेंद्र मोदी सरकार के प्रस्ताव पर गंभीर चिंताए जताई थीं. हफ पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक पत्राचार के माध्यम से रिजर्व बैंक ने वित्त मंत्रालय को बताया था कि चुनावी बॉन्ड से आरबीआई द्वारा जारी की गई करेंसी की कीमत कम हो सकती है. अगर एक साथ बहुत अधिक मात्रा में  इलेक्टरोल बॉन्ड का इस्तेमाल काले धन को सफेद बनाने में किया जाता है तो उसकी जांच भी संभव नहीं है.

दरअसल चुनावी बॉन्ड में दानदाता की पहचान गुप्त रखा जाता है. रिजर्व बैंक ने सरकार को चुनावी बॉन्ड  लागू करने के खिलाफ सलाह दी थी. लेकिन वित्त मंत्रालय ने जवाब में कहा कि लगता है रिजर्व बैंक चुनावी बॉन्ड के मकसद को ही नहीं समझ पाया है. यह बिल अंतिम चरण में है और बैंक का जवाब काफी लेट मिला है. ऐसे में यह बिल पास हो जाए इसकी संभावना है. आखिरकार यह बिल पास हो गया.

सोशल मीडिया पर कांग्रेस हुई मोदी सरकार पर हमलावर  

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने अंग्रेजी अखबार में छपी रिपोर्ट के आधार पर मोदी सरकार पर मनी लॉन्ड्रिंग को आधिकारिक समर्थन देने का आरोप लगाया है.

कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने सरकार से सवालों की झड़ी लगाई है. सुरजेवाला ने ट्वीट कर पूछा है कि क्या मोदी सरकार इन सवालों का जवाब देगी. 1. कितने हजार करोड़ के इलेक्टोरल बॉन्ड जारी हुए? 2. भाजपा को कितने हजार करोड़ मिले? 3.  एक हथ से दे, दूसरे हाथ से ले?

सुरजेवाला ने ट्वीट कर बीजेपी पर किया हमला

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