नई दिल्ली : मोदी सरकार ने ट्विटर को किसान आंदोलन के दौरान भड़काऊ बातें फैला रहे एकाउंट और हैशटैग के खिलाफ कार्रवाई करने को कहा था. लेकिन इस मामले पर ट्विटर की देरी देखते हुए बुधवार को मोदी सरकार ने ट्विटर के खिलाफ कड़ी नाराजगी जताते हुए सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने संदेश भेजा है और स्पष्ट किया है कि कंपनी के अपने भले ही कोई नियम हों, लेकिन उसे देश के कानूनों का पालन करना ही चाहिए.

बता दें कि इस मामले पर कुछ दिन पहले ट्विटर ने कार्रवाई करते हुए 500 से अधिक एकाउंट सस्पेंड किए थे. लेकिन, अभिव्यक्ति की आजादी हवाला देते हुए ट्विटर ने खबरिया निकायों, पत्रकारों, कार्यकर्ताओं एवं नेताओं के एकाउंट पर रोक लगाने से इनकार कर दिया था. वहीं अब मोदी सरकार ने दोबार ट्विटर को संदेश भेज दिया है.

जानकारी के लिए बता दें कि आईटी सचिव और ट्विटर के वरिष्ठ अधिकारियों के बीच डिजिटल संवाद के दौरान सरकार ने इस मंच से कहा कि भारत में काम कर रहे कारोबारी निकाय के रूप में उसे कानूनों एवं लोकतांत्रिक संस्थानों का सम्मान करना ही चाहिए और देश में सद्भाव बिगाड़ने और अशांति फैलाने से जुड़े अभियानों पर कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए.

गौरतलब है कि कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों का आंदोलन पिछले दो महीनों से लगातार जारी है. वहीं गणतंत्र दिवस पर किसानों कि ट्रैक्टर रैली के दौरान हुई दिल्ली हिंसा के बाद कई ट्विटर अकाउंट सामने आये जिन्होंने दिल्ली में हिंसा को भड़काने का काम किया था. ऐसे में मोदी सरकार ने ट्विटर से कार्रवाई करने को कहा था लेकिन ट्विटर के रैवये को देखते हुए मोदी सरकार अब ट्विटर की आलोचना कर रही है.

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