मऊ विधायक मुख्तार अंसारी बुधवार को उत्तर प्रदेश के बांदा में जेल में बंद थे. यूपी की सुरक्षा टीम द्वारा एस्कॉर्ट किया गया. राज्य कारागार विभाग ने कहा कि पुलिस ने अंसारी को कई बार चेक की एक श्रृंखला के माध्यम से रखा गया था और उस पर कोई अवैध सामान नहीं पाया गया था. सरकारी मेडिकल कॉलेज, बांदा के डॉक्टरों की एक टीम ने उनकी जांच की और पाया कि उन्हें तत्काल स्वास्थ्य संबंधी कोई समस्या नहीं है, जेल विभाग ने कहा कि कोविड-19 के लिए विधायक का परीक्षण भी किया जाएगा. बांदा जेल में, उन्हें एक बैरक में रखा जाएगा जो चौबीसों घंटे निगरानी में रहेगा.”जेल प्रशासन ने मुख्तार अंसारी की सुरक्षा के लिए पर्याप्त उपाय किए हैं,” प्रवक्ता ने कहा” विवादास्पद विधायक, जिनके खिलाफ 16 लंबित मामले हैं, उन्हें यूपी की हिरासत में स्थानांतरित कर दिया गया.सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर सरकार”

यूपी से पंजाब  साजिश रचकर गया था अंसारी

योगी सरकार में होती ताबड़तोड़ कार्रवाइयों से त्रस्त माफिया मुख्तार अंसारी खुद को यूपी की बांदा जेल में सुरक्षित महसूस नहीं कर रहा था, तब उसने बड़ी तरकीब से वहां से निकलने की योजना बनाई. जनवरी 2019 में मुख्तार के नाम से पंजाब के 6390407709 नंबर से पंजाब के बिल्डर उमंग को फोन किया गया. बिल्डर ने आरोप लगाया कि उनसे 10 करोड़ की रंगदारी मांगी गई है और रंगदारी ना देने पर जान से मारने की धमकी भी.

इसके बाद पंजाब पुलिस ने मोहली में मामला दर्ज कर लिया और केस दर्ज होते ही प्रोडक्शन वारंट लेकर पंजाब से पुलिस टीम यूपी पहुंच गई और ये तक नहीं जानने की कोशिश कि मुख्तार ने फोन किया था या नहीं? आवाज का नमूना तक नहीं मिलाया गया. बांदा कोर्ट से परमीशन ली गई और यूपी पुलिस ने बिना सोचे-समझे 21 जनवरी 2019 को मुख्तार को पंजाब जाने दिया. मुख्तार को रोकने की दलीलें तब यूपी पुलिस ठीक से नहीं दे पाई. 24 जनवरी 2019 को मुख्तार को मोहाली कोर्ट में पेश किया गया और उसके बाद मुख्तार अंसारी का नया ठिकाना पंजाब की रोपड़ जेल बन गई.

पंजाब जेल में  मुख्तार सजाता था अपना दरबार 

मुख्तार पिछली सरकारों में यूपी के जेल में रहते हुए भी अपना दरबार सजाया करता था. जेल में रहते हुए मोबाइल रखना तो मुख्तार के लिए बहुत मामूली बात थी. यहां तक कि जिस दिन साल 2005 में बीजेपी विधायक कृष्णानंद राय की गाजीपुर में हत्या हुई, उस वक्त भी गाजीपुर जेल में बंद मुख्तार के पास मोबाइल था और फैजाबाद जेल में बंद अपने सहयोगी माफिया अभय सिंह को हत्या की जानकारी दे रहा था.

दरअसल बीजेपी विधायक कृष्णानंद राय चोटी रखा करते थे और मुख्तार अपने सहयोगी अभय सिंह को ये बताते हुए पाया कि कृष्णानंद राय की हत्या कर उनकी चोटी काट ली गई. हालांकि सबूतों के अभाव में मुख्तार अंसारी को कृष्णानंद राय की हत्या के मामले में निचली अदालत से बरी किया जा चुका है. कृष्णानंद राय की हत्या का मामला अब इलाहाबाद हाईकोर्ट में लंबित है.

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