नई दिल्ली. मुहर्रम को लेकर एक सर्कुलर जारी हुआ है। जिसमें डीजीपी की ओर से इस साल मुहर्रम पर जुलूस नहीं निकालने का निर्देश दिया गया है। मजलिस-ए-उलेमा-ए-हिंद के महासचिव मौलाना सैयद कल्बे जवाद ने मुहर्रम के मौके पर जारी यूपी पुलिस के निर्देशों की भाषा पर कड़ी आपत्ति जताई है। उन्होंने कहा कि इसमें गोवंश और यौन संबंधी घटनाओं का जिक्र किया गया है जो कि मोहर्रम का अपमान है।

उन्होंने पत्रकारों को संबोधित करते हुए कहा कि मुहर्रम पवित्र महीना है, जिसमें बहुत ही शांतिपूर्ण और पवित्र कार्यक्रम होते हैं। पुलिस प्रशासन ने सर्कुलर के माध्यम से मुहर्रम और शिया समुदाय की छवि खराब करने की कोशिश की है। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस ने बेहद अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल किया है। मौलाना कल्बे जवाद ने आगे कहा की डीजीपी ने मुहर्रम की भावनाओं को बिना समझे ये सर्कुलर जारी किया है। इसकी हम कड़ी निंदा करते हैं।

मौलाना कल्बे जवाद ने कहा कि पुलिस प्रशासन ने सर्कुलर में लिखा है कि मुहर्रम के जुलूस में तबर्राह पढ़ा जाता है जिस पर अन्य समुदाय के लोगों द्वारा आपत्ति जताई जाती है और शरारती तत्व जुलूस में शामिल होते हैं। मौलाना ने कहा की डीजीपी का यह बयान मुहर्रम को बदनाम करने की साजिश और शिया और सुन्नियों के बीच नफरत पैदा करने के लिए है। मुहर्रम एक पवित्र और गम का महीना है. यह कोई ऐसा त्योहार नहीं है जिसमें लोग भांग पीकर हुड़दंग हंगामा करते हो या शराब पीकर भांगड़ा करते हैं।

उन्होंने इस पर कड़ी नाराजगी जताते सभी मोहर्रम कमेटियों से पुलिस की किसी भी मीटिंग में न शामिल होने की अपील की है। उन्होंने कहा कि सर्कुलर का बयान प्रदेश के पुलिस मुखिया का नहीं बल्कि अबु बक्र बगदादी का प्रतीत होता है। डीजीपी को अपना बयान वापस लेना चाहिए और माफी मांगनी चाहिए। उन्होंने कहा कि सर्कुलर हर साल जारी होता है पर इस तरह की भाषा का इस्तेमाल नहीं किया जाता है।

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