केंद्रीय कैबिनेट ने बुधवार को सांसदों का भत्ता बढ़ाने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है. कैबिनेट ने अपनी बैठक में आवास और टेलीफोन सुविधाएं (संसद के सदस्य) नियम, 1956, संसद सदस्यों (निर्वाचन भत्ता) नियम, 1986 और संसद सदस्यों (कार्यालय व्यय भत्ता) नियम, 1988 में संशोधन करके भत्ते बढ़ाने का फैसला लिया. इस कदम से सांसदों की तनख्वाह 40 हजार रुपये बढ़ जाएगी.

इंडिया डॉट कॉम के मुताबिक संसदीय मामलों के मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि सांसद अब निर्वाचन क्षेत्र के रूप में 45,000 रुपये के बजाय 70,000 रुपये प्रति माह निकाल सकेंगे. इसी तरह उनका कार्यालय भत्ता भी 45 हजार रुपये से बढ़ाकर 60 हजार रुपये कर दिया गया है. मंत्रालय ने कहा कि फर्नीचर भत्ता, जो सांसदों को पांच साल में एक बार दिया जाता है, वह भी 75 हजार रुपये से बढ़ाकर एक लाख रुपये कर दिया गया है.

इस कदम से आवर्ती और गैर आवर्ती लागत पर 39 करोड़ और 6.64 करोड़ का वित्तीय बोझ पड़ेगा. मंत्रालय ने बयान में कहा कि मंत्रिमंडल के फैसले को प्रासंगिक नियमों में संशोधन करने के लिए संसद सदस्यों के वेतन और भत्तों पर संयुक्त समिति को भेजा जाएगा. इसे चेयरमैन और स्पीकर से मंजूरी मिलने के बाद आधिकारिक गजट में पब्लिश कराया जाएगा. वित्त मंत्री अरुण जेटली ने अपने बजट भाषण में कहा था कि सरकार हर पांच साल में सांसदों के वेतन को संशोधित करने के लिए एक स्थायी तंत्र तैयार करेगी और महंगाई के मुताबिक इसे अडजस्ट किया जाएगा.

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