नई दिल्ली. उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों में बसे गांवों का दर्द दिखलाती डॉक्यूमेंट्री फिल्म मोतीबाग को 92वें ऑस्कर अवॉर्ड समारोह 2020 में प्रवेश मिल गया है. मोतीबाग ने हाल ही में ऑस्कर अवार्ड्स के क्वालिफाइंग राउंड में जीत कर अगले साल होने वाले अवार्ड समारोह में एंट्री पा ली है. इस फिल्म में उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों में बसे सुदूर गांवों से पलायन की कहानी दर्शायी गई है. रोजगार, खेती, पानी आदि समस्याओं के अभाव के चलते पिछले कुछ सालों में हजारों लोग इन गांवों से पलायन कर चुके हैं. उत्तराखंड के करीब 700 गांव वीरान हो चुके हैं, उन्हें ‘भूतिया गांव’ का नाम दे दिया गया है. मोतीबाग डॉक्यूमेंट्री फिल्म में दिखाया गया है कि कैसे एक किसान ने प्रतिकूल परिस्थितियों और संसाधनों के अभाव के बावजूद अपना घर नहीं छोड़ा और खेती करना जारी रखा.

83 साल के किसान की संघर्ष की कहानी दिखाती है यह डॉक्यूमेंट्री-
मोती बाग डॉक्यूमेंट्री फिल्म में उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल जिले के एक गांव में रहने वाले 83 साल के किसान विद्यादत्त शर्मा की कहानी को प्रमुखता से दिखाया है. इस फिल्म में बताया गया है कि कैसे उन्होंने पहाड़ पर कम संसाधनों में भी संघर्ष कर खेती को जीवित रखा. यह उत्तराखंड के सुदूर इलाकों में बसे अन्य लोगों के लिए एक प्रेरणादायक कहानी जो रोजी-रोटी की तलाश में पहाड़ों से पलायन कर शहरों में जा रहे हैं.

मोती बाग डॉक्यूमेंट्री में उत्तराखंड के ग्रामीण इलाकों की कई समस्याओं को सामने लाने की कोशिश की गई है. इसमें पलायन के अलावा बागवानी, रोजगार, जल समस्या जैसे कई प्रमुख मुद्दों को प्रदर्शित किया गया है. हालांकि फिल्म की थीम प्रमुखता से पलायन पर ही आधारित है.

यहां देखें मोतीबाग डॉक्यूमेंट्री फिल्म का ट्रेलर-

अंतरराष्ट्रीय डॉक्यूमेंट्री एंड शॉर्ट फिल्म फेस्टिवल में ‘मोतीबाग’ को मिला अवार्ड-
मोतीबाग डॉक्यूमेंट्री फिल्म को इस साल जून में केरल में आयोजित हुए अंतरराष्ट्रीय डॉक्यूमेंट्री एंड शॉर्ट फिल्म फेस्टिवल में बेस्ट लॉन्ग डॉक्यूमेंट्री अवार्ड मिला. हाल ही में दिल्ली में पब्लिक सर्विस ब्रॉडकास्टिंग ट्रस्ट (पीएसबीटी) की ओर से आयोजित हुए 19वें ओपन फ्रेम फेस्टिवल में मोतीबाग की स्क्रीनिंग हुई थी.

उत्तराखंड के मशहूर निर्देशक निर्मल चंद्र डंडरियाल ने बनाई ‘मोतीबाग’-
मोतीबाग डॉक्यूमेंट्री को दिल्ली में रहने वाले निर्मल चंद्र डंडरियाल ने बनाई है. निर्मल उत्तराखंड के पौड़ी के ही रहने वाले हैं. मोतीबाग के अलावा भी उन्होंने कई डॉक्यूमेंट्री फिल्म बनाई है. उत्तराखंड के वे पहले निर्देशक हैं जिन्होंने तीन नेशनल अवार्ड जीते हैं. 2008 में आई उनकी ऑल द वर्ल्ड्स ए स्टैज डॉक्यूमेंट्री से वे फेमस हुए थे. उन्होंने 11 साल के करियर में 9 बेहतरीन डॉक्यूमेंट्री फिल्में बनाई हैं. नेशनल अवार्ड्स के अलावा उन्हें कई अंतरराष्ट्रीय अवार्ड्स से भी नवाजा गया है.

विद्यादत्त शर्मा के भतीजे हैं निर्मल चंद्र-
मोतीबाग डॉक्यूमेंट्री में जिस बुजुर्ग किसान विद्यादत्त शर्मा की कहानी दिखाई गई है, निर्मल उन्हीं के भतीजे हैं. निर्मल चंद्र ‘मोतीबाग’ के निर्माण के लिए पांच-सात सालों तक फंड इकट्ठा कर रहे थे. पिछले साल पीएसबीटी और दूरदर्शन यानी प्रसार भारती ने इस फिल्म के निर्माण में सहयोग किया और इसकी शूटिंग की गई.

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