नई दिल्ली. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने राज्यसभा में एक सवाल का जवाब देते हुए कहा है कि देश में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की गैर निष्पादित सम्पत्ति (NPA) 2014 के मुकाबले 2,16,739 से बढ़कर 2018 में 8,45,475 करोड़ हो गई है. वित्त राज्यमंत्री शिवप्रसाद शुक्ला ने मंगलवार को राज्यसभा में एक प्रश्न के लिखित बैंकवार एनपीए की जानकारी दी. इसमें कुल गैर निष्पादित संपत्ति के बारे में कहा गया है कि 31 मार्च 2014 में सार्वजनिक बैंकों का एनपीए 2,16,739 करोड़ रुपये था जो कि 31 मार्च 2018 में बढ़कर 8,45,475 करोड़ रुपये हो गया है.

राजीव प्रसाद शुक्ला द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक, चार साल में कई प्रमुख बैंकों का एनपीए चार गुना से भी ज्यादा बढ़ा है. 2014 में इलाहाबाद बैंक का एनपीए 7961 करोड़ था जो कि 2018 में 26419 करोड़ रुपये हो गया है. आंध्रा बैंक का 5858 से बढ़कर 28124 करोड़ रुपये हो गया है. इस अवधि में एसबीआई का एनपीए सबसे ज्यादा बढ़ा है. एसबीआई का एनपीए मार्च 2014 तक 57, 819 करोड़ रुपये था जो कि मार्च 2018 में 2,16,228 करोड़ रुपए हो गया है.

पंजाब नेशनल बैंक का एनपीए मार्च 2014 में 18,611 करोड़ रुपए था जो कि 2018 में 83,897 करोड़ रुपए हो गया है. बैंक ऑफ इंडिया का एनपीए मार्च 2014 में 10,274 करोड़ रुपए था, जो मार्च 2018 तक 51,086 करोड़ रुपए पर पहुंच गया है. बैंक ऑफ बड़ौदा का एनपीए 2014 में 9,894 करोड़ रुपए था जो कि चार साल में बढ़कर 48,189 करोड़ रुपए हो गया है. केनरा बैंक का एनपीए 7,371 करोड़ रुपए से बढ़कर 44,432 करोड़ रुपए हो गया है.

NPA Raise in 4 Years of modi Govt

बैंक ऑफ महाराष्ट्र का का एनपीए 2860 करोड़ से 18433 करोड़ रुपये हो गया है. केनरा बैंक का एनपीए 7371 से बढ़कर 44432 करोड़ रुपये हो गया है. सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया का एनपीए 11500 करोड़ से बढ़कर 38131 करोड़ रुपये हो गया है. वित्त राज्यमंत्री ने कुल 26 बैंकों के एनपीए की जानकारी सदन में दी है.

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