नई दिल्ली: संयोग की बात है कि आज यानी 8 नवंबर को नोटबंदी की तीसरी सालगिरह है और आज ही ग्लोबल रेटिंग एजेंसी मूडीज ने भारत की क्रेडिट रेटिंग को स्टेबल से नेगेटिव कर दिया है. यानी भारत की क्रेडिट रेटिंग जो पहले स्थिर थी उसे नकारात्म कर दिया गया है. इसके पीछे मूडीज ने कारण बताया है कि भारत की अर्थव्यवस्था लगातार गिर रही है जिसकी वजह से रेटिंग को नेटेगिव किया गया है.

मूडीज ने अपने बयान में कहा है कि नेगेटिव रेटिंग का मतलब ये है कि इकनॉमिक ग्रोथ में रिस्क है क्योंकि अर्थव्यवस्था पहले से ही गिर रही है. इसके पीछे कारण उचित आर्थिक नीतियों का अभाव और नेतृत्व की कमी को माना जा सकता है. मूडीज की इस रिपोर्ट का असर भारत में होने वाले निवेश पर पड़ेगा क्योंकि जो भी कंपनी भारत में निवेश की इच्छा रखती होगी उसे मूडीज की रेटिंग से फर्क पड़ेगा. दूसरी तरफ मू़डीज की रेटिंग पर वित्त मंत्रालय ने कहा है कि भारत की अर्थव्यवस्था का मूलभूत ढांचा मजबूत है और भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती हुई अर्थव्यस्था की दौड़ में शामिल है. वित्त मंत्रालय ने कहा है कि मूडीज की रेटिंग से भारत में होने वाले निवेश पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा.

हालांकि इंटरनेशनल मॉनेटरी फंड ने अपने हाल के आंकलन में 2019 में भारत की जीडीपी 6.1 फीसदी और 2020 में 7 फीसदी होने का अनुमान लगाया था लेकिन पिछली तिमाही में भारत की जीडीपी 5.5 फीसदी दर्ज की गई जो विकास के लिहाज से काफी कम मानी जा सकती है. गौरतलब है कि आज ही के दिन तीन साल पहले रात आठ बजे पीएम नरेंद्र मोदी ने मीडिया के जरिए लोगों को बताया था कि अब से 500 और 1000 के नोट नहीं चलेंगे. इसके पीछे की वजह काले धन पर लगाम लगाने की कोशिश को बताया गया था. नोटबंदी के बाद रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने कहा था कि बाजार में जितना पैसा उन्होंने डाला था उसका 99.5 फीसदी पैसा वापस बैंकों के पास लौट आया है. आरबीआई के इस बयान के बाद से नोटबंदी की मंशा पर सवाल खड़े होने शुरू हो गए थे.

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