नई दिल्ली. देश भर में बढ़ रही मॉब लिंचिंग की घटनाओं को देखते हुए मोदी सरकार सख्त रुख अपनाने जा रही है. आईटी मिनिस्ट्री ने फेसबुक, व्हाट्सएप जैसी सोशल मीडिया कंपनियों के अधिकारियों को 23 जुलाई को मीटिंग के लिए बुलाया है. जानकारी के अनुसार आईटी मिनिस्ट्री ने 23 जुलाई को फेसबुक, व्हाट्सएप समेत सभी सोशल मीडिया कंपनियों के प्रतिनिधियों को मीटिंग के लिए दिल्ली में बुलाया है.

सरकार का उद्देश्य है कि बैठक में सोशल मीडिया कंपनियों के अधिकारियों को साफ निर्देश दिए जाएं कि सोशल मीडिया पर फेक न्यूज और अफवाह फैलाने वाले मैसेजों पर लगाम लगाई जाएं. ताकि मैसेज के जरिए अफवाहों से हिंसक घटनाओं पर रोक लगाई जा सके. बता दें कि व्हाट्सएप और फेसबुक पर तेजी से वायरल हो रहे फर्जी मैसेज के कारण अलग-अलग राज्यों में पिछले दो हफ्तों में 20 से ज्यादा लोगों की जान गई है.

इससे पहले 03 जुलाई को केंद्र सरकार ने मॉब लिंचिंग को लेकर फेसबुक के स्वामित्व वाली व्हाट्सएप कंपनी को कड़ी चेतावनी दी थी. सरकार ने कहा था कि व्हाट्सएप पर कुछ ‘फर्जी’ संदेशों के कारण देश के कई हिस्सों में मॉब लिन्चिंग में बेगुनाह लोगों की मौत हुई है. जिसके बाद व्हाट्सएप ने कहा है कि वह इस पर शोध कराएगी कि भारत में अफवाहें आग की तरह तेजी से क्यों फैल रही हैं.

फेक न्यूज, अफवाह और मॉब लिंचिंग पर लगाम लगाने के लिए व्हाट्सएप एक नया परीक्षण कर रहा है. इससे उपयोगकर्ताओं को पता चलेगा कि मैसेज भेजने वाले ने कब मैसेज लिखा और कब उसे भेजा. इससे फायदा होगा कि उपयोगकर्ता को पता चल जाएगा कि जो मैसेज वह पढ़ रहा है सामने वाले ने खुद लिखा है या अफवाह फैलाने के लिए भेजा गया है.

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