नई दिल्ली. हेल्थ एंड वेल्फेयर मिनिस्ट्री ने ऑक्सीटोसिन के घरेलू प्रयोग के उत्पादन पर प्रतिबंध लगा दिया है. यह प्रतिबंध 1 जुलाई 2018 से प्रभावी हो जाएगा. ऑक्सीटोसिन का आयात पहले से ही प्रतिबंधित है. एक जुलाई से कोई भी कंपनी घरेलू यूज के लिए इस दवा का उत्पादन नहीं करेगी. ऑक्सीटोसिन आमतौर पर डेयरी उद्योग में दुधारू पशुओं के लिए प्रयोग किया जाता है. इसका इंजेक्शन लगा देने से पशु किसी भी समय दूध दे सकता है. यह स्वत: उत्पन्न होने वाला हार्मोन है जो कि गर्भाशय के संकुचन का कारण बनता है.

इसका प्रयोग सब्जियों में भी किया जाने लगा है जो कि खतरनाक है. कद्दू, तरबूज, बैंगन, खीरा आदि का आकार बढ़ाने के लिए भी इसका इस्तेमाल काफी बढ़ रहा है. माना जाता है कि इसके इस्तेमाल से छोटा सा फल रातोंरात पूरे आकार में आ जाता है. कर्नाटक एंटी बायोटिक्स एंड फार्मास्यूटिकल्स लिमिटेड (केएपीएल), इस दवा का निर्माण करता रहेगा. बाकी कंपनियों के लिए इसका निर्माण बैन है.

स्वास्थ्य मंत्रालय के एक सीनियर अधिकारी के मुताबिक, ऑक्सीटोसिन का इस्तेमाल पशुओं व खेती में किया जा रहा है जो कि खतरनाक है. फल, सब्जी व दूध आदि को सुरक्षित बनाए रखने के लिए इसपर प्रतिबंध लगना जरूरी था. इसीलिए मंत्रालय ने ऑक्सीटोसिन के उत्पादन पर प्रतिबंध लगाया है. स्वास्थ्य मंत्रालय ने सभी रजिस्टर्ड हॉस्पीटल्स और क्लीनिक्स को सलाह दी है कि वे ऑक्सीटॉसिन खरीदने के लिए सिर्फ KAPL से संपर्क कर अपना ऑर्डर बुक करा सकते हैं. यह दवा अब किसी और रिटेल स्टोर पर नहीं मिलेगी.

स्वास्थ्य मंत्रालय ने एक स्टेटमेंट में कहा है कि ऑक्सीटोसिन का उत्पादन सिर्फ KAPL द्वारा किया जाएगा. यह कंपनी रजिस्टर्ड हॉस्पिटल और क्लीनिक्स को डायरेक्ट सप्लाई करेगी. पब्लिक और प्राइवेट दोनों ही क्षेत्रों के हॉस्पीटल्स को KAPL ऑक्सीटॉसिन सप्लाई करेगी. ऑक्सीटॉसीन रिटेल केमिस्ट किसी भी नाम या रूप में बिक्री नहीं कर सकेंगे.

शराब बैन पर नीतीश कुमार का बड़ा ऐलान, बिहार में बंद नहीं होगी शराबबंदी

नरेंद्र मोदी भी नहीं लगा पाए लगाम, 3 वर्षों में सीमा पर बढ़ी हथियारों, मवेशियों और नशीली दवाओँ की तस्करी

देश और दुनिया की ताजातरीन खबरों के लिए हमे फॉलो करें फेसबुक,गूगल प्लस, ट्विटर पर और डाउनलोड करें Inkhabar Android Hindi News App