नई दिल्ली. हर साल कई केंद्रीय सरकारी कर्मचारी सेवानिवृत्त (रिटायर) होते हैं. उनके पीछे कई ओर लोग रिटायरमेंट के लिए तैयार हैं. यह एक चलती आ रही और आगे तक चलने वाली प्रक्रिया है. केंद्र सरकार में वर्तमान और सेवानिवृत्त कर्मचारियों सहित 1.1 करोड़ से अधिक कर्मचारी हैं. इनमें से लगभग 48.41 लाख केंद्र सरकार के कर्मचारी हैं और 62.03 लाख पेंशनभोगी हैं. दशकों तक काम करने के बाद केंद्र सरकार के दोनों कर्मचारियों के लिए सबसे बड़ी चिंताओं में से एक होती है पेंशन की चिंता.

इन पेंशनभोगियों और कर्मचारियों को पता होना चाहिए कि केंद्र सरकार के कर्मचारियों की न्यूनतम पेंशन पांचवें वेतन आयोग के अनुसार 1,275 रुपये थी. हालांकि सातवां वेतन आयोग कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए खुशखबरी लेकर आया था. इसने न्यूनतम मूल वेतन को बढ़ाकर 18,000 रुपये करने के अलावा पेंशन को 2.57 गुना बढ़ा दिया था.

पेंशन और पेंशनभोगी कल्याण विभाग ने कहा कि पांचवें सीपीसी के बाद जारी किए गए आदेशों के अनुसार, सरकार में न्यूनतम पेंशन 1,275 थी. वहीं सातवें वेतन आयोग के तहत संशोधित पेंशन 3,500 रुपये है. ये 1,275 रुपये की पूर्व-संशोधित पेंशन के 2.26 गुना से अधिक है.

केंद्र द्वारा वेतन आयोग की सिफारिशों को स्वीकार किए जाने के बाद न्यूनतम वेतन 7,000 रुपये प्रति माह से बढ़ाकर 18,000 रुपये प्रति माह किया गया था. सातवें वेतन आयोग की रिपोर्ट में कहा गया है कि पेंशन की गणना के आधार पर, मौजूदा 3,500 रुपये से न्यूनतम पेंशन बढ़ा कर 9,000 रुपये कर दी जाएगी. इस आयोग की सिफारिशों के आधार पर न्यूनतम पेंशन मौजूदा स्तर पर 2.57 गुना बढ़ जाएगी.

बता दें कि केंद्रीय सरकारी कर्मचारी केवल 10 साल की सेवा के बाद पेंशन के लिए योग्य हो जाता है. पारिवारिक पेंशन के मामले में, एक कर्मचारी की विधवा पारिवारिक पेंशन के लिए योग्य हो जाती है. लेकिन इसके तहत नियम है कि पति या पत्नी ने एक वर्ष की सेवा पूरी कर ली हो तभी उसकी मौत के बाद उसके पति या पत्नी को पेंशन दी जाती है.

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