नई दिल्ली: Vishaka Guidelines on Sexual Harassment कार्यस्थल पर महिलाओं के साथ होने वाले यौन शोषण के खिलाफ विशाखा गाइडलाइंस बनाने वालीं सुप्रीम कोर्ट की पूर्व जज सुजाता मनोहर ने देशभर में चल रहे #MeToo कैंपेन को सही बताया है. 1994 में सुप्रीम कोर्ट की दूसरी महिला जज बनीं रिटायर्ड जस्टिस सुजाता मनोहर ने कहा कि सोशल मीडिया पर ये कैंपेन काफी बड़ा हो चुका है. कई महिलाएं पुरुषों के खिलाफ यौन उत्पीड़न के आरोपों को सार्वजनिक तौर पर बोल चुकी हैं और अब जरूरत इस बात की है कि इन आरोपों के खिलाफ आपराधिक प्रावधान बनाए जाएं.

उन्होंने कहा कि ‘अभी हो क्या रहा है कि कई सारी महिलाएं कई कारणों की वजह से खुलकर अपने साथ हुए यौन उत्पीड़न के आरोपों के बारे में नहीं कह पा रही हैं, ये सोचकर की आरोपी पावरफुल पोजिशन पर बैठा हुआ है.’

उन्होंने आगे कहा कि ‘ऐसे में पहला रास्ता तो ये है कि उन्हें उस पोजिशन से हटाया जाए. लेकिन अगर आप चाहते हैं कि उसे उसके पद से निष्कासित करवाने के अलावा भी सजा दिलाई जाए तो ये कानून आपका साथ नहीं देगा क्योंकि ऐसे आरोपों के खिलाफ रिपोर्ट करने की समय सीमा है.’

इसलिए कानून को इस तरह की घटनाओँ में या दूसरे तरह के यौन दुर्व्यवहारों को वर्गीकृत करने और सजा की विभिन्न श्रेणियों को अलग-अलग वर्गीकृत करने की जरूरत है जिससे बाद में भी ऐसे मामलों का खुलासा होने पर दोषी को सजा दी जा सके.

पूर्व जस्टिस सुजाता मनोहर ने कहा कि मेरा मानना है कि समाजशास्त्रियों और क्रिमिनोलॉजिस्ट को साथ में बैठकर यौन शोषण और उत्पीड़न के अलग-अलग मामलों में सजा को वर्गीकृत करने की जरूरत है. यौन उत्पीड़न और #MeToo के बारे में पूर्व जस्टिस सुजाता मनोहर ने क्या कहा यहां पढ़ें द प्रिंट की रिपोर्ट.

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