लखनऊ. 2019 लोकसभा चुनावों में नरेंद्र मोदी का विजय रथ रोकने का दावा करने वाली सपा-बसपा महागठबंधन में अब आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है. बसपा सुप्रिमो मायावती ने ट्वीट कर आगामी सभी चुनाव अकेले लड़ने की घोषणा कर दी है. मायावती ने ट्विटर पर लिखा है कि बीएसपी अब सभी छोटे-बड़े चुनाव अपने दम पर लड़ेगी. सपा-बसपा गठबंधन की ताबूत में मायावती का यह बयान आखिरी कील साबित हो सकता है.  बता दें कि इससे पहले मायावती ने अखिलेश यादव पर बसपा के पक्ष में यादव वोटबैंक ट्रांसफर न करवा पाने का आरोप लगाया था. मायावती ने अखिलेश यादव पर मुस्लिम विरोधी होने का आरोप भी लगा दिया है. मायावती ने कहा है कि अखिलेश यादव चाहते थे कि चुनावों में मुस्लिम उम्मीदवारों को कम से कम टिकट दी जाए. मायावती ने कहा कि सतीश चंद्र मिश्रा के जरिए अखिलेश ने उन तक यह संदेश पहुंचाया था कि लोकसभा में महागठबंधन की तरफ से कम से कम मुस्लिम उम्मीदवारों को टिकट दी जाए. मायावती ने चुनाव में हार के बाद अखिलेश यादव के फोन न करने पर नाराजगी भी जताई. बता दें कि उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा उपचुनावों में दोनों ही पार्टियों ने अलग-अलग चुनाव लड़ने का फैसला किया है. मायावती ने ट्वीट किया है

बसपा सुप्रीमो मायावती ने सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने लोकसभा चुनाव 2019 में मिली हार के बाद अखिलेश यादव पर लगातार हमला बोल रही हैं. मायावती ने कहा कि अखिलेश मुस्लमानों को चुनाव में कम टिकट चाहते थे. अखिलश चाहते थे कि मुस्लमानों को कम टिकट दी जाए लेकिन मैं यह चाहती थी कि मुस्लमानों को अधिक टिकट मिले. इसके साथ ही मयावती ने कहा कि चुनाव में मिली हार के बाद उन्होंने मुझे फोन तक नहीं किया है जबकि बसपा के महसचिव सतीश मिश्रा ने उन्हें कहा था कि वह मुझे फोन कर ले लेकिन फिर भी मुझे उन्होंने कॉल नहीं किया. हालांकि फिर भी मैंने बड़े होने का फर्ज निभाया और 23 तारीख को चुनाव रिजल्ट के बाद उनकी पत्नी डिंपल यादव और परिवार के बाकी लोगों की हार का अफसोस जताया.

मायावती की दो टूक- बीएसपी अकेले लड़ेगी सभी चुनाव

बीएसपी सुप्रीमो मायावती ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्विटर पर इस बात की औपचारिक घोषणा कर दी है कि बसपा आने वाले सभी चुनावों में अकेले मैदान पर उतरेगी. मायावती ने एक के बाद एक लगातार तीन ट्वीट किए. मायावती ने कहा कि अखिलेश यादव और सपा सरकार की दलित विरोधी नीतियों के इतिहास को भूलकर भी हमने उनके साथ गठबंधन किया. लेकिन आम लोकसभा चुनाव में सपा के व्यवहार बीएसपी को सोचने पर मजबूर करता है कि क्या ऐसा कर के बीजेपी को हराना संभव है, जो कि संभव नहीं है.ऐसे में पार्टी और मूवमेंट के हित में बीएसपी अब सारे छोटे-बड़े चुनाव अपने दम पर लड़ेगी. मायावती के ट्वीट सपा-बसपा गठबंधन की ताबूत में आखिरी कील हैं.  

 

इसके साथ ही मयावती ने कहा कि सपा का वोट बसपा को नहीं पड़ा लेकिन बसपा का वोट सपा के खाते में गया है. बसपा के प्रदेश अध्यक्ष रामआसरे कुशवाहा को सपा के नेता राम गोविंद चौधरी ने हरवाया है क्योंकि उन्हें यादव वोट नहीं मिला था. इतना ही नहीं ऐसे नेताओं पर सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कोई कार्यवाई नहीं की है. हालांकि सपा के मुख्य प्रवक्ता राजेंद्र चौधरी ने इस हमले के लेकर कहा कि अखिलेश यादव ने किसी को धोखा नहीं दिया है और न हीं उन्होंने कभी किसी पर व्यक्तिगत टिप्पणी की है. अखिलेश यादव, मायावती के इस आरोप का क्या जवाब देते हैं इस पर सबकी नजर रहेगी.

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