नई दिल्ली. कृषि कानूनों के विरुद्ध चल रहे संघर्ष का समर्थन करते आम आदमी पार्टी (आप) पंजाब के अध्यक्ष व सांसद भगवंत मान ने सोमवार को संसद के मॉनसून सैशन के पहले ही दिन काले कृषि कानूनों को रद्द करवाने के लिए ‘काम रोको प्रस्ताव’ पेश किया। मान ने कहा कि मानसून सत्र दौरान काम रोको प्रस्ताव दूसरे सूचीबद्ध कार्यों से अलग रखा जाए और कृषि कानूनों से संबंधित मुद्दे पर ही विशेष तौर पर चर्चा की जाए, क्योंकि यह बहुत महत्वपूर्ण और संवेदनशील मुद्दा है।

‘आप’ के सांसद भगवंत मान ने कहा कि किसानी संघर्ष के दौरान भीषण गर्मी, सर्दी तूफानों की प्रवाह न करते हुए देश के किसान, महिलाएं, बुजुर्ग और बच्चे अपने परिवारों के साथ पिछले 8 माह से दिल्ली की सरहदों पर बैठे तीनों काले कृषि कानून रद्द करवाने की मांग कर रहे हैं। काम रोको प्रस्ताव के बारे में दलील देते मान ने कहा कि संसद में पहल के आधार पर सिर्फ काले कृषि कानूनों के बारे में चर्चा होनी चाहिए और किसानों की जायज मांगों को तुरंत स्वीकार किया जाना चाहिए।

भगवंत मान ने कहा कि काले कृषि कानून लागू करने के विरुद्ध किसानों की ओर से शुरू किए देश व्यापक किसान आंदोलन के दौरान सैंकड़ों अन्नदाता शहीद हो चुके हैं। इस लिए जरूरी है कि इन कानूनों को पहल के आधार पर रद्द किया जाए, जिससे किसान और उनके परिवार खुशी खुशी अपने-अपने घरों को वापस जाएं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने शांतमई तरीके से आंदोलन कर रहे किसानों को बार-बार चरमपंथी, खालिस्तानी और आतंकवादी कह कर बदनाम करने की कोशिश की है, जो अति निंदनीय है।

मान ने कहा कि वह और उनकी समूची आम आदमी पार्टी संसद के अंदर किसानों की मांगों का समर्थन करते हुए किसानों की आवाज़ बुलंद करते रहेंगे। उन्होंने कहा कि यदि लोक सभा के स्पीकर ने काम रोको प्रस्ताव को मंजूरी न दी तो वह मंगलवार को फिर से काम रोको प्रस्ताव पेश करेंगे। सांसद भगवंत मान ने स्पष्ट किया कि आम आदमी पार्टी शुरू से ही किसानों के साथ खड़ी थी, खड़ी है और हमेशा खड़ी रहेगी और संघर्ष जीतने तक उनके हकों के लिए लड़ती रहेगी।

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