नई दिल्लीः 31 जनवरी, 2020 उर्वरक क्षेत्र की प्रमुख संस्था इफको द्वारा वर्ष 2019 का ‘श्रीलाल शुक्ल स्मृति इफको साहित्य सम्मान’ वरिष्ठ कथाकार श्री महेश कटारे को प्रदान किया गया. उन्हें यह सम्मान दिनांक 31 जनवरी, 2020 को नई दिल्ली के एनसीयूआईऑडिटोरियम में आयोजित एक समारोह में सुविख्यात साहित्यकार डॉ. विश्वनाथ त्रिपाठी ने प्रदान किया.साहित्य की दुनिया में लगातार सक्रिय रहने वाले श्री कटारे की रचनाओं में समर शेष है, इतिकथाअथकथा, मुर्दा स्थगित, पहरुआ, छछिया भर छाछ, सात पान की हमेल, मेरी प्रिय कथाएँ, गौरतलब कहानियाँ (कहानी); महासमर का साक्षी, अँधेरे युगान्त के, पचरंगी (नाटक); पहियों पर रात दिन, देसबिदेस दरवेश (यात्रावृत); कामिनी कायकांतारे, कालीधार, भर्तृहरि काया के वन में (उपन्यास); समय के साथ-साथ, नजर इधर-उधर (अन्य) प्रमुख हैं.

वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. विश्वनाथ त्रिपाठी की अध्यक्षता में गठित निर्णायक मंडल ने श्री महेश कटारे का चयन खेती-किसानी वाले ग्रामीण यथार्थ पर केन्द्रित उनके व्यापक साहित्यिक अवदान को ध्यान में रखकर किया गया है. निर्णायक मंडल के अन्य सदस्य श्री देवी प्रसाद त्रिपाठी, श्रीमती मृदुलागर्ग, श्री मुरली मनोहर प्रसाद सिंह, प्रो. रविभूषण, श्री इब्बाररब्बी एवं डॉ. दिनेश कुमार शुक्ल थे.प्रतिवर्ष दिया जाने वाला यह प्रतिष्ठित पुरस्कार किसी ऐसे रचनाकार को दिया जाता है जिसकी रचनाओं में ग्रामीण और कृषि जीवन से जुड़ी समस्याओं,आकांक्षाओं और संघर्षों को मुखरित किया गया हो। मूर्धन्यकथाशिल्पीश्रीलाल शुक्ल की स्मृति में वर्ष 2011 में शुरू किया गया यह सम्मान अब तक श्री विद्यासागरनौटियाल, श्री शेखर जोशी, श्री संजीव, श्री मिथिलेश्वर, श्री अष्टभुजा शुक्ल, श्री कमलाकान्त त्रिपाठी, श्री रामदेव धुरंधर एवं श्री रामधारी सिंह दिवाकर को प्रदान किया गया है.

सम्मानित साहित्यकार को एक प्रतीक चिह्न, प्रशस्ति पत्र तथा ग्यारह लाख रुपये की राशि का चैक दिया जाता है.
इफ्को कला, संस्कृति और साहित्य के प्रोस्त्साहन में सदा अग्रणी रहा है l इफको उन गिनी-चुनी संस्थाओं में से है जहाँ कला, संस्कृति और साहित्य का अलग प्रकोष्ट है पुरे वर्ष में विभिन्न कार्यक्रमों करते और करवाते रहते हैं l इन प्रयासों को प्रभंदन का पूरा समर्थन रहता है.अपने स्वागत भाषण में इफको के प्रबंध निदेशक डॉ॰ उदय शंकर अवस्थी ने कहा कि आज कृषि और किसानों के जीवन पर लिखने वाले कम ही लेखक हैं. उन्होंने कहा कि श्री महेश कटारे का रचना संसार ही नहीं उनका जीवन भी गाँव और खेती-किसानी के इर्द–गिर्द घूमता है। अपनी कहानियों में उन्होंने विकास और पिछड़ेपन के बीच झूलते गाँव की हक़ीक़त को पकड़ने की कोशिश की है। डॉ. अवस्थी ने कटारे जी के चर्चित उपन्यास ‘कामिनी कायकांतारे’ का जिक्र करते हुए उन्हें बधाई दी.

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि एवं सम्मान चयन समिति के अध्यक्ष डॉ. विश्वनाथ त्रिपाठी ने लेखक को सम्मानित करने पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि श्री कटारे का लेखन अत्यंत महत्त्वपूर्ण है. किसानों के जीवन को मुखरित करने का काम जो कटारे जी ने किया है, वह अन्यत्र दुर्लभ है। उन्होंने कहा कि कटारे जी की कृतियों में प्रेमचंद और रेणु की छाप है. आपकी रचनाओं में संस्कृत की परंपरा के साथ देशज चिंतन का संश्लेष विलक्षण है. कटारे जी का उपन्यास भर्तृहरि काया के वन में तत्कालीन कृषक जीवन, आदिवासी जीवन, वैदिक-अवैदिक संप्रदायों की साधनाओं का जीवंत दस्तावेज है.श्रीलाल शुक्ल जी की रचनाओं पर आधारित दास्तान जहालत के पचास साल की प्रस्तुति दी दास्तानगो श्री महमूदफ़ारूक़ी ने, जिसे दर्शकों ने खूब सराहा. इस अवसर पर श्रीलाल शुक्ल एवं सम्मानित साहित्यकार श्री महेश कटारे की रचनाओं की प्रदर्शनी भी लगायी गयी. समारोह में दिल्ली विश्वविद्यालय, जवाहरलालनेहरू विश्वविद्यालय, इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय और जामियामिल्लियाइस्लामिया सहित विभिन्न विश्वविद्यालयों के शिक्षक, छात्र सहित बड़ी संख्या में साहित्यप्रेमी शरीक हुए.

इफको के बारे में :इफको पूर्ण सहकारी स्वामित्व वाली दुनिया की सबसे बड़ी सहकारी समिति है जो उर्वरकों का उत्पादन, वितरण और विपणन करती है. वर्ष 1967 में मात्र 57 सदस्य सहकारी समितियों के साथ अपनी यात्रा शुरू करने वाली इस संस्था से आज 35000 से अधिक सहकारी समितियॉं जुड़ी हैं. विविध व्यावसायिक हितों को ध्यान में रखकर संस्था ने साधारण बीमा से लेकर खाद्य प्रसंस्करण तक विभिन्न क्षेत्रों में कारोबारी पहल की है। भारत से बाहर ओमान, जॉर्डन, दुबई और सेनेगल में भी इफको की उपस्थिति है.

भारत में अपने पांच संयंत्रों और विस्तृत देशव्यापीमार्केटिंग नेटवर्क के जरिये इफको देश में बिकने वाले फॉस्फैटिक उर्वरक के हर तीसरे और यूरिया के हर पांचवें बोरे का विपणन करती है. वर्ष 2018-19 के दौरान इफको ने 8.14 मिलियन टन उर्वरकों का उत्पादन किया और लगभग 11.55 मिलियन टन उर्वरक किसानों को बेचा.भारतीय कृषि और भारतीय कृषक समुदाय के समावेशी और समग्र विकास में इफको का अटूट विश्वास रहा है. कोरडेट, आईएफएफडीसी और आईकेएसटी जैसी संस्थाएं इस दिशा में विशेष रूप से कार्य कर रही हैं.

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