मुंबई. लोकसभा चुनाव 2019 में हार के बाद और विधानसभा चुनाव से पहले महाराष्ट्र कांग्रेस पार्टी में फूट पड़ गई है. पूर्व नेता प्रतिपक्ष और वरिष्ठ कांग्रेस नेता राधाकृष्ण विखे पाटिल और पूर्व मंत्री अब्दुल सत्तार ने एमएलए पद से इस्तीफा दे दिया है. इस्तीफा देने के बाद पाटिल महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़नवीस से भी मिलने पहुंचे. अप्रैल में ही राधाकृष्ण पाटिल ने विधानसभा नेता प्रतिपक्ष से इस्तीफा दिया था. लोकसभा चुनाव से पहले राधाकृष्ण पाटिल के बेटे सुजय विखे पाटिल ने बीजेपी जॉइन कर ली थी. बीजेपी ने उन्हें अहमदनगर लोकसभा सीट से उम्मीदवार बनाया और वे जीते भी. वहीं दूसरी ओर हाल ही में कांग्रेस से निकाले गए अब्दुल सत्तार ने भी विधायक पद से इस्तीफा दिया है. सत्तार का कहना है कि महाराष्ट्र से 8 से 10 विधायक बीजेपी के संपर्क में हैं. ऐसे में माना जा रहा है कि महाराष्ट्र में इस साल होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस खेमे के करीब 10 विधायक पार्टी का दाम छोड़ बीजेपी में शामिल हो सकते हैं.

अब्दुल सत्तार ने विधायक पद से इस्तीफा देने के बाद कहा कि राज्य के 8 से कांग्रेस विधायक पार्टी के राज्य नेतृत्व से नाखुश हैं. राज्य नेतृत्व महाराष्ट्र में कांग्रेस को खत्म करने में लगा हुआ. उन्होंने कहा कि जल्द ही ये विधायक बीजेपी में शामिल हो सकते हैं. वहीं पूर्व विधानसभा नेता प्रतिपक्ष राधाकृष्ण विखे पाटिल ने भी विधायक पद से इस्तीफा देने के बाद मीडिया से बात की. इस दौरान पाटिल ने कहा कि लोकसभा चुनाव में उन्होंने कांग्रेस के लिए प्रचार नहीं किया. हाईकमान ने उन्हें नेता प्रतिपक्ष बनाया था, इस पर उन्हें कोई संदेह नहीं है. उन्होंने अपना बेहतर दिया लेकिन कुछ परिस्थितियों की वजह से उन्हें इस्तीफा देना पड़ रहा है.

वहीं दूसरी ओर महाराष्ट्र कांग्रेस के दो बड़े नेताओं के इस्तीफा देने के बाद राजनीतिक गलियारों में हलचल मच गई है. कयास लगाए जा रहे हैं कि राधाकृष्ण विखे पाटिल और अब्दुल सत्तार महाराष्ट्र में विधानसभा चुनाव से पहले बीजेपी का दामन थाम सकते हैं. राज्य में इसी साल के अंत में विधानसभा चुनाव होने हैं और दोनों नेताओं के इस्तीफे के बाद से कांग्रेस को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है. वहीं अब्दुल सत्तार के 8-10 विधायकों के बीजेपी के संपर्क में होने के बयान के बाद भी कांग्रेस खेमे में चिंता बढ़ गई है.

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