मेरठ. समाजवादी पार्टी के शासन के दौरान मेरठ में हुए मदरसा स्कॉलरशिप स्कैम ने राजनीति को गरम कर दिया था. इस मामले में उत्तर प्रदेश पुलिस के आर्थिक अपराध विंग (ईओओ) ने मेरठ छात्रवृत्ति घोटाले में 52 मामलों में जांच शुरू करने के लिए राज्य सरकार को प्रस्ताव भेजा था जिसके बाद अब राज्य सरकार ने 26 मामलों में जांच के आदेश दिए हैं. टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक पुलिस ने बताया कि मदरसों और अन्य अल्पसंख्यक संस्थानों को जो स्कॉलरशिप दी जाती थी वह सिर्फ पेपर पर मौजूद है.

आर्थिक अपराध विंग के अधिकारी राम सुरेश यादव ने टाइम्स ऑफ इंडिया को बताया कि पुलिस की लंबी पड़ताल में सामने आया कि गैरकानूनी तरीके से छात्रवृति के नाम पर फंड लिया जा रहा था. जांच में ऐसे कई मदरसों और अल्पसंख्यक संस्थान का पता चला जो वास्तव में थे ही नहीं. ये तो सिर्फ पेपर पर ही मौजूद थे. जांच के मुताबिक ऐसे संस्थानों ने जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी सुमन गौतम के साथ मिलकर 2009 से 2011 तक करोड़ों रुपये का घपला किया. इस मामले का उजागर 2010 में दर्ज शिकायतों के बाद हुआ.

जिला स्तर की जांच देने के बाद खुलासा हुआ कि 141 मदरसे व अन्य अल्पसंख्यक संस्थान इस घोटाले में शामिल थे.अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी मोहम्मद तारिक ने कहा कि गौतम समेत कई जिला अधिकारी इस घोटाले की रिपोर्ट में दोषी पाए गए थे. बतौर टाइम्स ऑफ इंडिया सुमन गौतम को 2012 में सस्पेंड कर दिया गया था और 2015 में गिरफ्तार भी किया गया हालांकि कुछ समय बाद ही इन्हें रिहा भी कर दिया गया. हैरान कर देने वाली बात ये है कि सुमन गौतम को दोबारा नियुक्त किया गया और फिलहाल वह हापुर में अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी के रूप में काम कर रही हैं.

वहीं इस मामले की गंभीरता को देखते हुए इस केस को आर्थिक अपराध विंग (ईओओ) को सौंप दिया गया था. जिसने शुरुआती जांच के बाद, 52 मामलों में जांच शुरू करने के लिए राज्य प्रशासन को एक प्रस्ताव भेजा था. जिसके बाद अब सरकार ने अब 26 मामलों के जांच करने के आदेश दिए हैं. मेरठ में 26 मामलों के अलावा इटावा में भी स्कॉलरशिप गबन के 80 से अधिक मामलों में एफआईआर पर जांच की जा रही है.

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