लखनऊ: कोरोना वायरस की मार झेल रहे भारत के लिए टेस्टिंग के मामले में बड़ी खबर आई है. लखनऊ स्थित पीजीआई ने कोरोना टेस्टिंग किट विकसित करने का दावा किया है जिसका खर्च मात्र 500 रूपये आएगा और उसकी रिपोर्ट में महज 30 मिनट में आ सकेगी कि मरीज कोरोना संक्रमित है या नहीं. पीजीआई के मालीक्यूलर मेडिसिन एंड बायोटेक्नोलोजी विभाग ने किट पेटेंट के लिए आवेदन भी कर दिया है. जैसे ही इस किट का पेटेंट हो जाता है वैसे ही संभवत: भारत दुनिया में सबसे कम कीमत पर टेस्टिंग किट बनाने की उपलब्धि भी अपने नाम कर लेगा.

बताया जा रहा है कि वैज्ञानिकों ने इस जांच तकनीक का परीक्षण सिंथेटिक कोरोना आरएनए (राइबो न्यूक्लिक एसिड) पर किया जो जांच में सफल रहा. यह जांच तकनीक भी आरएनए आधारित ही है जिसमें मरीज के नमूने से आरएनए निकाल कर उसमें ही संक्रमण देखा जाएगा कि मरीज में वो कीटाणु है या नहीं?

जांच किट के पेटेंट की प्रक्रिया पूरी होने के बाद किट की वैधता की जांच के लिए इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (आईसीएमआर) को अनुमोदन के लिए भेजा जाएगा. जैसे ही अनुमोदन मिल जाता है वैसे ही कंपनियां किट का निर्माण करेंगी. गौरतलब है कि अभी तक देश में कोरोना की जांच के लिए जिस किट का इस्तेमाल किया जाता रहा है वो विदेश से आयात हो रही है. इस जांच में करीब 4500 से 5000 रूपये तक खर्च आता है. वर्तमान जांच प्रक्रिया में पीसीआर तकनीक का इस्तेमाल होता है लेकिन पीजीआई ने जो किट डेवलप की है उसमें पीसीआर तकनीक का इस्तेमाल नहीं होगा इसलिए जांच रिपोर्ट भी जल्द आ जाएगी. फिलहाल कोरोना वायरस का पता लगाने के लिए स्वाब निकाला जाता है जो गले और नाक से लिया जाता है.

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