नई दिल्ली. केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार लोकसभा चुनाव से पहले जम्मू कश्मीर में हर चुनौती से निपटने की तैयारी में है. हाल ही में हुई केंद्रीय कैबिनेट ने तीन बड़े ऐतिहासिक फैसले लिए हैं. माना जा रहा है कि नरेंद्र मोदी कैबिनेट के इन तीनों फैसलों से जम्मू कश्मीर में दूरगामी परिणाम सामने आएंगे. कैबिनेट ने कश्मीर के लिए आरक्षण नीति में बदलाव के लिए संविधान के आर्टिकल 370 में संशोधन का सबसे अहम फैसला किया है.

कैबिनेट के इस फैसले की खास बात ये है कि अब इंटरनेशनल बार्डर पर पर रहने वाले लोग यानी जम्मू, कठुआ और सांबा में रहने वाली आबादी, जो क्रॉस बॉर्डर फायरिंग और शेलिंग का दंश झेल रही है, उसे सरकारी नौकरियों के आरक्षण में 3 प्रतिशत का लाभ मिलेगा. जो इसके पहले सिर्फ लाइन ऑफ कंट्रोल पर रहने वाली आबादी को मिलता था. लेकिन अब बात बराबरी की हो गई. इसके अलावा एससी को 8% और एसटी को 10% पदोन्नति में आरक्षण को लाभ मिलेगा, जो पहले नहीं मिलता था. पूरे राज्य में 10 फीसदी आरक्षण आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को मिलेगा, जैसे देश के बाकी हिस्सों को मिलेगा.

इस फैसले को जम्मू की जनसंख्या के आधार पर देखा जाए तो साल 2011 की जनगणना के मुताबिक जम्मू-कश्मीर की कुल जनसंख्या 1.25 करोड़ है और सिर्फ जम्मू की 54 लाख. इसमें 62.55 फीसदी हिंदू, 33.45 % मुस्लिम, 3.30% सिख और 0.70 % बौद्ध हैं. सरहद के पास लोगों को सामाजिक और आर्थिक रूप से मजबूत करने का नरेंद्र मोदी सरकार का ये कदम लोकसभा चुनाव 2019 से पहले उन लोगों पर किसी मास्टर स्ट्रोक से कम नहीं है जो इन्हें उपेक्षित रखे हुए थे.

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