नई दिल्ली. SKM Head on phone call with Amit Shah केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भारतीय किसान यूनियन के वरिष्ठ नेता युद्धवीर सिंह से फ़ोन पर बात की है. इस बातचीत से किसानों और सरकार के बीच चल रहे तकरार को ख़त्म करने पर सहमति बनी है. बातचीत में किसनों पर दर्ज मुक़दमे, MSP पर कानून, बिजली संसोधन बिल जैसे अहम मुद्दों पर सहमति बनी हैं. MSP पर किसानो के हित के लिए संयुक्त किसान मोर्चा ने 5 सदस्यीय कमेटी बना ली है. खबरों के मुताबिक किसान कमेटी और गृह मंत्री अमित शाह की सोमवार को मुलाकात हो सकती हैं.

किसानो पर लगे मुकदमों को रद्द करेगी सरकार

भारतीय किसान यूनियन के नेता युद्धवीर सिंह ने बताया कि शुक्रवार को कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर से फ़ोन पर बात हुई और शनिवार को अमित शाह से फोन पर वार्ता हुई. उन्होंने बताया कि यह वार्ता सकारात्मक रही. गृह मंत्री ने आश्वासन दिलाया है कि किसानों के ऊपर बीजेपी शासित राज्यों में दर्ज मुकदमों के लिए राज्यों को पत्र भेजेंगे और सभी केस को रद्द करने के लिए आदेश दिए जाएंगे जबकि रेलवे की ओर से दर्ज मुकदमों को केंद्र अपनी ओर से खत्म कर देगा। किसान नेताओं के मुताबिक अकेले हरियाणा में एक साल के अंदर किसानों पर 35 हजार से ज़्यादा केस दर्ज हैं, साथ ही दिल्ली में आंदोलन के बाद से दर्जनों किसान जेल में बंद हैं.

यूपी से लेकर पंजाब तक मुआवज़े की तैयारी शुरू

किसान नेता ने बताया की आंदोलन के दौरान शहीद हुए किसानों के परिवार में से 1 व्यक्ति को सरकारी नौकरी और 25-25 लाख मुआवज़े दिये जाएं. इसपर गृह मंत्री अमित शाह ने बताया कि यूपी और पंजाब में मुआवजे पर काम शुरू हो गया है. किसान और गृह मंत्री के बीच होने वाली मीटिंग पर इस विषय में गहराई से चिंतन किया जाएगा। किसान नेता ने बताया कि MSP को लेकर संयुक्त किसान मोर्चा ने 5 सदस्यीय कमेटी बनाई हैं जो सीधे गृह मंत्री के साथ वार्ता करेगी। संयुक्त किसान मोर्चा ने सात दिसंबर को पुन: बैठक सिंघु बॉर्डर पर बुलाई है। माना जा रहा है कि 5 या 6 दिसंबर को वार्ता हो सकती है। इस वार्ता के बिंदुओं को एसकेएम की 7 दिसंबर की बैठक में रखा जाएगा।

क्या हैं बिजली संशोधन बिल-2021

इस बिल में पहले सरकार की और से बिजली वितरण कंपनियों को सब्सिडी दी जाती थी, जिसे अब सरकार द्वारा संशोधत कर, सीधे किसानों को इसका फायदा मिलेगा। बिना ग्राहकों को बताए बिजली वितरण कंपनी बिजली की कटौती नहीं करेगी, साथ ही तय समय से ज़्यादा बिजली काटने पर बिजली कंपनियों को हर्जाना भरना होगा।

इस बिल का विरोध क्यों?

इस समय कई राज्यों में किसानों को या तो बिजली फ्री मिलती है या फिर उनसे नाम मात्र का शुल्क लिया जाता है। यदि अब यह विधेयक आता है तो किसानों को बिजली का वास्तविक मूल्य चुकाना होगा। इसीलिए किसान आंदोलन में यह मांग जोर-शोर से उठ रही है कि इस विधेयक को न लाया जाए।

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