नई दिल्ली.सुप्रीम कोर्ट ने आज अयोध्या राम जन्मभूमि बाबरी मस्जिद विवाद में अपना ऐतिहासिक फैसला सुना दिया है. चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता में सर्वोच्च न्यायालय की संविधान पीठ ने सर्वसम्मति से रामलला विराजमान के पक्ष में फैसला सुनाया. इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया कि मुस्लिम पक्ष को मस्जिद के लिए अलग से 5 एकड़ जमीन मुहैया कराई जाए. सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को आदेश दिया है कि तीन महीने के अंदर ट्रस्ट बनाएं जो राम मंदिर का निर्माण सुनिश्चित करे. राम मंदिर के लिए देशव्यापी रथयात्रा निकलाने वाले वरिष्ठ बीजेपी नेता लालकृष्ण आडवाणी की सुप्रीम  कोर्ट के फैसले पर प्रतिक्रिया भी आ गई है. 

इसके साथ ही भारत के सबसे लंबे कोर्ट केस का निपटारा हो गया. राम मंदिर निर्माण को राजनीतिक नारा बनाने वाले बीजेपी के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी की सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर कहा कि उनका जीवन भर का सपना आज सच हो गया है.

बीजेपी के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी ने कहा-मैं सभी देशवासियों को सुप्रीम कोर्ट की पांच सदस्यीय संविधान पीठ द्वारा दिए गए ऐतिहासिक निर्णय पर पूरे देश को बधाई देता हूं.

लालकृष्ण आडवाणी ने कहा- यह मेरे लिए जीवन भर के सपने के पूरा होने जैसा है. भगवान ने मुझे एक मौका दिया था कि भारत की आजादी के बाद हुए इस सबसे बड़े जनआंदोलन में मैं भी छोटा सा योगदान दे पाया. सुप्रीम कोर्ट के फैसले से हमारा सपना आखिरकार पूरा हुआ है.

जब देश में शुरू हुई मंडल बनाम कमंडल की राजनीति
1990 के दशक में देश में कांग्रेस का जादू खत्म हो चुका था. सरकार बनाने के लिए कांग्रेस को भी कई दलों की जरूरत पड़ने लगी थी. देश में गैरकांग्रसी सरकारें भी राज चला चुकी थी. इसी दौर में देश में मंडल और कमंडल की राजनीति शुरू हुई. वीपी मंडल की अगुवाई वाले मंडल आयोग की सिफारिशें विश्वनाथ प्रताप सिंह ने प्रधानमंत्री रहते हुए 7 अगस्त, 1990 को लागू कर दीं. इसके बाद देश में पिछड़ों और दलितों ने राजनीतिक ताकत के तौर पर दस्तक दी.

इसकी काट के तौर पर देश में कमंडल की राजनीति शुरू हुई. यानी धर्म की. लालकृष्ण आडवाणी ने 25 सितंबर, 1990 को गुजरात के सोमनाथ से रथयात्रा शुरू की, जिसे अलग-अलग राज्यों से होते हुए 30 अक्टूबर को अयोध्या पहुंचना था. आडवाणी यहां कारसेवा में शामिल होने वाले थे. वह रथयात्रा अयोध्या तक नहीं पहुंच पाई. बिहार में जब रथयात्रा पहुंची तो मुख्यमंत्री लालू यादव के आदेश पर 23 अक्टूबर को समस्तीपूर में आडवाणी को गिरफ्तार कर लिया गया था.

जब अयोध्या जा रहे कारसेवकों पर चली थी गोलियां

इस बीच अयोध्या में 21 अक्तूबर से कारसेवक इकट्ठा होने लगे. 30 तारीख को आचार्य वामदेव, महंत नृत्य गोपालदास और अशोक सिंहल की अगुवाई में कारसेवक विवादित स्थल की ओर कूच करने लगे. उन्हें बाबरी मस्जिद के पास पहुंचने से रोकने के लिए मुख्यमंत्री ने गोली चलाने की आज्ञा दे दी. कई कारसेवक मारे गए. प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, कोठारी बंधुओं ने बाबरी मस्जिद पर भगवा झंडा फहरा दिया था. 2 नवंबर को कारसेवकों ने फिर विवादित स्थल की ओर पहुंचने की कोशिश की. इस बार फिर सरकार ने गोली चलवाई और कई कारसेवक मारे गए.

बीजेपी को फर्श से अर्श पर पहुंचाया राम मंदिर आंदोलन के नायक लालकृष्ण आडवाणी ने
इसी घटनाक्रम के बीच में भाजपा ने केंद्र की वी.पी. सिंह सरकार से अपना समर्थन वापस ले लिया जिससे सरकार गिर गई. फिर कांग्रेस के समर्थन से 10 नवंबर, 1990 को चंद्रशेखर प्रधानमंत्री बने. 1991 में मध्यावधि चुनाव हुए. 21 जून को नरसिंह राव प्रधानमंत्री बने. इस चुनाव में भाजपा 85 से 120 सीटों पर पहुंच गई. उत्तर प्रदेश में भाजपा ने विधानसभा चुनावों में भी जीत हासिल की. मंदिर निर्माण का आंदोलन दिनोदिन बढ़ता ही जा रहा था. कल्याण सिंह के मुख्यमंत्री बनने से स्थितियां थोड़ी अनुकूल हो गई थीं. इसके बाद आता है 6 दिसंबर 1992 का दिन. इस दिन आपको मालूम है क्या हुआ था. बाबरी मस्जिद का ढ़ांचा तोड़ दिया गया.

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