नई दिल्ली. कर्नाटक विधानसभा के 10 विधायकों के इस्तीफे पर मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में गरमागरम बहस हुई. विधायकों की तरफ से मुकुल रोहतगी ने दलील दी तो स्पीकर रमेश कुमार की तरफ से अभिषेक मनु सिंघवी ने पैरवी की. वहीं वरिष्ठ वकील राजीव धवन ने सीएम एचडी कुमारास्वामी का पक्ष रखा. चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता में आज दो पाली में कोर्ट ने यह मामला सुना. लंच ब्रेक के बाद दोबारा इस मामले की सुनावाई हुई. सुप्रीम कोर्ट में इस बात पर बहस हुई कि क्या सुप्रीम कोर्ट कर्नाटक के राज्यपाल को इस्तीफा स्वीकार करने का आदेश दे सकती है. सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई बुधवार सुबह तक के लिए टाल दी है. अब इस मामले पर फैसला आज साढ़े दस बजे से सुनाया जाएगा. बता दें कि कर्नाटक विधानसभा में गुरुवार को फ्लोर टेस्ट होगा. उससे पहले अदालत को यह फैसला करना है.

कर्नाटक के सियासी संकट पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई चल रही है. सुप्रीम कोर्ट में कर्नाटक के बागी विधायकों के इस्तीफे पर सुनवाई हो रही है. कुमारास्वामी सरकार से इस्तीफा दे चुके 10 विधायकों की तरफ से मुकुल रोहतगी दलील दे रहे हैं. उन्होंने अदालत में कहा कि 5 और विधायकों ने भी इस्तीफा दे दिया है लेकिन स्पीकर इसे स्वीकार नहीं कर रहे हैं. मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस रंजन गगोई कर रहे हैं. उन्होंने मुकुल रोहतगी से पूछा कि 10 बागी विधायकों ने इस्तीफा कब दिया. इसके जवाब में मुकुल रोहतगी ने बताया कि 6 जुलाई को विधायकों ने इस्तीफा दे दिया था. मुकुल रोहतगी ने कहा कि 10 में से केवल दो विधायकों के खिलाफ अयोग्यता का मामला लंबित है. बता दें कि कर्नाटक की कुमारास्वामी सरकार से 15 विधायकों ने इस्तीफा दे दिया था जिससे कांग्रेस-जेडीएस गठबंधन की सरकार अल्पमत में आ गई है. हालांकि स्पीकर रमेश कुमार ने इन विधायकों का इस्तीफा स्वीकार नहीं किया था. जिसके बाद विधायकों ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया.

कर्नाटक मसले को लेकर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई शुरू हो गई है. सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने मुकुल रोहतगी से विधायकों के इस्तीफे की तारीख पूछी. इसके अलावा उन्हें अयोग्य करार दिए जाने की तारीख भी पूछी. जिसके जवाब में मुकुल रोहतगी ने कहा कि 10 जुलाई को 10 विधायकों ने इस्तीफा दिया, वहीं सिर्फ दो विधायकों का अयोग्य करार दिया जाना 11 फरवरी से पेंडिंग है. इसके अलावा सीजेआई ने बाकी पांच विधायकों के बारे में पूछा, जिसके जवाब में मुकुल रोहतगी ने बताया कि वे सभी भी इस्तीफा दे चुके हैं. बागी विधायकों की तरफ से मुकुल रोहतगी ने कहा कि अगर व्यक्ति विधायक नहीं रहना चाहता है, तो कोई उन्हें फोर्स नहीं कर सकता है. विधायकों ने इस्तीफा देने का फैसला किया और वापस जनता के बीच जाने की ठानी है. इन्हें अयोग्य करार दिया जाना इस इच्छा के खिलाफ होगा.

 

विधायकों की तरफ से दलील दे रहे मुकुल रोहतगी ने कहा- स्पीकर एक साथ इस्तीफा और अयोग्यता के मुद्दे को निपटाना चाह रहे हैंं. यह विधायकों के इस्तीफे को बाधित करने का प्रयास है. सुनवाई के दौरान मुकुल रोहतगी ने कहा कि जिन विधायकों ने याचिका डाली है अगर उनकी मांग पूरी होती है तो कर्नाटक की सरकार गिर जाएगी. स्पीकर जबरन इस्तीफा नहीं रोक सकते हैं. इसी दौरान चीफ जस्टिस ने मुकुल रोहतगी से अयोग्य करार दिए जाने के नियमों के बारे में पूछा. 

विधायकों की तरफ से मुकुल रोहतगी ने कहा कि अदालत कर्नाटक के स्पीकर रमेश कुमार को आदेश दे कि वो विधायकों के इस्तीफे स्वीकार करें. इस पर सुप्रीम कोर्ट में मामले की सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस ने कहा कि हम कैसे तय करें कि स्पीकर क्या फैसला लेगा. सीजेआई ने हा कि स्पीकर पहले किस पर फैसला दे इस पर विचार जारी है. चीफ जस्टिस ने इस दौरान कहा कि हम ये तय नहीं करेंगे कि विधानसभा स्पीकर को क्या करना चाहिए, यानी उन्हें इस्तीफा स्वीकार करना चाहिए या नहीं. हालांकि, हम सिर्फ ये देख सकते हैं कि क्या संवैधानिक रूप से स्पीकर पहले किस मुद्दे पर निर्णय कर सकता है. CJI ने कहा कि कोर्ट ये तय नहीं करेगा कि स्पीकर को क्या करना है. 

जब CJI ने मुकुल रोहतगी से पूछा- बताओं क्या ऑर्डर दें
बागी विधायकों की तरफ से मुकुल रोहतगी ने कहा कि विधायक कोई ब्यूरोक्रेट या कोई नौकरशाह नहीं हैं, जो कि इस्तीफा देने के लिए उन्होंने कोई कारण बताना पड़े. इसपर चीफ जस्टिस ने कहा कि अगर हम आपकी बात मानें, तो क्या हम स्पीकर को कोई ऑर्डर दे सकते हैं? आप ही बताएं कि ऐसे में क्या ऑर्डर हम दे सकते हैं? मुकुल रोहतगी ने इस दौरान मध्य प्रदेश, कर्नाटक और गोवा के उदाहरण भी पेश किए.

CJI ने अभिषेक मनु सिंघवी से पूछा, स्पीकर क्यों नहीं आए
मुकुल रोहतगी के बाद अभिषेक मनु सिंघवी ने स्पीकर की तरफ से पैरवी की. उन्होंने कहा कि जब अयोग्य होने पर सुनवाई जारी है तो विधायक इस्तीफा कैसे दे सकते हैं. इस दौरान CJI ने स्पीकर के उपलब्ध ना होने पर कहा. जिसपर अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि स्पीकर ने पहले ही कह दिया था कि उनसे मुलाकात का समय नहीं मांगा गया था.

कर्नाटक के मुख्यमंत्री एचडी कुमारास्वामी की तरफ से पैरवी कर रहे  हैं राजीव धवन
कर्नाटक के मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी की तरफ से पैरवी कर रहे वरिष्ठ वकील राजीव धवन ने अदालत में कहा कि स्पीकर बाध्य है कि वह इस्तीफे के पीछे की मंशा की जांच करे. स्पीकर को आंखें मूंदकर नहीं बैठना चाहिए जब 11 लोगों को टारगेट बना कर सरकार के खिलाफ तोड़ फोड़ की साजिश रची जा रही हो.
उन्होंने कहा कि इन इस्तीफों की मंशा और नतीजा क्या होगा- क्या आप अगली सरकार में मंत्री बनने नही जा रहे? इस मामले में कोर्ट का कोई न्यायाधिकार नहीं है. उन्होंने कहा कि ये स्पीकर बनाम कोर्ट का मामला नहीं है ये तो CM बनाम सीएम बनने की मंशा वाले व्यक्ति का मामला है. कोर्ट को ये मामला सुनना ही नहीं चाहिए. राजीव धवन ने कहा कि पहले इस्तीफे पर फैसला हो या अयोग्यता पर, ये तो ऐसा ही है कि पहले मुर्गी आई या अंडा? क्या संविधान में ये दिया गया है कि पहले किस पर फैसला हो?

क्या है कर्नाटक का नाटक
बता दें कि 6 जुलाई को कर्नाटक की कुमारास्वामी सरकार तब अचानक संकट में आ गई जब जेडीएस-कांग्रेस के सत्ताधारी गठबंधन से एक के बाद एक करते हुए 10 विधायकों ने अपना इस्तीफा दे दिया. इसके बाद ये विधायक मुंबई के एक होटल में चले गए. इन 10 विधायकों के बाद पांच अन्य विधायकों ने भी अपना इस्तीफा दे दिया. हालांकि स्पीकर रमेश कुमार ने विधायकों का इस्तीफा स्वीकार नहीं किया. कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने इस्तीफे के विवाद के बाद कहा था कि इन सभी विधायकों को अयोग्य ठहराने की कार्रवाई की जाएगी. स्पीकर रमेश कुमार ने इस बीच कहा कि वो ग्रुप में मिले इस्तीफे स्वीकार नहीं करेंगे. इसके बाद बागी विधायको ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की. सुप्रीम कोर्ट में पिछली बार स्पीकर की तरफ से दलील पेश करते हुए अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा था कि सुप्रीम कोर्ट, स्पीकर के निर्णय प्रक्रिया में दखल नहीं दे सकती. बता दें कि कर्नाटक विधानसभा में 18 जुलाई को फ्लोर टेस्ट होगा. गुरुवार को ही फैसला होगा कि कर्नाटक में कुमारास्वामी मुख्यमंत्री बने रहेंगे या वहां बीजेपी सत्ता कब्जाने जा रही है.

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