नई दिल्ली। चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर ने ऐलान कर दिया है कि अब वो अपनी अलग पार्टी बनाकर नई राजनीतिक पारी की शुरूआत करेंगे. इस बात की जानकारी उन्होंने ट्वीट कर दी है. किशोर ने अपने ट्वीट में लिखा कि अब मुद्दों और ‘जन सुराज’ के रास्ते को बेहतर ढंग से परखने के लिए रियल मास्टर्स यानी जनता के पास जाने का वक्त आ गया है।

आइए जानते है अपनी चुनावी रणनीति से बड़े-बड़े दिग्गजों को जीत दिलाने वाले प्रशांत किशोर कौन है और उनकी राजनीति में इंट्री कैसी हुई ?

बिहार में हुआ जन्म

प्रशांत किशोर का जन्म बिहार के रोहतास जिले के कोनार गांव में 1977 में हुआ. प्रशांत के जन्म के कुछ समय बाद उनके माता पिता बिहार के बक्सर चले गए. उनके पिता का नाम श्रीकांत पांडे है और वो पेशे से बिहार सरकार में डॉक्टर हैं. प्रशांत की मां उत्तर प्रदेश के बलिया जिले की रहने वाली हैं. प्रशांत की पत्नी का नाम जाह्नवी दास है और वह असम राज्य की राजधानी गुवाहाटी में डॉक्टर हैं।

बिहार में शुरूआती शिक्षा, हैदराबाद में इंजीनियरिंग

रोहतास जिले के कोनार गांव से बक्सर शिफ्ट होने के बाद प्रशांत की शुरूआती पढ़ाई बक्सर के एक स्कूल में हुई. इसके बाद वो हैदराबाद चले गए. जहां पर उन्होंने इंजीनियरिंग की पढ़ाई की।

संयुक्त राष्ट्र में किया काम

प्रशांत किशोर ने पब्लिक हेल्थ में पोस्ट ग्रेजुएशन पूरा करने के बाद ट्रेंड पब्लिक हेल्थ एक्सपर्ट के रूप में संयुक्त राष्ट्र में काम शुरू किया. आंध्र प्रदेश में उनकी पहली पोस्टिंग हुई. जिसके बाद उनका ट्रांसफर बिहार मे हो गया. जहां पर उन्होंने पोलियो उन्मूलन कार्यक्रम में कार्य किया. दो साल बाद उन्हें फिर भारत में स्थित संयुक्त राष्ट्र में बुला लिया गया और इसके दो साल बाद उन्हें अमेरिका में स्थित संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में बुलाया गया।

ऐसे हुई राजनीति में एंट्री

प्रशांत किशोर को संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में करने के दौरान डिवीजन हेड के रूप में अफ्रीकी देश चाड भेजा गया. जहां पर उन्होंने 4 साल तक काम किया .इसके बाद वो एक रिसर्च पेपर भारत के समृद्ध उच्च विकास वाले राज्यों में कुपोषण पर लिखते है. जिसमें गुजरात, महाराष्ट्र, हरियाणा और कर्नाटक राज्यों में कुपोषण की स्थिति का जिक्र था. सभी राज्यों में सबसे नीचे गुजरात था. जिसे पढ़कर गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रशांत किशोर को फोन किया और उन्हें गुजरात आने का न्योता दिया।

2014 में नरेंद्र मोदी के लिया काम

संयुक्त राष्ट्र का काम छोड़ने के बाद प्रशांत किशोर ने 2013 में सिटीजन फॉर एकाउंटेबल गवर्नेंस शुरुआत की. जिसमें बाद में वो सहयोग करने वाले राजनीतिक दलों को चुनावी रणनीति प्रदान करने का काम करने लगे. उन्होंने पहले गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ गुजरात विधानसभा चुनाव 2012 और लोकसभा चुनाव 2014 में काम किया.। इसके बाद उन्होंने बीजेपी के लिए चुनावी रणनीति बनाना छोड़ दिया।

2015 में नीतीश कुमार से जुड़े

बीजेपी से अलग होने के बाद में प्रशांत किशोर ने 2015 में सिटिजन्स फॉर एकाउंटेबल गवर्नेंस को इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी में बदल दिया गया. जिसे अब I-PAC के रूप में देश में जाना जाता है. प्रशांत ने इसके बाद 2015 के बिहार विधानसभा चुनाव में नीतीश कुमार की सहायता की और बाद में वो जदयू के सदस्य भी बन गए. पार्टी में उन्हें उपाध्यक्ष का पद मिला. लेकिन कुछ समय बाद ही उन्होंने नीतीश कुमार का भी साथ छोड़ दिया।

2017 में कैप्टन अमरिंदर सिंह से जुड़े

प्रशांत किशोर ने जदयू का साथ छोड़ने का बाद 2017 के पंजाब विधानसभा चुनाव में कैप्टन अमरिंदर सिंह की मदद की. प्रशांत की रणनीतियों की वजह से कांग्रेस ने राज्य में 117 में से 77 सीट हासिल की जिसके बाद उनकी देश भर में चर्चा हुई।

इसके बाद प्रशांत किशोर ने उन्होंने तृणमूल कांग्रेस, वाईएसआर कांग्रेस, और आम आदमी पार्टी समेत कई राजनीतिक दलों को चुनाव जिताने में मदद की।

 

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