नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट में कर्नाटक विधानसभा से इस्तीफा दे चुके 10 बागी विधायकों के मामले पर फैसला आ गया है. बागी विधायकों को बड़ी राहत देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने स्पीकर को कहा कि वे अपने फैसले पर विचार करें.  सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि विधायकों को बाध्य न किया जाए. अदालत ने स्पीकर को निर्देश दिया कि वो 15 विधायकों के इस्तीफे पर विचार करें. सुप्रीम कोर्ट ने अपनी टिप्पणी में कहा कि इस मामले में संवैधानिक बैलेंस जरूरी है. स्पीकर रमेश कुमार पर टिप्पणी करते हुए शीर्ष कोर्ट ने कहा कि स्पीकर को एक तय समय सीमा में फैसला लेने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता. हमें संविधान का संतुलन भी देखना है.

बता दें कि गत 6 जुलाई को कर्नाटक की कुमारस्वामी सरकार से 10 विधायकों ने इस्तीफा दे दिया था. इसके बाद 5 अन्य विधायकों ने भी इस्तीफा दे दिया. हालांकि कर्नाटक विधानसभा के स्पीकर रमेश कुमार ने अभी तक इस्तीफा स्वीकार नहीं किया है. वहीं इन विधायकों को अयोग्य ठहराने की कार्रवाई का भी जिक्र हुआ. इस बीच कई दिनों तक मुंबई के एक होटल में रहे इन विधायकों को सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया था कि वो स्पीकर के सामने पेश होकर अपना इस्तीफा सौंपे. बता दें कि कर्नाटक की कुमारस्वामी सरकार अब अल्पमत में आ चुकी है. गुरूवार को कर्नाटक विधानसभा में फ्लोर टेस्ट होगा जहां एचडी कुमारस्वामी कर्नाटक के मुख्यमंत्री रहेंगे या नहीं इस पर फैसला हो जाएगा.

फैसले के बाद कांग्रेस नेताओं के साथ की सीएम एचडी कुमारास्वामी ने बैठक

कर्नाटक सरकार के मंत्री डीके शिवकुमार ने कहा- सुप्रीम कोर्ट का फैसला ऐतिहासिक है. इससे लोकतांत्रिक प्रक्रिया मजबूत होगी. बीजेपी के कुछ मित्र यह भ्रम फैला रहे हैं कि पार्टी व्हिप नहीं जारी कर सकती. जबकि ऐसा नहीं है. पार्टी व्हिप भी जारी कर सकती है और एंटी डिफेक्शन लॉ के तहत कार्रवाई भी कर सकती है.

बागी विधायकों ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर जताई खुशी– कर्नाटक के 10 बागी विधायकों की याचिका पर सु्प्रीम कोर्ट ने आज फैसला सुनाया. विधायकों ने कहा कि हम सुप्रीम कोर्ट के निर्णय का सम्मान करते हैं. हम अपने फैसले पर अडिग हैं. कल के फ्लोर टेस्ट में जाने का सवाल ही नहीं उठता. बता दें कि ये सभी बागी विधायक अभी भी मुंबई में जमे हुए हैं.

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सुप्रीम कोर्ट ने कहा- गुरूवार को होने वाले कर्नाटक विधानसभा के फ्लोर टेस्ट में विधायकों को जाने को बाध्य नहीं किया जा सकता

विधायकों की तरफ से दलील दे रहे मुकुल रोहतगी ने कहा- स्पीकर एक साथ इस्तीफा और अयोग्यता के मुद्दे को निपटाना चाह रहे हैंं. यह विधायकों के इस्तीफे को बाधित करने का प्रयास है. सुनवाई के दौरान मुकुल रोहतगी ने कहा कि जिन विधायकों ने याचिका डाली है अगर उनकी मांग पूरी होती है तो कर्नाटक की सरकार गिर जाएगी. स्पीकर जबरन इस्तीफा नहीं रोक सकते हैं. इसी दौरान चीफ जस्टिस ने मुकुल रोहतगी से अयोग्य करार दिए जाने के नियमों के बारे में पूछा.

विधायकों की तरफ से मुकुल रोहतगी ने कहा कि अदालत कर्नाटक के स्पीकर रमेश कुमार को आदेश दे कि वो विधायकों के इस्तीफे स्वीकार करें. इस पर सुप्रीम कोर्ट में मामले की सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस ने कहा कि हम कैसे तय करें कि स्पीकर क्या फैसला लेगा. सीजेआई ने हा कि स्पीकर पहले किस पर फैसला दे इस पर विचार जारी है. चीफ जस्टिस ने इस दौरान कहा कि हम ये तय नहीं करेंगे कि विधानसभा स्पीकर को क्या करना चाहिए, यानी उन्हें इस्तीफा स्वीकार करना चाहिए या नहीं. हालांकि, हम सिर्फ ये देख सकते हैं कि क्या संवैधानिक रूप से स्पीकर पहले किस मुद्दे पर निर्णय कर सकता है. CJI ने कहा कि कोर्ट ये तय नहीं करेगा कि स्पीकर को क्या करना है.

जब CJI ने मुकुल रोहतगी से पूछा- बताओं क्या ऑर्डर दें
बागी विधायकों की तरफ से मुकुल रोहतगी ने कहा कि विधायक कोई ब्यूरोक्रेट या कोई नौकरशाह नहीं हैं, जो कि इस्तीफा देने के लिए उन्होंने कोई कारण बताना पड़े. इसपर चीफ जस्टिस ने कहा कि अगर हम आपकी बात मानें, तो क्या हम स्पीकर को कोई ऑर्डर दे सकते हैं? आप ही बताएं कि ऐसे में क्या ऑर्डर हम दे सकते हैं? मुकुल रोहतगी ने इस दौरान मध्य प्रदेश, कर्नाटक और गोवा के उदाहरण भी पेश किए.

CJI ने अभिषेक मनु सिंघवी से पूछा, स्पीकर क्यों नहीं आए
मुकुल रोहतगी के बाद अभिषेक मनु सिंघवी ने स्पीकर की तरफ से पैरवी की. उन्होंने कहा कि जब अयोग्य होने पर सुनवाई जारी है तो विधायक इस्तीफा कैसे दे सकते हैं. इस दौरान CJI ने स्पीकर के उपलब्ध ना होने पर कहा. जिसपर अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि स्पीकर ने पहले ही कह दिया था कि उनसे मुलाकात का समय नहीं मांगा गया था.

कर्नाटक के मुख्यमंत्री एचडी कुमारास्वामी की तरफ से पैरवी कर रहे हैं राजीव धवन
कर्नाटक के मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी की तरफ से पैरवी कर रहे वरिष्ठ वकील राजीव धवन ने अदालत में कहा कि स्पीकर बाध्य है कि वह इस्तीफे के पीछे की मंशा की जांच करे. स्पीकर को आंखें मूंदकर नहीं बैठना चाहिए जब 11 लोगों को टारगेट बना कर सरकार के खिलाफ तोड़ फोड़ की साजिश रची जा रही हो.
उन्होंने कहा कि इन इस्तीफों की मंशा और नतीजा क्या होगा- क्या आप अगली सरकार में मंत्री बनने नही जा रहे? इस मामले में कोर्ट का कोई न्यायाधिकार नहीं है. उन्होंने कहा कि ये स्पीकर बनाम कोर्ट का मामला नहीं है ये तो CM बनाम सीएम बनने की मंशा वाले व्यक्ति का मामला है. कोर्ट को ये मामला सुनना ही नहीं चाहिए. राजीव धवन ने कहा कि पहले इस्तीफे पर फैसला हो या अयोग्यता पर, ये तो ऐसा ही है कि पहले मुर्गी आई या अंडा? क्या संविधान में ये दिया गया है कि पहले किस पर फैसला हो?

क्या है कर्नाटक का नाटक
बता दें कि 6 जुलाई को कर्नाटक की कुमारास्वामी सरकार तब अचानक संकट में आ गई जब जेडीएस-कांग्रेस के सत्ताधारी गठबंधन से एक के बाद एक करते हुए 10 विधायकों ने अपना इस्तीफा दे दिया. इसके बाद ये विधायक मुंबई के एक होटल में चले गए. इन 10 विधायकों के बाद पांच अन्य विधायकों ने भी अपना इस्तीफा दे दिया. हालांकि स्पीकर रमेश कुमार ने विधायकों का इस्तीफा स्वीकार नहीं किया. कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने इस्तीफे के विवाद के बाद कहा था कि इन सभी विधायकों को अयोग्य ठहराने की कार्रवाई की जाएगी. स्पीकर रमेश कुमार ने इस बीच कहा कि वो ग्रुप में मिले इस्तीफे स्वीकार नहीं करेंगे. इसके बाद बागी विधायको ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की. सुप्रीम कोर्ट में पिछली बार स्पीकर की तरफ से दलील पेश करते हुए अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा था कि सुप्रीम कोर्ट, स्पीकर के निर्णय प्रक्रिया में दखल नहीं दे सकती. बता दें कि कर्नाटक विधानसभा में 18 जुलाई को फ्लोर टेस्ट होगा. गुरुवार को ही फैसला होगा कि कर्नाटक में कुमारास्वामी मुख्यमंत्री बने रहेंगे या वहां बीजेपी सत्ता कब्जाने जा रही है.

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