लखनऊ. यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री और राजस्थान के पूर्व राज्यपाल कल्याण सिंह का शनिवार रात को निधन हो गया। वो 89 साल के थे और काफी वक्त से बीमार चल रहे थे।रविवार को लखनऊ स्थित उनके आवास पर उनका पार्थिव शरीर अंतिम दर्शन के लिए रखा गया था। उनके शव को तिरंगे को लपेटा गया था, लेकिन बाद में उनके पैर की ओर बीजेपी का झंडा रख दिया गया। जिसके बाद से विवाद शुरू हो गया है।

तिरंगे के ऊपर बीजेपी का झंडा रखने पर विपक्ष ने इसे ‘तिरंगे का अपमान’ बताया। तृणमूल सांसद सुखेंदु शेखर रॉय ने ट्वीट किया, ‘राष्ट्रीय ध्वज का अपमान करना क्या मातृभूमि का सम्मान करने का नया तरीका है?’ वहीं, यूथ कांग्रेस के अध्यक्ष बीवी श्रीनिवास ने तस्वीर साझा करते हुए पूछा है कि ‘क्या भारत के झंडे से ऊपर किसी पार्टी का झंडा रखना ठीक है?’

भारतीय झंडा संहिता 2002 के अनुसार, तिरंगे का इस्तेमाल आम लोगों के अंतिम संस्कार के लिए नहीं किया जा सकता। तिरंगे का इस्तेमाल सिर्फ उन लोगों के अंतिम संस्कार के लिए ही किया जा सकता है, जिन्हें राष्ट्रीय सम्मान दिया जा रहा हो। जैसे- एक शहीद के अंतिम संस्कार में या फिर किसी राजनेता के अंतिम संस्कार में।

क्या कहते हैं जानकार

संविधान और कानून के जानकार वकील विष्णु शंकर जैन बताते हैं कि ध्वज संहिता के पांचवें प्रावधान में सम्मानित हस्ती और शहीद सैनिकों के पार्थिव शरीर पर राष्ट्र ध्वज लपेटने की बात कही गई है। लेकिन उस समय तिरंगे के ऊपर क्या हो या न हो इसका कोई जिक्र नहीं है। उन्होंने बताया कि राष्ट्र ध्वज संहिता के नियम 2.2 के आठवें प्रावधान में ये जरूर कहा गया है कि ध्वज फहराते हुए ध्वजदंड पर तिरंगे के ऊपर या बराबर कोई और ध्वजा, पताका या फूल माला नहीं होनी चाहिए।

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