नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस रंजन गोगोई ने कहा है कि निष्पक्ष जज और शोर मचाने वाले पत्रकार लोकतंत्र की रक्षा के पहले सिपाही हैं. उन्होंने कहा कि जब भी लोकतंत्र की हत्या जैसा कुछ छपता है तो उन्हें ये शब्द बड़ा ही अतिश्योक्तिपूर्ण लगता है. लेकिन सरकार कम से कम बुरी व्यवस्था भी बुरी हालत में है जिसे बचाने के लिए संरक्षकों की जरूरत है.

उन्होंने आगे कहा कि  आज के संदर्भ में मैं मामूली सा संधोधन और सुझाव दूंगा और वो ये कि आज ना केवल स्वतंत्र न्यायधीशों और शोर मचाने वाले पत्रकारों की जरूरत है बल्कि स्वतंत्र पत्रकारों और शोर मचाने वाले न्यायधीशों की भी जरूरत है.

तीसरे रामनाथ गोयनका लेक्चर द विजन ऑफ जस्टिस के मुद्दे पर बोलते हुए जस्टिस गोगोई ने कहा कि भारत में दो तरह के लोग हैं पहले एक वो जो नए चलन में विश्वास करते है और दूसरे वो जो गरीबी रेखा के नीचे बुरी तरह गिरे हुए है. जो दिहाड़ी मजदूर हैं और छप्पर वाले घरों में रहते हैं. वहां शिक्षा नहीं पहुंची है ना ही चिकित्सा सुविधा है. 

गौरतलब है कि इस साल 12 जनवरी को जस्टिस गोगोई के अलावा पूर्व जस्टिस जे चेलेमेश्वर और जस्टिस मदन बी लोकुर और जस्टिस कुरियन जोसेफ ने अचानक प्रेस कॉन्फ्रेंस कर खलबली मचा दी थी. उन्होंने चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा पर केस देने में भेदभाव करने और कोर्ट की कार्यपालिका पर सवाल उठाए थे.

मामला इतना गंभीर हो गया था कि कानून मंत्रालय को बीच में दखल देना पड़ गया था. हालांकि बाद में चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा और जजों के बीच मामला आपस में ही सुलझा लिया गया था. लेकिन इतना जरूर है कि स्वतंत्र भारत के इतिहास में पहली बार ऐसा हो रहा था कि जजों को अपनी आवाज उठाने के लिए मीडिया के सामने आना पड़ा था.

पढ़ें- 

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से पूछा- क्यों न शादी के खर्च की जानकारी मैरिज अफसर को देना अनिवार्य किया जाए

Section 377 Supreme Court Hearing Day 3 Highlights: IPC धारा 377 पर सुप्रीम कोर्ट में तीसरे दिन की सुनवाई पूरी, 17 जुलाई मंगलवार को जारी रहेगी समलैंगिक बहस

 

देश और दुनिया की ताजातरीन खबरों के लिए हमे फॉलो करें फेसबुक,गूगल प्लस, ट्विटर पर और डाउनलोड करें Inkhabar Android Hindi News App