नई दिल्ली. देश में हर जगह दिल्ली जेएनयू के छात्र प्रदर्शन पर बात की जा रही है. यूनिवर्सिटी प्रशासन की ओर से बढ़ाई गई 300 प्रतिशत फीस छात्रों की नाराजगी का कारण है. हालांकि, सरकार ने हाल ही में कुछ चीजों पर शुल्क बढ़ाने के फैसले को वापस लिया लेकिन छात्र इससे खुश नहीं नजर आए. नाराज छात्रों ने जुलूस यात्रा निकालकर संसद घेरने की कोशिश लेकिन वहां पहुंचने से पहले ही दिल्ली पुलिस के जवानों ने उन्हें रोकने की कोशिश की.

इस दौरान छात्र और पुलिस के जवान आपस में भिड़ गए जिसके बाद मजबूरन दिल्ली पुलिस को लाठीचार्ज का सहारा लेना पड़ा. पुलिस लाठीचार्ज में कई छात्रों को चोट भी आई. कई छात्रों के फोटो सोशल मीडिया पर भी वायरल हो रहे हैं. एक ऐसा ही फोटो संदीप के लुईस नामक एक शख्स का वायरल हो रहा है जो प्रदर्शन के दौरान पुलिस के डंडों का शिकार हुआ.

फोटो में उसकी हालत बेहद खराब और करीब-करीब पूरा शरीर खून से लथपथ दिख रहा है. कोई भी आदमी इस फोटो को देखकर दुखी हो जाए. वायरल पोस्टों में बताया जा रहा है कि यह लड़का जेएनयू का छात्र है. लेकिन जब हमने इसके बारे में खंगालने की कोशिश की तो कुछ और ही सामने निकलकर आया और जैसा आया उसे जानकार आप भी चौंक जाएंगे.

संदीप नहीं है जेएनयू का वर्तमान छात्र, फीस बढ़ोतरी से कोई लेना-देना नहीं फिर भी विरोध में शामिल?

जेएनयू विरोध में पहुंचे फर्जी छात्र संदीप के लुईस फेसबुक चलाने के काफी शौकीन हैं और उनके इसी शौक से उनका काफी बड़ा खुलासा भी हो गया. और ये भी साफ हो गया कि ट्विटर पर ट्रेंडिंग हैशटैग के साथ चलने वाली खबर आपको कितना तक गुमराह कर सकती है.

सबसे पहले तो आप संदीप के फेसबुक अकाउंट का कवर फोटो देखकर ही चौंक जाएंगे. कवर फोटो पर कश्मीर का एक पत्थरबाज जम्मू कश्मीर पुलिस की गाड़ी पर चढ़कर उसे तोड़ने की कोशिश कर रहा है. भाई साहब का फोटो देखकर ही इनकी देश विरोधी विचारधारा नजर आती है. और सिर्फ एक ही नहीं, ना जाने कितने पोस्ट संदीप ने ऐसे किए हैं जिन्हें देखकर लगता है कि वे न मौजूदा सत्ता से खुश हैं और ना ही देश से.

 

संदीप की फेसबुक प्रोफाइल का कवर फोटो 

केरल का रहने वाला संदीप दिल्ली में रहता है और आर्ट म्यूजियम में रिसर्चर है

संदीप की फेसबुक से कुछ उसकी जीवन से जुड़ी जानकारी भी हाथ लगी. फेसबुक पर दी गई जानकारी की मानें तो वर्तमान में संदीप किरण नादर म्यूजियम ऑफ आर्ट्स में रिसर्चर का काम करता है. इससे पहले जेएनयू का छात्र भी रह चुका है. फेसबुक के हिसाब से संदीप मूलरूप से केरल के कोच्चि का निवासी है जो वर्तमान में दिल्ली में रहता है.

इसके अलावा संदीप अमेटी यूनिवर्सिटी में असिसटेंट प्रोफेसर, राजा रवि वर्मा सेंटर ऑफ एक्सीलेंस फॉर विजुअल आर्ट्स में लेक्चरर के पद पर कार्यरत रह चुका है. साथ ही संदीप कई जगहों पर गेस्ट लेक्चर भी बनकर जाता है. संदीप की फेसबुक देखकर साफ जाहिर होता है कि ये एक पढ़े लिखे बैकग्राउंड से आता है जो सरकार विरोधी कार्यों को अपनी जिम्मेदारी मान बैठा है.

 

संदीप के फेसबुक का दूसरा फोटो 

परेशानी संदीप से नहीं लेकिन जेएनयू के छात्रों में बाहरी भीड़ क्यों ?

देखिए परेशानी संदीप से नहीं है लेकिन यहां बस सवाल है कि जब प्रदर्शन जेएनयू के छात्रों का है और अब संदीप का वहां से कोई लेना-देना नहीं तो आखिर उनका इस विरोध प्रदर्शन में शामिल होना क्यों जायज माना जाए. आखिर एक यूनिवर्सिटी के बच्चों की मदद के लिए बाहरी भीड़ क्यों बुलाई जा रही है. सवाल तो ये भी है कि जो हाल ही में छात्रों और पुलिस के बीच हिंसा हुई उसमें भी यही बाहरी लोग तो पूरी तरह शामिल नहीं हैं.

क्या ये छात्रों की भीड़ में शामिल होने वाले लोग वो नहीं हैं जो इस बहाने अपना राजनीतिक बदला लेना चाहते हैं. राजनीतिक बदला लेने वालों के लिए छात्रों के प्रदर्शन नहीं बने हैं लेकिन अगर ऐसा हो रहा है तो  आखिर क्यों सवाल न उठाए जाएं और पुलिस की लाठी को क्यों न सही बताया जाए.?

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