नई दिल्ली. इन दिनों सवर्ण संगठनों में खलबली मची हुई है. एससी-एसटी एक्ट में गिरफ्तारी के नियमों में बदलाव का सुप्रीम कोर्ट का जो फैसला आया था, उससे ऐसे सभी संगठनों के सोशल मीडिया ग्रुप्स में काफी खुशी का माहौल था. लेकिन जब अपनी सहयोगी और विपक्षी पार्टियों को दवाब में मोदी सरकार ने कानून बनाकर सुप्रीम कोर्ट का फैसला पलट दिया तो उनके लिए दिक्कत हो गई. मोदी सरकार और मोदी के परम भक्त भी इस मुद्दे पर खुलकर विरोध में आ गए. लेकिन सरकार और बाकी पार्टियों से भी निराश होकर अब वो एक नया रास्ता लेकर आए हैं और उनको लगता है ये उनका मास्टर स्ट्रोक साबित हो सकता है.

अगर आप ब्राह्मण एकता परिषद, क्षत्रिय महामंच या वैश्य एकता परिषद जैसे फेसबुक पेजों पर जाएंगे, जिनमें से ज्यादातर सीक्रेट या क्लोज्ड ग्रुप हैं तो आपको उनकी निराशा समझ आएगी. नोएडा में एक रिटायर्ड कर्नल को जिस तरह एक एडीएम ने एससी-एसटी एक्ट में फंसाने की कोशिश की खबरें आईं, उससे माहौल और गरम हो गया है. उनको मोदी सरकार से ये उम्मीद नहीं थी. लेकिन दलित संगठनों को पता था कि अगर सुप्रीम कोर्ट का आदेश एक बार मान लिया गया तो फिर कोई उसे चुनौती देने वाला नहीं. ऐसे में उन्होंने एनडीए की दलित पकड़ वाली पार्टियों पर दवाब बनाने और भारत बंद आव्हान जैसे तमाम उपाय आजमाने शुरू कर दिए.

नतीजा ये हुआ कि सरकार को कानून बनाकर सुप्रीम कोर्ट का फैसला पलटना पड़ गया. अब सवर्णों के सामने दिक्कत ये है कि आसानी से सवर्ण ना तो सड़क पर उतरता है और ना ही इस मुद्दे पर कोई राजनीतिक पार्टी उनकी आवाज उठाने वाली है. कोर्ट ही एक रास्ता था, जो सरकार ने कानून बनाकर बंद कर दिया. तो ऐसे में जिन सवर्णों को गलत तरीके से एससी-एसटी एक्ट में फंसाया जाता है, वो क्या करें? अब इसका एक ऐसा रास्ता सवर्णों ने निकाला है, जिस पर ना सरकार को कोई ऐतराज हो सकता है, ना ही दलित संगठनों को और कानूनी रूप से कोर्ट भी उस पर सवाल नहीं उठा सकती.

क्या है एससी-एसटी एक्ट से बचने का वो रास्ता, जिसे माना जा रहा है मास्टर स्ट्रोक? जानने के लिए देखिए ये वीडियो स्टोरी—

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