नई दिल्ली. 25 जून 1975 यानी आज से ठीक 44 साल पहले देश की प्रधानमंत्री रहीं इंदिरा गांधी ने आपातकाल लगाने की घोषणा कर दी. देश न तो गृह युद्ध से गुजर रहा था न ही किसी दुशमन देश से युद्ध लड़ रहा था लेकिन देश में इमरजेंसी की घोषणा हो गई. कारण सिर्फ एक था इंदिरा गांधी अपनी सत्ता हर कीमत पर बचाए रखना चाहती थीं. आपातकाल को भले ही 44 साल गुजर चुके हों लेकिन वर्तमान परिस्थितियों में भी हर राजनेता इसे अपने हिसाब से याद कर रहा है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह सहित पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सोशल मीडिया पर इमरजेंसी से जुड़े पोस्ट किए हैं. प्रधानमंत्री और गृहमंत्री जहां कांग्रेस पर हमलावर हैं वहीं ममता बनर्जी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यकाल की तुलना सुपर इमरजेंसी से कर दी है.

इमरजेंसी के खिलाफ संघर्ष करने वाले छात्र नेता जो जयप्रकाश नारायण की अगुवाई में राजनीति का ककहरा सीख रहे थे अब देश में अपनी राजनीतिक पारी के मुकाम पर पहुंच चुके हैं. जॉर्ज फर्नांडिस, लालू प्रसाद यादव, राम विलास पासवान,  नीतीश कुमार जैसे नेताओं ने इमरजेंसी के खिलाफ संघर्ष में ही राजनीति शुरू की. जॉर्ज फर्नांडिस की हथकड़ियों वाली तस्वीर ने उन्हें इमरजेंसी के खिलाफ विरोध का पोस्टर ब्वॉय बना दिया था.  इमरजेंसी सत्ता को किसी भी कीमत पर बनाए रखने के लिए लोकतांत्रिक मूल्यों की हत्या का उदाहरण है. इसलिए इमरजेंसी का जिक्र उस जरूरी सबक की तरह है जिसे याद रखना जरूरी है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक वीडियो ट्वीट कर इमरजेंसी की उस काली रात का जिक्र किया है. इस वीडियो में संसद में इमरजेंसी के खिलाफ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बोलते हुए दिख रहे हैं. 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इमरजेंसी की बरसी पर शेयर किया ये वीडियो

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मुखर विरोधी टीएमसी प्रमुख और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी इमरजेंसी पर ट्वीट किया है. उन्होंने लिखा , “देश में पिछले पांच साल से सुपर इमरजेंसी जैसे हालात हैं. हमें इतिहास से सीखना चाहिए और अपने लोकतांत्रिक संस्थाओं को बचाना चाहिए.”

देश के नवनियुक्त गृह मंत्री अमित शाह ने भी इमरजेंसी पर ट्वीट किया है. अमित शाह ने ट्विटर पर लिखा, “1975 में आज ही के दिन मात्र अपने राजनीतिक हितों के लिए देश के लोकतंत्र की हत्या की गई. देशवासियों से उनके मूलभूत अधिकार छीन लिए गए. अखबारों पर ताले लगा दिए गए. लाखों राष्ट्रभक्तों ने लोकतंत्र को दोबारा स्थापित करने के लिए अनेकों यातनाएं सहीं. मैं उन सभी सेनानियों को नमन करता हूं.”

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी ट्वीट कर इमरजेंसी के काले दिनों को याद किया है. राजनाथ सिंह ने ट्विटर पर लिखा, “25 जून 1975 को इमरजेंसी की घोषणा भारत की राजनीति के सबसे काले अध्यायों में से एक है.  इस दिन हम भारत के लोगों को संविधान की गरिमा और संस्थाओं को संप्रभुता का महत्व हमेशा याद रखना चाहिए.”

क्या हुआ था 25 जून 1975 को
25 जून 1975 की रात को देश में इमरजेंसी की घोषणा हो गई. जनता दहशत में आ चुकी थी, किसी को कुछ नहीं मालूम था कि आगे क्या होगा. सबकी निगाहें प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के अगले कदम पर टिकी थी. सुबह हुई और आखिरकार पीएम इंदिरा गांधी ने लोगों का सामना करने का फैसला किया. इंदिरा गांधी ने  ऑल इंडिया रेडियो पर देश के लोगों को संबोधित करते हुए कहा था ”इस शांति को हमें बनाए रखना है और हमको ये समझना है कि लोकतंत्र में भी हदें होती हैं जिनको पार नहीं कर सकते. इंदिरा गांधी ने आगे कहा ”मैं आपको विश्वास दिलाती हूं जो नेता गण गिरफ्तार हुए हैं, उनको सुविधाएं दी जा रही हैं और आराम से रखने की पूरी कोशिश की जा रही है.” कुछ रिपोर्ट्स में कहा जाता है कि आपातकाल लगाने के बाद इंदिरा गांधी रात तीन बजे तक अपने इस बयान की तैयारी की थी, साथ ही सुबह बयान से पहले इंदिरा गांधी ने पार्टी के कई बड़े नेताओं और अपने बेटे संजय गांधी के साथ बातचीत की थी. निजी सचिव के रूप में आर.के. धवन उस दौरान इंदिरा गांधी की आंख-कान हुआ करते थे.

Indira Gandhi Emergency Anniversary: इंदिरा गांधी की इमरजेंसी में 25 जून 1975 की वो काली रात जब लोकतंत्र सस्पेंड था, देश दहशत में था और विपक्षी नेता जेल में कैद थे

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