नई दिल्ली. भारत सरकार के गृह मंत्री अमित शाह राज्यसभा में नागरिकता संशोधन बिल पेश कर रहे हैं. लोकसभा में इस बिल के पारित होने के बाद पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने सोशल मीडिया पर खूब जहर उगला. उन्होंने कहा कि यह आरएसएस की हिंदू राष्ट्र की संकल्पना को साकार करने के लिए किया जा रहा है. इमरान खान ने भारत के मुसलमानों की झूठी चिंता जताते हुए इस बिल को अल्पसंख्यकों के खिलाफ बताया. जबकि ऐतिहासिक तथ्य यह है कि अल्पसंख्यकों का सबसे अधिक शोषण अगर कहीं हुआ है तो वह पाकिस्तान में हुआ है. इमरान खान लगातार झूठ बोल रहे हैं. हम उनके झूठ को तथ्यों से सिलसिलेवार तरीके से बेनकाब करने जा रहे हैं. 

पाकिस्तान में हिंदू: मोहम्मद अली जिन्ना के फर्जी सेकुलरिज्म का जवाब
पाकिस्तान बनने के बाद मोहम्मद अली जिन्ना ने कहा कि इस देश में जिसे मंदिर जाना है वो मंदिर जाए, जिसे मस्जिद जाना है वो मस्जिद जाए. इस मुल्क में सबको अपने मजहब को मानने का हक है. मोहम्मद अली जिन्ना कभी एक परंपरावादी मुस्लिम नहीं थे. पाकिस्तान बनने के बाद वो दोबारा सेकुलरिज्म की दुहाई देने लगे. पाकिस्तान में हिंदू आबादी साल 1901 में 40 फीसदी थी. जब भारत और पाकिस्तान का बंटवारा हो गया तब भी पाकिस्तान में लगभग 35 फीसदी हिंदू रह रहे थे.

1951 में पाकिस्तान में 32 फीसदी हिंदू बचे. अगले 10 सालों में दस फीसदी हिंदू कम हो गए. 1961 में पाकिस्तान में 21 फीसदी हिंदू बचे. 1991 आते आते पाकिस्तान में हिंदू घटकर 14 फीसदी रह गए. इसके बाद पाकिस्तान में हिंदू लगातार कम होते गए. 2001 में पाकिस्तान में 5 फीसदी हिंदू बचे. आखिरकार 2011 में पाकिस्तान में मात्र 2.57 फीसदी हिंदू बचे. यान मात्र 60 सालों में पाकिस्तान में 29 फीसदी हिंदू गायब हो गए. यह है पाकिस्तान का सेकुलरिज्म. यह है मोहम्मद अली जिन्ना के झूठ का सबूत

2 नेशन थ्योरी की असफलता का जीता जागता दस्तावेज है बांग्लादेश
साल 1901 में पाकिस्तान में 33 फीसदी हिंदू रहते थे. 1941 में यहीं हिंदू घटकर 28 फीसदी रह गए थे. बांग्लादेश विभाजन के बाद पाकिस्तान का हिस्सा बन गया. 1951 में बांग्लादेश में 22 फीसदी हिंदू बचे. अगले दस सालों में चार फीसदी हिंदू कम हो गए. 1971 में बांग्लादेश पाकिस्तान से अलग होकर एक नए देश के रूप में अस्तित्व में आया. मुस्लिम बहुल बांग्लादेश मुस्लिम बहुल पाकिस्तान से भाषा और संस्कृति के नाम पर अलग हो गया.

टू नेशन थ्योरी की असफलता का जीता जागता दस्तावेज है बांग्लादेश. 1974 में बांग्लादेश में 13 फीसदी हिंदू रहते थे. आखिरी जनगणना 2011 में हुई जिसमें बांग्लादेश में 9 फीसदी हिंदू बचे हुए हैं. पाकिस्तान के मुकाबले बांग्लादेश में हिंदू आबादी उस तरह से विलुप्तप्राय तो नहीं हुई लेकिन उनकी आबादी लगातार कम होती गई. भारत और नेपाल के बाद बांग्लादेश हिंदू आबादी वाला तीसरा सबसे बड़ा देश है.

अब भारत में मुस्लिम आबादी का हाल भी जानिए
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने 14 अगस्त को पाकिस्तान की आजादी का दिन भी राजनीति का अखाड़ा बना दिया है. मोहम्मद अली जिन्ना के टू नेशन थ्योरी की वकालत करते हुए इमरान खान ने कहा कि भारत में मुस्लिमों के ऊपर अत्याचार होते हैं. इससे हमारे पूर्वजों की टू नेशन थ्योरी सही साबित होती है.

इमरान खान के दावे की पड़ताल भी कर लेते हैं. भारत में आजादी के बाद 1951 की जनगणना के अनुसार लगभग 10 फीसदी मुस्लिम भारत में रह रहे थे. हर दशक में इसमें लगभग एक फीसदी का इजाफा हुआ. 1991 में भारत में मुस्लिमों का प्रतिशत 12.12 पहुंच गया. वहीं 2011 के जनगणना के मुताबिक भारत में लगभग 15 फीसदी मुस्लिम रहते हैं. मुस्लिम आबादी के लिहाज से भारत, पाकिस्तान से बड़ा देश है.

यानी भारत में पाकिस्तान से अधिक मुस्लिम रहते हैं. भारत में मुस्लिम आबादी आजादी के बाद लगातार बढ़ी है, कम नहीं हुई है. यहां से पलायन कर मुस्लिम किसी दूसरे देश में शरण लेने नहीं गए. आजादी के बाद हर दशक में लगभग एक से डेढ़ फीसदी मुस्लिम आबादी में बढ़ोत्तरी होती रही. इमरान खान जिनके यहां हिंदू 40 फीसदी से 2 फीसदी हो गए वो भारत को ज्ञान दे रहे हैं अल्पसंख्यकों के साथ कैसे व्यवहार करना चाहिए. इमरान खान या तो नासमझ हैं या बहुत शातिर जो तथ्य छुपाकर लोगों को धर्मांधता में धकेलना चाहते हैं.

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