नई दिल्ली. एक ओर थाईलैंड की मौत की गुफा में फंसे फुटबॉल खिलाड़ियों के रेस्क्यू ऑपरेशन पर पूरी दुनिया की नजरें टिकी हुई हैं तो वहीं दूसरी ओर एक भारतीय इंजीनियर का दावा है कि इस ऑपरेशन को खत्म करने में मात्र पांच दिन का समय लगेगा. फिलहाल काफी दिनों की मशक्कत के बाद इस गुफा से 4 बच्चों को बाहर निकाल लिया गया है लेकिन अभी भी 8 बच्चे गुफा में फंसे हुए हैं.

इस इंजीनियर का नाम है जसवंत सिंह गिल और ये पंजाब के अमृतसर के रहने वाले हैं. ये वही शख्स हैं जिन्होंने साल 1989 में पश्चिम बंगाल के रानीगंज की कोयले की खान से 65 मजदूरों को सुरक्षित बाहर निकाला था. इन मजदूरों को निकालने के लिए इन्होंने कैप्सूल तकनीक का सहारा लिया था. लेकिन थाईलैंड की गुफा में फंसे बच्चों के मामले को लेकर इनका कहना है कि वहां पर कैप्सूल तकनीक काम नहीं कर पाएगी.

जागरण में छपी खबर के मुताबिक उन्होंने कहा कि वहां पर सेल कंटेट ब्रीडिंग ऑपरेटर तकनीक के सहारे से इन बच्चों के पास पहुंचा जा सकता है. उन्होंने बताया कि रेस्क्यू ऑपरेशन में जुटे कर्मी एक विशेष इंस्ट्रूमेंट को अपने चेहरे पर लगाकर पानी में उतरें. इस उपकरण के माध्यम से उन्हें नाक के बजाए मुंह से सांस लेनी होगी. जब वो इन बच्चों तक पहुंच जाएं तो उन्हें ब्रीडिंग ऑपरेटर उपलब्ध कराए जाएं.

इसके बाद उन्हें कम पानी में लाकर एयर और वाटर टाइट लेवल का पता लगाया जाए. इसके सहारे बच्चों को सुरक्षित बाहर निकाला जा सकता है. उन्होंने आगे बताया कि इसके अलावा भी एक और रास्ता है जिसके सहारे से बच्चों को बाहर निकाला जा सकता है. उस दूसरे रास्ते का नाम है लाइफ लाइन जिसमें गुफा के दोनों तरफ रास्ता बनाया जाता है. इस रास्ते जरिए रेस्क्यू टीम इन बच्चों तक पहुंच सकती है. उन्होंने बताया कि रेस्क्यू ऑपरेशन पर जितना समय लगता है वो उतना ही कमजोर होता जाता है. मौतें होती है और सदस्यों का मनोबल भी गिर जाता है.

आपको बता दें कि इस रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान एक अधिकारी की ऑक्सीजन की कमी के कारण मौत हो चुकी है. ऐसे में जसवंत सिंह गिल ने कहा है कि थाईलैंड की सरकार उन्हें इजाजत दे तो वो 5 दिन में इस ऑपरेशन को पूरा कर सकते हैं. रानीगंज की कोयले की खान से मजदूरों को बचाने वाले जसवंत सिंह गिल को भारत सरकार ने सर्वोत्तम नागरिक बहादुरी सम्मान दिया है.

घटना के बारे में जानकारी देते हुए गिल ने बताया कि 104 फीट गहरी कोयले की खान में सैकड़ों मजदूर पानी के रिसाव के कारण फंस गए थे. इसके बाद कुछ मजदूरों को ट्रॉली के माध्यम से बाहर निकाल लिया गया था लेकिन 65 मजदूर अंदर ही फंसे रह गए थे. जिसके बाद एक रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया गया था जिसको गिल ने हेड किया था और कैप्सूल तकनीक के सहारे फंसे मजदूरों को 10 घंटों की मशक्कत के बाद बाहर निकाल लिया गया था. इस ऑपरेशन को पूरा करने के लिए जसवंत सिंह खुद खान में उतरे थे.

थाईलैंड की गुफा में फंसे बच्चों के लिए सांसें पहुंचाने वाले की थम गईं सांस, मेजर गुनान बहुत याद आओगे

थाईलैंड की गुफा में फंसे बच्चों ने परिजनों को लिखे खत- ठीक हूं, पर हवाओं से डरता हूं मैं मां