नई दिल्ली.   भारत में भी ओमिक्रॉन ( Omicron ) का खतरा मंडरा रहा है, ऐसे में जीनोम वैज्ञानिकों ने 40 साल की उम्र से ऊपर वालों को बूस्टर डोज़ लगाने का सुझाव दिया है. वैज्ञानिकों का कहना है कि जिन्हें इस वैरिएंट से खतरा है सबसे पहले उन्हें ही वैक्सीन लगाई जानी चाहिए.

बूस्टर डोज़ पर क्या है वैज्ञानिकों का कहना

भारत में ओमिक्रॉन का खतरा मंडरा रहा है, सबसे पहले ओमिक्रॉन के मामले दक्षिण अफ्रीका में पाए गए थे, लेकिन अब ये वैरिएंट धीरे-धीरे विश्व के अनेक देशों में अपने पैर पसार रहा है. अब तक यह वैरिएंट विश्व के 33 देशों में फैल सकता है. ओमिक्रॉन की आहट भारत मे भी देखने को मिल रही है, इस कड़ी में केंद्र सरकार काफी सावधानी और सतर्कता बरतती हुई नजर आ रही है. ओमिक्रॉन के खतरे को देखते हुए कई देशों में कोरोना की बूस्टर डोज़ लगाई जा रही है.

इस बारे में पटना मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल के माइक्रो वायरोलॉजी विभाग के पूर्व HOD प्रोफेसर डॉ. सत्येंद्र सिंह ने बताते हैं कि जिन लोगों को कोरोना की सेकंड डोज़ 6-9 महीनें पहले लग चुकी है उन्हें बूस्टर डोज़ लगाई जा सकती है, क्योंकि 6 से 9 महीने में एंटीबॉडी फॉल पर होती है.

RT-PCR टेस्ट अनिवार्य

ओमिक्रॉन के बढ़ते कहर को देखते हुए अब ‘एट रिस्क’ की श्रेणी में आने वाले देशों से आने वाले यात्रियों को एयरपोर्ट पर RT-PCR टेस्ट अनिवार्यतः करवाना होगा. ऐसे में अब यात्रियों को 5-6 घन्टे एयरपोर्ट पर ही इंतज़ार करना पड़ सकता है. आरटी पीसीआर टेस्ट करने वाली कम्पनियों को 400-500 यात्रियों के कोरोना टेस्ट में कम से कम 1 घन्टे का समय लगेगा, जिसके बाद अगर जल्द से जल्द भी रिपोर्ट दी जाए तो रिपोर्ट आने में 6-7 घन्टे ला समय लगेगा. ऐसे में यात्रियों को एयरपोर्ट पर घण्टों इंतज़ार करना पड़ सकता है.

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