नई दिल्ली: अर्थव्यवस्था के लिहाज से भारत के लिए एक और बुरी खबर है. वर्ल्ड इकनॉमिक फोरम की सालाना रिपोर्ट में भारत 10 स्थान लुढ़कर 68वें पायदान पर पहुंच गया है. पिछले साल भारत 58वें स्थान पर था. सिंगापुर इस लिस्ट में सबसे ऊपर है और फिर अमेरिका और जापान हैं. चीन इस लिस्ट में 28वें नंबर पर है जो पिछली बार भी इसी स्थान पर था. आंकड़ों के लिहाज से वर्ल्ड इकनॉमिक फोरम ने वियतनाम, कजाकिस्तान और अजरबैजान जैसे देशों को भी भारत से ऊपर रैंकिंग दी है. इसके अलावा कोलंबिया, दक्षिण अफ्रीका और तुर्की भी रैंकिंग में भारत से आगे हैं.

वर्ल्ड इकॉनोमिक फोरम के मुताबिक भारत में आर्थिक सुधार की रफ्तार काफी धीमी है. रिपोर्ट में ये भी कहा गया है कि दुनिया भर में आर्थिक मंदी के लक्षण दिखाई दे रहे हैं जिनसे निपटना दुनिया की हर अर्थव्यवस्था के लिए चुनौती है. वर्ल्ड इकॉनोमिक फोरम की भारत को लेकर जो रिपोर्ट है उसके मुताबिक भारत में स्वास्थ्य व्यवस्था, मजदूरों की हालत और बैंकिंग सेवाओं की स्थिति की वजह से भारत की रैंकिंग गिरी है.

गौरतलब है कि पिछले दिनों सरकार ने जो जीडीपी के आंकड़े जारी किए थे उसके मुताबिक पिछली तिमाही में भारत की विकास दर 5.8 फीसदी से गिरकर 5 फीसदी पर आ गई थी. इंफ्रास्टक्चर, मैनुफैक्चरिंग और ऑटो सेक्टर में भयानक मंदी का दौर चल रहा है. हजारों लोगों की नौकरियां जा रही हैं. यही वजह है कि सरकार ने पिछले दिनों निवेश को बढ़ाने के लिए कॉर्पोरेट टैक्स को भी कम करने का एलान किया था लेकिन उसका कितना फायदा निवेश के क्षेत्र में होगा ये कह पाना मुश्किल है. जाहिर है निवेश के लिहाज से देखें तो वर्ल्ड इकनॉमिक फोरम की रिपोर्ट भारत के लिए अच्छी नहीं है क्योंकि हर बड़े निवेशक की नजर इस रिपोर्ट पर होती है. भारत की रैंकिंग गिरना आने वाले दिनों में और बड़ी मंदी की तरफ इशारा कर रहा है.

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