लद्दाख: सीमा विवाद को लेकर चीन अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहा है. चीन ने पीपल्स लिब्रेशन ऑर्मी की एक बटालियन को उत्तराखंड में लिपुलेख पास के नजदीक तैनात किया है. दरअसल ये लद्दाख सेक्टर के बाहर लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल पर मौजूद उन ठिकानों में से एक है जहां पिछले कुछ सप्ताह में चाइनीज सैनिकों की आवाजाही लगातार देखी जा रहा है. गौरतलब है कि मई में दोनों सेनाओं के बीच एलओसी पर तनाव और फिर हिंसक झड़प हुई थी जिसमें 20 भारतीय सैनिक शहीद हो गए. हालांकि इस झड़प में चीन के भी सैनिक हताहत हुए थे लेकिन चीनी सरकार ने आज तक इसका खुलासा नहीं किया कि उनके कितने सैनिक हताहत हुए हैं.

भारतीय राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और चीन के विदेश मंत्री वांग यी के बीच बातचीत के बाद दोनों देशों के सैनिकों को पीछे हटाकर तनाव कम करने पर सहमत बनी थी लेकिन चीन है कि अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहा है. लद्दाख में भारतीय सेना के अधिकारियों ने नोटिस किया है कि पिछले इलाकों में चीनी सैनिकों की संख्या बढ़ रही है और वो बार्डर पर इन्फ्रास्ट्रक्चर तैयार करने में जुटे हैं. इसके अलावा रिपोर्ट ये भी कहती है कि एलएसी की दूसरे जगहों पर भी चीन अपनी मौजूदगी बढ़ा रहा है.

जानकारी के मुताबिक लिपुलेख पास, उत्तरी सिक्किम और अरुणाचल प्रदेश के कुछ हिस्सों में एलएसी पर पीएलए सैनिक बड़ी संख्या में मौजूद हैं. लिपुलेख पास मानसरोवर यात्रा रूट पर है, जो इन दिनों नेपाल से विवाद को लेकर सुर्खियों में बना हुआ है. इस रूट पर भारत ने 80 किमी तक सड़क बनाई है जिसपर चीन आपत्ति कर रहा है.

दूसरी तरफ नेपाल है जो इन दिनों चीन के साथ मिलकर भारत को आंख दिखा रहा है. पिछले दिनों काठमांडू ने अपने नए राजनीतिक नक्शे में बदलाव करके भारत के साथ तनाव पैदा किया. नेपाल ने नए नक्शे में भारतीय इलाकों कालापानी, लिपुलेख और लिंपियाधुरा को शामिल कर लिया जबकि लिपुलेख भारत-चीन-नेपाल सीमा के ट्राइजंक्शन पर है.

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