नई दिल्ली. ब्लैक फंगस के मामलों में लगातार इजाफा हो रहा है। दिल्ली के गंगाराम अस्पताल में ब्लैक फंगस के 51 मरीज एडमिट हुए है। जिसमें से 75 फीसदी शुगर के मरीज हैं।

दिल्ली एम्स के न्यूरोलॉजी विभाग के हेड प्रो. एमवी पद्म श्रीवास्तव ने कहा कि ब्लैक फंगस के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। हम इसके तिहाई के आंकड़े में पहुंच गए हैं। हमने एम्स ट्रामा सेंटर और एम्स झज्जर में एक अलग म्यूकर वार्ड बनाया है। हमें प्रतिदिन 20 से ज्यादा ब्लैक फंगस के मरीज मिल रहे हैं।

लोगों में जागरूकता फैलानी होगी

इस बीमारी को लेकर सीएम केजरीवाल ने भी ट्वीट किया है। उन्होंने कहा कि, “ब्लैक फंगस बीमारी के बढ़ते मामलों को लेकर अधिकारियों एवं विशेषज्ञों के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक की। हमें इस बीमारी को बढ़ने से भी रोकना है और जिनको ये बीमारी हो रही है उन्हें जल्द से जल्द बेहतर इलाज देना है। इस बीमारी की रोकथाम और इलाज के लिए बैठक में कुछ अहम निर्णय लिए हैं।

उन्होंने कहा, ब्लैक फंगस के इलाज के लिए एलएनजेपी, जीटीबी और राजीव गांधी अस्पताल में सेंटर बनाए जाएंगे। इसके इलाज में इस्तेमाल होने वाली दवाओं का पर्याप्त मात्रा में प्रबंध किया जाएगा और बीमारी से बचाव के उपायों को लेकर लोगों में जागरूकता भी फैलाई जाएगी।

राजस्थान में महामारी घोषित

राजस्थान में ब्लैक फंगस को महामारी घोषित कर दिया गया है। ये राजस्थान महामारी अधिनियम 2020 के तहत घोषित किया गया है। ये आदेश विभाग के प्रमुख शासन सचिव अखिल अरोरा ने जारी किया है।

राज्य में कोरोना के बाद ब्लैक फंगस का भी आंकड़ा बढ़ रहा है। राज्य में मरीजों का आंकड़ा 700 पर हो गया है। किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय में अभी तक ब्लैक फंगस के 50 रोगी भर्ती हुए हैं।जिसमें 9 रोगी पिछले 24 घंटों में ही भर्ती हुए हैं।
अभी तक 6 रोगियों की सर्जरी की जा चुकी है।दुर्भाग्यपूर्ण है कि 4 रोगियों की मृत्यु हुई है। जबकि एक रोगी का सफलतापूर्वक इलाज कर घर भेजा जा चुका है।

ब्लैक फंगस के बढ़ते मामलों के बीच एक बार फिर कालाबाजारी करने वाले सक्रिय हो गए हैं। अब दिल्ली- एनसीआर से एंटीफंगल दवाएं और इंजेक्शन बाजार से गायब हो गए हैं।

क्या है ब्लैक फंगस

म्यूकोर्माइकोसिस एक फंगल संक्रमण है, जो मुख्य रूप से उन लोगों को अपनी चपेट में ले रहा है, जो पहले से डायबिटीज जैसी किसी अन्य बीमारी से ग्रस्त हैं। यह संक्रमण वातावरण में मौजूद रोगजनकों के खिलाफ लड़ने की शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को कम कर देता है। वातावरण में मौजूद फंगल बीजाणुओं के संपर्क में आने से लोग म्यूकोर्माइकोसिस का शिकार बनते हैं। किसी घाव के जरिये भी यह शरीर में प्रवेश कर सकता है, और संक्रमण का कारण बन सकता है।

विशेषज्ञों के मुताबिक ब्लैक फंगस के कारण सिर दर्द, बुखार, आंखों में दर्द, नाक बंद या साइनस के अलावा देखने की क्षमता पर भी असर पड़ता है।

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