श्रीनगर. जम्मू कश्मीर में पिछले 24 साल के दौरान सेना पर लगे मानवाधिकार उल्लंघन के आरोपों में 100 में 3 मामले ही सही निकले, 97 झूठे. रक्षा मंत्रालय से सूत्रों के मुताबिक 1994 से 31 मई 2018 तक जम्मू कश्मीर में सेना पर मानवाधिकार उल्लंघन के 1037 आरोप लगे. 24 साल में लगे इन आरोपों में से 1022 मालों पर जाँच पूरी हो चुकी है.

सभी 1037 मामलों में से 967 मामले झूठे पाए गए हैं. 15 मामलों पर अभी भी जाँच चल रही है. सूत्रों के मुताबिक, 24 साल के दौरान सेना पर लगे 1037 आरोपों में से सिर्फ 31 मामले सही पाए गए हैं. जिसके लिए 70 आर्मी पर्सनल पर कार्रवाई की गई है. इनमें से 18 मामलों में मुआवज़ा भी दिया जा चुका है. बाकी मामलों पर भी जांच चल रही है.

बता दें कि अभी हाल ही में संयुक्त राष्ट्र ने कश्मीर पर अपनी एक रिपोर्ट पेश की थी. इस रिपोर्ट में कथित तौर पर मानवाधिकार उल्लंघन की बात कहते हुए भारत और पाकिस्तान की आलोचना की गई थी. आर्मी चीफ जनरल बिपिन रावत ने इस रिपोर्ट को ‘प्रेरित’ बताया था. बिपिन रावत से पहले भारत सरकार ने भी इस रिपोर्ट पर तीखी प्रतिक्रिया दी थी.

संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट को ‘प्रेरित’ बताते हुए सेना प्रमुख ने जनरल रावत ने कहा था कि मानवाधिकार रिकॉर्ड के मामले में भारतीय सेना पर सवाल ही नहीं उठाए जा सकते. उन्होंने कहा था कि कश्मीरी ही नहीं बल्कि दुनियाभर की संस्थाएं भी भारतीय सेना के मानवाधिकार के बारे में जानती हैं. यह रिपोर्ट प्रेरित है जिस पर ज्यादा कुछ कहने की जरूरत नहीं है.

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