नई दिल्लीः उत्तर प्रदेश में 2017 में बीजेपी की योगी आदित्यनाथ सरकार आने के बाद से यूपी पुलिस द्वारा 4 अगस्त तक 24 जिलों में 2351 शूटआउट और 63 एनकाउंटर को अंजाम दिया गया है. पुलिस की इस कार्रवाई को राज्य सरकार ने सूबे को अपराध और अपराधियों से मुक्त करने वाला कदम बताया था. लेकिन इन मामलों की जांच करने पर 41 में से 21 मौतों पर दर्ज की गई एफआईआर में एनकाउंटर की जगह और उसके समय में अंतर पाया गया और इसके साथ ही सभी 20 एफआईआर में एक चौंकाने वाला पैटर्न सामने आया जिसमें पुलिस का एक समान वर्णन, एनकाउंटर की पूरी प्रक्रिया, और कब क्या हुआ जैसे बातें एक जैसी पाई गई हैं. जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने इस मुठभेड़ों पर यूपी सरकार को नोटिस जारी किया था जिसके पहले मई मे राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने राज्य को इनमें से 17 मामलों की जांच केलिए पांच सदस्यीय कमेटी बनाने का निर्देश दिया था.

अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्सप्रेस ने इन 63 मुकाबले में से 41 से जुड़े परिवारों और पुलिस स्टेशनों को ट्रैक किया और 21 मौतों से संबंधित 20 मामले में प्राथमिकी दर्ज की थी जिसमें से 21 मामलों में, या तो परिवार को एफआईआर उपलब्ध नहीं कराया गया है या परिवार ही वापस चले गए जिनका पता नहीं लगाया जा सका. जबकि कुछ थानों में पुलिस अधिकारियों ने एफआईआर देने से ये कहते हुए मना कर दिया कि उनकी नई पोस्टिंग हुई है.

इंडियन एक्सप्रेस द्वारा की गई जांच में इन 21 एनकाउंटर पर दर्ज की गई एफआईआर में दर्ज समय और दूरी इन मुठभेड़ों शक के घेरे में लाती है. इस जांच ने पुलिस द्वारा दर्ज प्राथमिकी के लिए एक चौंकाने वाला पैटर्न दिखाया जिसमें मुठभेड़ की ओर इशारा करते हुए घटनाओं के का एक जैसा वर्णन, मुठभेड़ के दौरान पुलिस कार्रवाई और कई मामलों में क्या हुआ कब हुआ जैसे वाक्य भी एक जैसे पाए गए हैं.

इंडियन एक्सप्रेस द्वारा की गई जांच में निम्नलिखित बिंदु सामने आए हैं जो इन एनकाउंटर पर सवाल खड़ा करती है.

1. पुलिस द्वारा दर्ज की गई 12 एफआईआर में बताया गया है कि मुखबर से सूचना मिलने पर अपराधी को रोक दिया गया था, अपराधी वहां मोटरसाइकिल से पहुंचे, जिसमें ज्यादातर या तो बाइक से गिरे या बाइक फिसलने के बाद अपराधियों ने फायरिंग की थी.

2. 11 एफआईआर में पुलिस ने कहा कि उन्होंने, सिखाए गए तरीके से या प्रशिक्षण के अनुसार काम किया.

3. 18 एफआईआर में पुलिस ने अपने अतुलनीय साहस का जिक्र किया है.

4. 16 एफआईआर में पुलिस ने इस बात का जिक्र किया है कि उन्होंने जान की परवाह किए बिना काम किया जिसमें से 9 मारे गए पुलिसकर्मियों ने बुलेट प्रूफ जैकेट पहना था.

5. 8 एफआईआर में इस बात का जिक्र किया गया है कि एनकाउंटर के दौरान और उसके बारे में प्रतिक्रिया देते हुए सर्वोच्च न्यायालय के आदेशों और राष्ट्रीय मानवाधिकार परिषद के दिशानिर्देशों का पूर्ण तरीके से पालन किया गया है.

इन सबके अलावा बहुत से बिंदु जांच में पाए गए हैं जो इन एनकाउंटर्स को शक के घेरे में खड़ा करते हैं. जिसके बाद मानवाधिकार आयोग ने 17 मामलों की जांच शुरू कर दी है. जिसमें ज्यादातर एनकाउंटर में यूपी पुलिस ने एक जैसी ही एफआईआर दर्ज की है. जिसके मुताबिक, अपराधी मोटरसाइकिल पर जा रहे थे जब पुलिस टीम ने उनको चेकिंग के दौरान रोकना चाहा तो संदिग्धों ने पुलिस टीम पर फायरिंग शुरू कर दी. अपराधियों द्वारा की जा रही फायरिंग के जवाब में पुलिस ने भी फायरिंग की, जिसमें अपराधी की मौत हो गई जिसके बाद उसका एक साथी भागने में सफल हो गया.

सुप्रीम कोर्ट ने फर्जी मुठभेड़ मामले में उत्तर प्रदेश सरकार को नोटिस भेजा, 2 हफ्तों में मांगा जवाब

योगी राज में रहम की भीख मांग रहे अपराधी, अब तक 1350 एनकाउंटर

देश और दुनिया की ताजातरीन खबरों के लिए हमे फॉलो करें फेसबुक,ट्विटर