नई दिल्ली. बीएस येदियुरप्पा ने सिर पर लटकती राजनीतिक अनिश्चितता की तलवार के साथ गुरुवार को तीसरी बार कर्नाटक के मुख्यमंत्री पद की कुर्सी संभाल ली. लेकिन अब ये संभलती दिख नहीं रही क्योंकि शीर्ष अदालत ने फैसला सुनाया है कि बीजेपी यानि येदियुरप्पा को शनिवार यानि 19 मई को फ्लोर टेस्ट करना होगा. बता दें गुरुवार सुबह 9 बजे राज्यपाल वजुभाई वाला ने पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई. बहुमत के जादुई आंकड़े से दूर रहने के बावजूद राज्यपाल ने बुधवार देर शाम को येदियुरप्पा को विधानसभा में सबसे बड़ी पार्टी के नेता के तौर पर सरकार बनाने का न्योता दिया था.

उन्हें शपथ लेने से रोकने के लिए कांग्रेस और जेडीएस ने बुधवार को रात 10 बजे सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया. बुधवार देर रात से गुरुवार सुबह लगभग 6 बजे तक चली सुनवाई के बाद शीर्ष अदालत ने राज्यपाल के फैसले में दखल देने से इनकार कर दिया. लेकिन बीजेपी से कहा कि वह सरकार बनाने के दावे के साथ राज्यपाल को दिए गए पत्र को पेश करें. कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि येदियुरप्पा का कुर्सी पर बने रहना उसके फैसले पर निर्भर करेगा. इसके बाद सुनवाई शुक्रवार सुबह 10.30 बजे के लिए टाल दी गई. अब इस मामले पर सुप्रीम कोर्ट आज सुनवाई करेगा.

सुनवाई के दौरान कांग्रेस की तरफ से अभिषेक मनु सिंघवी, बीजेपी की तरफ से पूर्व अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी और केंद्र सरकार की तरफ से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता कोर्ट में पेश हुए. कांग्रेस-जेडीएस की ओर से वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि बीजेपी के पास 104 विधायकों का समर्थन है और राज्यपाल ने येदियुरप्पा को सरकार बनाने का न्योता दिया. ये पूरी तरह असंवैधानिक है. सिंघवी ने कोर्ट से राज्यपाल का फैसला रद्द करने की अपील की.

इस पर सुप्रीम कोर्ट ने पूछा- क्या सुप्रीम कोर्ट गवर्नर को किसी पार्टी को सरकार बनाने का न्योता देने से रोक सकता है?

बीजेपी के वकील रोहतगी ने सुनवाई के दौरान कहा कि इस मामले में देर रात सुनवाई जरूरी नहीं है. यदि कोई शपथ ले लेता है तो आसमान नहीं टूट पड़ेगा. राज्यपाल ने सोच-समझकर फैसला किया है. बीजेपी के पास विधायक हैं या नहीं इसका फैसला फ्लोर पर होगा, गवर्नर या मुख्यमंत्री के आवास पर नहीं. अटॉर्नी जनरल के के वेणुगोपाल ने कहा कि ये याचिका दायर नहीं की जानी चाहिए थी. कांग्रेस और जेडीएस को फ्लोर टेस्ट के लिए इंतजार करना चाहिए था. शपथ लेने के लिए आमंत्रित्र करना राज्यपाल का काम है. राष्ट्रपति और राज्यपाल किसी भी अदालत के लिए उत्तरदायी नहीं हैं.

करीब ढाई घंटे की सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने शपथ ग्रहण समारोह पर रोक लगाने से इनकार कर दिया. अदालत ने अपने फैसले में कहा कि हम राज्यपाल के आदेश पर रोक नहीं लगा सकते. उन्होंने बीजेपी से वह चिट्ठी भी मांगी जो राज्यपाल को सौंपी गई थी. सुप्रीम कोर्ट ने दोनों पक्षों को अपने-अपने विधायकों की लिस्ट सौंपने को कहा है. शुक्रवार सुबह साढ़े 10 बजे अदालत फिर इस मामले में सुनवाई करेगी.

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