नई दिल्ली: गृह मंत्री अमित शाह ने सोमवार को राज्यसभा को संबोधित करते हुए कश्मीर का मुद्दा उठाते हुए कहा कि मैं नरेन्द्र मोदी सरकार की तरफ से सदन के सभी सदस्यों तक ये बात रखना चाहता हूं कि कश्मीर भारत का अभिन्न अंग हैं और इसे कोई देश से अलग नहीं कर सकता. इसके साथ ही संसद के दोनों सदनों में जम्मू-कश्मीर में राष्ट्रपति शासन की अवधि 6 महीने और बढ़ाने को भी मंजूरी दे दी गई. राज्यसभा में गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि जम्हूरियत सिर्फ परिवार वालों के लिए ही सीमित नहीं रहनी चाहिए बल्कि जम्हूरियत गांव-गांव तक जानी चाहिए, चालीस हजार पंच- सरपंच तक जानी चाहिए और ये जम्हूरियत को वहां तक ल ले जाने का काम नरेंद्र मोदी सरकार ने किया है. गृह मंत्री ने कहा कि जम्मू कश्मीर में 70 साल से करीब 40 हजार लोग घर में बैठे थे जो पंच-सरपंच चुने जाने का रास्ता देख रहे थे लेकिन वहां चुनाव ही नहीं कराए गए तो फिर जम्हूरियत की बात करते हैं?

अमित शाह ने कहा कि क्या सूफी परंपरा कश्मीरियत का हिस्सा नहीं थ? कश्मीर कभी पूरे देश में सूफियत का गढ़ माना जाता था. आखिर वो संस्कृति कहां चली गई? क्यों सूफी संतों को उनके घरों से निकाल दिया गया, उनके धार्मिक स्थानों को तोड़ दिया गया, सूफी संतों को चुन-चुन कर मारा गया, आखिर ये कौन सी जम्हूरियत है?

उन्होंने अलगाववादियों को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि जो भारत को तोड़ने की बात करेगा उसको उसी भाषा में जवाब मिलेगा और जो भारत के साथ रहना चाहते है उसके कल्याण के लिए हम चिंता करेंगे. गृह मंत्री ने कहा कि जम्मू कश्मीर के लोगों को किसी से डरने की जरुरत नहीं है, कश्मीर की आवाम और उसकी संस्कृति का संरक्षण हम करेंगे.

गृहमंत्री ने कहा कि ‘मैं गर्व के साथ कह सकता हूं कि आयुष्मान भारत योजना के तहत एक साल के अंदर किसी एक राज्य में सबसे ज्यादा लाभार्थी हैं तो वो जम्मू कश्मीर में हैं. घाटी में गरीबों को मुफ्त इलाज की सुविधा दी जा रही है और यही जम्हूरियतत है, इंसानियत है और कश्मीरियत है जिसका पालन मोदी सरकार कर रही है.’

विपक्ष पर हमला बोलते हुए अमित शाह ने कहा कि गुलाम नबी साहब ने बोला कि चुनाव आप करा दीजिए, मैं बताना चाहता हूं कि हम कांग्रेस नहीं हैं कि हम ही चुनाव करा दें. हमारे शासन में चुनाव आयोग ही चुनाव कराता है. हमारे शासन में हम चुनाव आयोग को नहीं चलाते. सपा नेता राम गोपल के बयान पर भी पलटवार करते हुए अमित शाह ने कहा कि ‘राम गोपाल जी कहते हैं कि कश्मीर विवादित है तो मैं बताना चाहूंगा कि न कश्मीर विवादित है, न POK कश्मीर विवादित है. ये सब भारत का अभिन्न अंग हैं.’

महबूबा मुफ्ती की पार्टी से गठबंधन पर उन्होंने कहा कि ‘मैं सदन के माध्यम से सभी को बताना चाहता हूं कि हम जम्मू कश्मीर में पीडीपी के साथ गठबंधन करें, ये हमारा नहीं बल्कि वहां की जनता का फैसला था. तब एक खंडित जनादेश मिला था. मगर जब हमें लगा कि अलगाववाद को बढ़ावा मिल रहा है और पानी सिर के ऊपर जा रहा है तो हमने सरकार से हटने में तनिक भी देर नहीं की.

कांग्रेस पार्टी पर हमला बोलते हुए उन्होंने कहा कि कांग्रेस को एक बात बतानी चाहिए कि 1949 को जब एक तिहाई कश्मीर पाकिस्तान के कब्जें में था तो आपने सीजफायर क्यों कर दिया? ये सीजफायर न हुआ होता ये झगड़ा ही न होता, ये आतंकवाद ही नहीं होता, करीब 35 हजार जानें नहीं गई होती. इन सबका मूल कारण सीजफायर ही था. 

उन्होंने कहा कि मनोज झा और गुलाम नबी आजाद ने बड़ी आपत्ति जाहिर की कि हम नेहरू जी के बारे में देश की जनता में कुछ गलत विचार खड़ा करना चाहते हैं. ये ठीक सोच नहीं है. हम नेहरू जी के बारे में कोई गलत विचार खड़ा करना नहीं चाहते है और न जनता को गुमराह करना चाहते हैं. लेकिन एक बात है कि इतिहास की भूलों से जो देश नहीं सीखते हैं उनका भविष्य अच्छा नहीं होता है. इतिहस की भूलों की चर्चा होनी चाहिए, और इतिहास की भूलों से सीखना चाहिए. गृह मंत्री ने आगे कहा कि आजाद साहब ने कहा कि जम्मू कश्मीर में आवाजाही बंद कर दी जाती है. ये पहली बार नहीं हो रहा है. जब CRPF के काफिले जाते हैं तो रोड का आवागमन बंद किया जाता है. 40 जवान मारे जाएं और हम हाथ में हाथ रखकर बैठ जाएं, ये नहीं हो सकता. सुरक्षा के लिए आवागमन रोकना पड़े तो रुकेगा.

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